इलाहाबाद हाईकोर्ट

उत्तर प्रदेश

39 साल बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 1983 के Farrukhabad दोहरे हत्याकांड में ट्रायल कोर्ट का फैसला पलटा, जीवित बचे आरोपी रमाकांत बरी

Farrukhabad दोहरे हत्याकांड में सुनाए गए इस फैसले में स्पष्ट किया कि आपराधिक मामलों में दोषसिद्धि केवल ठोस, विश्वसनीय और संदेह से परे सिद्ध किए गए साक्ष्यों के आधार पर ही कायम रह सकती है। अदालत ने पाया कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की विश्वसनीयता तथा जांच में मौजूद कमियों के कारण अभियोजन अपना मामला आवश्यक कानूनी मानकों के अनुरूप साबित नहीं कर सका। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट का फैसला निरस्त करते हुए जीवित बचे आरोपी रमाकांत को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।

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Allahabad High Court का अहम फैसला: पत्नी की सुविधा या भरण-पोषण का लंबित मामला ही मुकदमा ट्रांसफर करने का आधार नहीं

Allahabad High Court ने अपने इस निर्णय में स्पष्ट किया है कि वैवाहिक मामलों में मुकदमे के स्थानांतरण का अधिकार केवल न्यायहित की रक्षा के लिए प्रयोग किया जाना चाहिए, न कि किसी एक पक्ष की सुविधा के आधार पर। अदालत ने कहा कि यदि यह सिद्ध नहीं होता कि वर्तमान न्यायालय में निष्पक्ष न्याय संभव नहीं है, तो केवल यात्रा की असुविधा, नाबालिग बच्चे की देखभाल या किसी अन्य जिले में लंबित भरण-पोषण का मामला स्थानांतरण का पर्याप्त आधार नहीं बन सकता। साथ ही अलीगढ़ परिवार न्यायालय को संबंधित मामले का शीघ्र निस्तारण करने का निर्देश भी दिया गया है।

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उत्तर प्रदेश

ड्यूटी छोड़ वर्दी में शराब के नशे में मिला सिपाही, Allahabad High Court ने बर्खास्तगी को बताया सही; याचिका खारिज

Allahabad High Court ने अपने इस निर्णय में स्पष्ट किया है कि विभागीय जांच के दौरान यदि कर्मचारी को विधिसम्मत अवसर प्रदान किया गया हो और वह स्वयं उसका उपयोग न करे, तो बाद में प्राकृतिक न्याय के उल्लंघन का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता। देवरिया में तैनात रहे सिपाही संत राम गौतम की बर्खास्तगी को बरकरार रखते हुए अदालत ने अनुशासन, जवाबदेही और पुलिस सेवा की गरिमा को सर्वोच्च महत्व देने का संदेश दिया है।

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Allahabad High Court की सख्ती: आदेशों की अनदेखी पर हरदोई की बीएसए तलब, 30 हजार रुपये का हर्जाना; 6 अगस्त को व्यक्तिगत पेशी के निर्देश

Allahabad High Court की लखनऊ पीठ द्वारा पारित यह आदेश न्यायालय के निर्देशों के समयबद्ध अनुपालन और प्रशासनिक जवाबदेही के महत्व को रेखांकित करता है। फिलहाल अदालत ने हरदोई की बेसिक शिक्षा अधिकारी को 6 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जांच रिपोर्ट तथा आदेशों के पालन में हुई देरी का स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए हैं। मामले में आगे की कार्रवाई अगली सुनवाई और प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर तय होगी।

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मदरसा आधुनिकीकरण योजना में कथित ₹2.14 लाख गबन मामला: Allahabad High Court ने शिक्षकों के खिलाफ FIR रद्द करने से किया इनकार

Allahabad High Court ने आजमगढ़ के मदरसा आधुनिकीकरण योजना से जुड़े कथित ₹2.14 लाख गबन मामले में एफआईआर रद्द करने से इनकार किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश आरोपों को सिद्ध मानने का नहीं है, बल्कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच जारी रखने की आवश्यकता को देखते हुए पारित किया गया है। मामले का अंतिम निष्कर्ष जांच और आगामी न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

