संघर्ष से शिखर तक—कोलकाता के Aranyak Ghosh बने भारत के 95वें ग्रैंडमास्टर, बीमारी और आर्थिक चुनौतियों पर पाई जीत
Aranyak Ghosh कोलकाता के अरण्यक घोष की ग्रैंडमास्टर बनने की उपलब्धि केवल एक खिलाड़ी की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, समर्पण और परिवार के त्याग की प्रेरक यात्रा है। सीमित संसाधनों, बीमारी और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने जिस दृढ़ता से यह मुकाम हासिल किया है, वह भारतीय खेल जगत के लिए नई ऊर्जा और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।
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