Allahabad High Court

उत्तर प्रदेश

सरकारी वकीलों की तैनाती पर Allahabad High Court की सख्ती: न्यायिक व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग

Allahabad High Court लखनऊ पीठ का यह आदेश न केवल न्यायिक व्यवस्था की पारदर्शिता की मांग को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि न्यायपालिका अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उत्तर प्रदेश सरकार को इस आदेश को गंभीरता से लेते हुए कानूनी प्रक्रिया में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।

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उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में मुसलमानों या ईसाइयों द्वारा कहीं भी धर्मांतरण कराने का कोई कार्य नहीं- Maulana Shahabuddin Razvi Bareilvi

Maulana Shahabuddin Razvi Bareilvi ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पहले से ही धर्मांतरण का कानून बना हुआ है। उसमें सख्त से सख्त धाराएं हैं, अगर कोई व्यक्ति उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण कराएगा तो इस कानून के तहत जेल की सलाखों में चला जायेगा। मौलाना ने आगे कहा कि संविधान में स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन की इजाजत दी है, मगर धर्म परिवर्तन कराने के लिए डराना, धमकाना या लालच देना संविधान के खिलाफ है। इस्लाम भी इसी बात की शिक्षा देता है।

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उत्तर प्रदेश

शाइन सिटी के डायरेक्टर राशिद नसीम पर करोड़ों रुपये ठगने का आरोप, रिपोर्ट मांगी Allahabad High Court ने

Allahabad High Court ने निर्देश दिया कि मामले के आरोपियों की ओर से किसी तीसरे पक्ष को कोई और बिक्री विलेख निष्पादित नहीं किया जाएगा, जिससे समाज में विश्वासघात का सामना करना पड़े। साथ ही कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी अधिकारी यह ध्यान रखें कि इस मामले में शामिल कोई भी व्यक्ति देश छोड़कर न जा पाए, जिससे सामाजिक संरक्षण का संकेत मिलता है।

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उत्तर प्रदेश

सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटरों की जानकारी न पेश करने पर सख्त रुख Allahabad High Court ने

Allahabad High Court  ने पहले राज्य सरकार से पूछा था कि प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में कितने वेंटिलेटर हैं? इनकी क्या स्थिति है? कोर्ट ने सरकारी वकील को हर जिले का ब्यौरा क्रमवार चार हफ्ते में पेश करने का आदेश दिया था।

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उत्तर प्रदेश

7 मई को सुबह 11:30 बजे से श्री कृष्ण जन्मभूमि मामले की आगे की सुनवाई होगी- Allahabad High Court

Allahabad High Court मुस्लिम पक्ष की बहस पहले ही पूरी हो चुकी है. अदालत में अभी मुकदमों की पोषणीयता पर ही बहस चल रही है. मुस्लिम पक्ष ने ऑर्डर 7 रूल 11 के तहत याचिकाओं की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए इन्हें खारिज किए जाने की मांग की है.

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उत्तर प्रदेश

विधि अधिकारी की नौकरी वकालत नहीं, वकालतनामा लगाना उल्लंघन-Allahabad High Court

Allahabad High Court उन्हें प्रारंभिक और लिखित परीक्षा में सफलता मिली थी, लेकिन साक्षात्कार के बाद उनका नाम फाइनल लिस्ट में नहीं था। इस निर्णय से स्पष्ट होता है कि न्यायिक सेवा की शर्तों के अनुसार विधिक अधिकारी को कंपनी से इस्तीफा देने के बाद भी सात वर्षों की निरंतर प्रैक्टिस की आवश्यकता होती है।

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उत्तर प्रदेश

Allahabad High Court-सेवानिवृत्त कर्मियों के परिलाभों का भुगतान न करने पर नगर पालिका परिषद, सिरसागंज के चेयरमैन/अधिशासी अधिकारी के वेतन भुगतान पर रोक

Allahabad High Court न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने राजेश कुमार की याचिका पर उक्त आदेश देते हुए राज्य सरकार व परिषद के चेयरमैन से तीन सप्ताह में जवाब भी मांगा है। याचिका पर 14 मई को सुनवाई होगी।

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उत्तर प्रदेश

आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद पहले से जारी तबादला आदेश पर अमल नहीं- Allahabad High Court

Allahabad High Court  ने सुनवाई के बाद आदेश में कहा कि राज्य सरकार रिलीविंग आदेश का सटीक समय नहीं बता सकी। जबकि रिकॉर्ड से यह साफ है कि याची को रिलीविंग आदेश 16 मार्च को रात साढ़े आठ बजे प्राप्त कराया गया। ऐसे में आचार संहिता के प्रावधानों के तहत अधिसूचना जारी होने से पहले भी पारित तबादला आदेश को भी चुनाव आयोग की अनुमति से ही अमल में लाया जा सकता है।

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उत्तर प्रदेश

जौनपुर के बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह को Allahabad High Court ने राहत देने से किया इनकार

Allahabad High Court -7 साल की सजा होने की वजह से धनंजय सिंह अभी चुनाव नहीं लड़ सकते हैं. दरअसल पीपुल्स रिप्रेजेंटेशन एक्ट के तहत 2 साल से ज्यादा की सजा पाने वाला व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकते. जौनपुर की अदालत ने 6 मार्च को धनंजय सिंह को 7 साल की सजा सुनाई थी. अपहरण के मामले में धनंजय को दोषी दरार देकर सजा का ऐलान किया गया था.

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उत्तर प्रदेश

अंतरधार्मिक जोड़े के लिव – इन संबंध को विवाह की तरह मंजूरी नहीं-Allahabad High Court

Allahabad High Court ने युवती के आग्रह पर उसकी इच्छा के मुताबिक कानूनी प्रावधानों के तहत विवाह करने तक उसे सुरक्षित लखनऊ के प्रयाग नारायण रोड स्थित महिला संरक्षण गृह लखनऊ भेजने का आदेश दिया। इस मामले की सुनवाई के बाद युवती के परिजनों द्वारा उसे खींचकर ले जाने और आधार कार्ड ले लेने की कोशिश की गई। बाद में युवती का आधार कार्ड उसे वापस मिल गया।

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बालिग जोड़े को वैयक्तिक स्वतंत्रता है, केस चलाने का कोई औचित्य नहीं: Allahabad High Court

Allahabad High Court प्रेम विवाह न केवल एक व्यक्ति के अधिकारों का प्रतीक है, बल्कि यह समाज की प्रगति और विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए, हमें इसे स्वीकारने के लिए तैयार होना चाहिए, और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि समाज हमारे युवाओं को समर्थन और साहस प्रदान करता है, ताकि वे अपने सपनों को पूरा कर सकें और अपने जीवन को खुशी और संतोष से भर सकें।

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