इलाहाबाद हाईकोर्ट

उत्तर प्रदेश

Mahoba की 18.14 एकड़ जमीन पर 45 साल पुराने कब्रिस्तान विवाद का फैसला, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दूसरी अपील की खारिज

Mahoba की 18.14 एकड़ जमीन से जुड़े करीब 45 साल पुराने विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दूसरी अपील खारिज कर दी। बाबूलाल बनाम शहाबुद्दीन मामले में कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने साक्ष्यों और मौके की जांच रिपोर्ट के आधार पर जमीन को लंबे समय से कब्रिस्तान के रूप में इस्तेमाल किए जाने का निष्कर्ष निकाला था और इस रिपोर्ट को प्रभावी ढंग से चुनौती नहीं दी गई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नियम 8 सीपीसी के तहत अदालत की अनुमति के बिना दायर मुकदमा पूरी मुस्लिम बिरादरी की ओर से प्रतिनिधि वाद नहीं माना जा सकता और उसका प्रभाव केवल संबंधित पक्षकारों तक सीमित रहेगा।

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Muzaffarnagar और आसपास से प्रमुख खबरें

Muzaffarnagar जिला सहकारी बैंक में ‘कुर्सी का खेल’ पलटा, हाईकोर्ट के फैसले से सभापति ठाकुर रामनाथ सिंह समेत 3 संचालक OUT!

Muzaffarnagar जिला सहकारी बैंक के समीकरण में बड़ा बदलाव आया है। ठाकुर रामनाथ सिंह समेत तीन संचालक पदमुक्त हो गए हैं और संचालक पद समाप्त होने के साथ ठाकुर रामनाथ सिंह के सभापति पद पर बने रहने का आधार भी खत्म हो गया है। मामला सहकारी समितियों के पुनर्गठन और विभाजन के बाद संचालक पद की वैधता से जुड़ा था। अब बैंक के संचालक मंडल में 10 सदस्यीय बोर्ड के अस्तित्व में होने की जानकारी है। खाली हुए पदों और आगे की नेतृत्व प्रक्रिया को लेकर निर्णय संबंधित सहकारी नियमों और शासन के निर्देशों के अनुसार होगा। इस घटनाक्रम ने मुजफ्फरनगर की सहकारी राजनीति में नई चर्चाओं को जरूर जन्म दे दिया है, लेकिन आगे की स्थिति के लिए आधिकारिक प्रक्रिया और संबंधित आदेशों का इंतजार करना होगा।

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उत्तर प्रदेश

CRPF कांस्टेबल को दूसरी शादी पड़ी भारी! पहली पत्नी के रहते बिना विभागीय अनुमति विवाह पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी को ठहराया सही

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पहली पत्नी के जीवित रहते बिना विभागीय अनुमति दूसरी शादी करने वाले CRPF कांस्टेबल की बर्खास्तगी को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने कहा कि ऐसी स्थिति में दूसरी शादी करना CRPF के सेवा नियमों का उल्लंघन और गंभीर कदाचार माना जा सकता है। संबंधित कर्मचारी ने वर्ष 1976 में उर्मिला देवी से विवाह किया था और बाद में वर्ष 1989 में उनके बच्चों के साथ घर छोड़कर चले जाने का दावा किया।

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उत्तर प्रदेश

39 साल बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 1983 के Farrukhabad दोहरे हत्याकांड में ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा, जीवित बचे आरोपी रमाकांत बरी

Farrukhabad दोहरे हत्याकांड में सुनाए गए इस फैसले में स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि केवल ठोस, विश्वसनीय और संदेह से परे सिद्ध किए गए साक्ष्यों के आधार पर ही कायम रह सकती है। अदालत ने पाया कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की विश्वसनीयता तथा जांच में मौजूद कमियों के कारण अभियोजन अपना मामला आवश्यक कानूनी मानकों के अनुरूप साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट का फैसला निरस्त करते हुए जीवित बचे आरोपी रमाकांत को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।

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उत्तर प्रदेश

Allahabad High Court का अहम फैसला: पत्नी की सुविधा या भरण-पोषण का लंबित मामला ही मुकदमा ट्रांसफर करने का आधार नहीं