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क्रिकेटर यश दयाल को Allahabad High Court से बड़ी राहत: दुष्कर्म केस की आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक, ट्रायल कोर्ट की कार्रवाई फिलहाल थमी

Allahabad High Court ने क्रिकेटर यश दयाल के खिलाफ गाजियाबाद की ट्रायल कोर्ट में चल रही आपराधिक कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाई है। यह आदेश अंतिम निर्णय नहीं है और मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में जारी रहेगी। दूसरी ओर, यश दयाल ने अपने घरेलू क्रिकेट करियर में नया अध्याय शुरू करते हुए उत्तर प्रदेश की टीम छोड़कर छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ से जुड़ने का फैसला किया है। मामले का अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

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UP में 10 लाख से ज्यादा Arms License, 6 हजार से अधिक दागी! हाईकोर्ट ने बाहुबलियों और रसूखदारों की पूरी कुंडली मांगी

Arms License धारियों और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों से जुड़े आंकड़ों ने कानून व्यवस्था और गन कल्चर पर नई बहस छेड़ दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती ने यह साफ संकेत दिया है कि हथियार लाइसेंस और सरकारी सुरक्षा जैसे संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। अब सभी की नजर 26 मई तक सरकार द्वारा पेश की जाने वाली रिपोर्ट पर टिकी हुई है।

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लिव-इन रिलेशनशिप पर Allahabad High Court की बड़ी टिप्पणी: कम उम्र होने पर सुरक्षा नहीं, कोर्ट बोला- बाल विवाह को नहीं दे सकते बढ़ावा

Allahabad High Court का यह फैसला लिव-इन रिलेशनशिप और कानूनी विवाह आयु को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। अदालत ने साफ किया कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन उसे कानून की सीमाओं के भीतर ही देखा जाएगा। कम उम्र में संबंधों को लेकर अदालत का यह रुख आने वाले समय में ऐसे मामलों की सुनवाई में एक महत्वपूर्ण कानूनी संदर्भ माना जा सकता है।

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Prayagraj-इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश-झूठे शादी के वायदे पर बलात्कार का केस चलेगा

Prayagraj इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस आदेश ने यह साफ कर दिया है कि विवाह का झूठा वादा कानूनी संरक्षण का आधार नहीं हो सकता। यह आदेश न केवल संबंधित मामले में न्याय की प्रक्रिया को साफ करता है, बल्कि समाज में ऐसे मामलों के प्रति कानूनी दृष्टिकोण को भी स्पष्ट करता है। इस प्रकार के मामलों में न्याय के प्रति गंभीरता और संवेदनशीलता आवश्यक है

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रेगुलर क्लासेज नहीं चली, कोरोना काल में ली गई फीस का 15% हिस्सा स्कूलों को लौटाना होगा- Allahabad High Court

सहमति जताते हुए Allahabad High Court ने अभिभावकों के पक्ष में यह बड़ा फैसला सुनाया है.यह फैसला पूरे प्रदेश के स्कूलों पर लागू होगा और इस आदेश के तहत अगले 2 महीने में 15 फ़ीसदी फीस एडजस्ट करने या फिर स्कूल छोड़ चुके बच्चों के अभिभावकों को यह पैसा वापस करने की एक्सरसाइज करने की जिम्मेदारी स्कूलों की होगी. 

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Prayagraj HC में हिंदू पक्ष की बहस पूरी,  ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में दलीलें पेश

Prayagraj:राखी सिंह तथा अन्य ने ज्ञानवापी परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी में विग्रहों की सुरक्षा और नियमित पूजा पाठ के आदेश देने के आग्रह के संबंध में वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में याचिका दायर की थी जिसके आदेश पर पिछले मई माह में ज्ञानवापी परिसर की वीडियोग्राफी सर्वे कराया गया था.

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