Allahabad High Court ने अपने इस निर्णय में स्पष्ट किया है कि वैवाहिक मामलों में मुकदमे के स्थानांतरण का अधिकार केवल न्यायहित की रक्षा के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए, न कि किसी एक पक्ष की सुविधा के आधार पर। अदालत ने कहा कि यदि यह सिद्ध नहीं होता कि वर्तमान न्यायालय में निष्पक्ष न्याय संभव नहीं है, तो केवल यात्रा की असुविधा, नाबालिग बच्चे की देखभाल या किसी अन्य जिले में लंबित भरण-पोषण का मामला स्थानांतरण का पर्याप्त आधार नहीं बन सकता। साथ ही अलीगढ़ परिवार न्यायालय को संबंधित मामले का शीघ्र निस्तारण करने का निर्देश भी दिया गया है।

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उत्तर प्रदेश

ड्यूटी छोड़ वर्दी में शराब के नशे में मिला सिपाही, Allahabad High Court ने बर्खास्तगी को बताया सही; याचिका खारिज

Allahabad High Court ने अपने इस निर्णय में स्पष्ट किया है कि विभागीय जांच के दौरान यदि कर्मचारी को विधिसम्मत अवसर प्रदान किया गया हो और वह स्वयं उसका उपयोग न करे, तो बाद में प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। देवरिया में तैनात रहे सिपाही संत राम गौतम की बर्खास्तगी को बरकरार रखते हुए अदालत ने अनुशासन, जवाबदेही और पुलिस सेवा की गरिमा को सर्वोच्च महत्व देने का संदेश दिया है।

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उत्तर प्रदेश

Allahabad High Court की सख्ती: आदेशों की अनदेखी पर हरदोई की बीएसए तलब, 30 हजार रुपये का हर्जाना; 6 अगस्त को व्यक्तिगत पेशी के निर्देश

Allahabad High Court की लखनऊ पीठ द्वारा पारित यह आदेश न्यायालय के निर्देशों के समयबद्ध अनुपालन और प्रशासनिक जवाबदेही के महत्व को रेखांकित करता है। फिलहाल अदालत ने हरदोई की बेसिक शिक्षा अधिकारी को 6 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जांच रिपोर्ट तथा आदेशों के पालन में हुई देरी का स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। मामले में आगे की कार्रवाई अगली सुनवाई और प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर तय होगी।

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उत्तर प्रदेश

मदरसा आधुनिकीकरण योजना में कथित ₹2.14 लाख गबन मामला: Allahabad High Court ने शिक्षकों के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार

Allahabad High Court ने आजमगढ़ के मदरसा आधुनिकीकरण योजना से जुड़े कथित ₹2.14 लाख गबन मामले में एफआईआर रद्द करने से इनकार किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश आरोपों को सिद्ध मानने का नहीं है, बल्कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच जारी रखने की आवश्यकता को देखते हुए पारित किया गया है। मामले का अंतिम निष्कर्ष जांच और आगामी न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

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उत्तर प्रदेश

क्रिकेटर यश दयाल को Allahabad High Court से बड़ी राहत: दुष्कर्म केस की आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक, ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई फिलहाल थमी

Allahabad High Court ने क्रिकेटर यश दयाल के खिलाफ गाजियाबाद की ट्रायल कोर्ट में चल रही आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाई है। यह आदेश अंतिम निर्णय नहीं है और मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में जारी रहेगी। दूसरी ओर, यश दयाल ने अपने घरेलू क्रिकेट करियर में नया अध्याय शुरू करते हुए उत्तर प्रदेश की टीम छोड़कर छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ से जुड़ने का फैसला किया है। मामले का अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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उत्तर प्रदेश

UP में 10 लाख से ज्यादा Arms License, 6 हजार से अधिक दागी! हाईकोर्ट ने बाहुबलियों और रसूखदारों की पूरी कुंडली मांगी

Arms License धारियों और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों से जुड़े आंकड़ों ने कानून व्यवस्था और गन कल्चर पर नई बहस छेड़ दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती ने यह साफ संकेत दिया है कि हथियार लाइसेंस और सरकारी सुरक्षा जैसे संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। अब सभी की नजर 26 मई तक सरकार द्वारा पेश की जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी हुई है।

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उत्तर प्रदेश

लिव-इन रिलेशनशिप पर Allahabad High Court की बड़ी टिप्पणी: कम उम्र होने पर सुरक्षा नहीं, कोर्ट बोला- बाल विवाह को नहीं दे सकते बढ़ावा

Allahabad High Court का यह फैसला लिव-इन रिलेशनशिप और कानूनी विवाह आयु को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। अदालत ने साफ किया कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन उसे कानून की सीमाओं के भीतर ही देखा जाएगा। कम उम्र में संबंधों को लेकर अदालत का यह रुख आने वाले समय में ऐसे मामलों की सुनवाई में एक महत्वपूर्ण कानूनी संदर्भ माना जा सकता है।

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