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अमेरिका-Iran रिश्तों में बड़ा मोड़: तेल प्रतिबंधों में 60 दिन की राहत, भारत समेत कई देशों के लिए खुल सकते हैं नए ऊर्जा अवसर

Iran के तेल और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को 60 दिनों की राहत दिए जाने को पश्चिम एशिया की कूटनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। स्विट्जरलैंड में जारी वार्ता, होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा, IAEA निरीक्षकों की संभावित वापसी और क्षेत्रीय तनाव कम करने के प्रयासों ने वैश्विक समुदाय का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि यह राहत केवल एक अस्थायी व्यवस्था साबित होती है या फिर अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जमे अविश्वास को कम कर किसी व्यापक और स्थायी समझौते की दिशा में नया अध्याय खोलती है।

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Iran के 440 किलो यूरेनियम पर अटका दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु समझौता! ट्रंप ने रूस-चीन पर जताई आपत्ति, कजाकिस्तान बना नया विकल्प

Iran के 440 किलो संवर्धित यूरेनियम को लेकर चल रही कूटनीतिक खींचतान अब वैश्विक सुरक्षा का बड़ा मुद्दा बन चुकी है। अमेरिका इसे रूस या चीन के हाथों में नहीं देखना चाहता, जबकि कजाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय निगरानी में संभावित समाधान के रूप में उभर रहा है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह संवेदनशील परमाणु सामग्री किसके नियंत्रण में जाएगी, लेकिन इतना स्पष्ट है कि इस फैसले का असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की सामरिक और राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।

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Venezuela से हटाया गया 13.5 किलो हाईली Enriched Uranium, अमेरिका ने गुप्त ऑपरेशन में किया सुरक्षित ट्रांसफर

Venezuela से 13.5 किलो हाईली एनरिच्ड यूरेनियम हटाने का यह ऑपरेशन अंतरराष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका, वेनेजुएला, ब्रिटेन और IAEA के संयुक्त प्रयास से पूरा हुआ यह मिशन केवल सुरक्षा रणनीति नहीं बल्कि वैश्विक कूटनीति का भी बड़ा संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में परमाणु सामग्री की निगरानी और नियंत्रण को लेकर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ज्यादा मजबूत हो सकता है।

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ईरान पर अमेरिकी दबाव के बीच Putin का बड़ा बयान: ‘परमाणु हथियार बनाने का कोई सबूत नहीं’, रूस ने दिया नया ऑफर

Putin का बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है। रूस ने जहां ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के आरोपों पर सवाल उठाए हैं, वहीं 2015 जैसे समझौते को दोबारा लागू करने और ईरानी यूरेनियम को सुरक्षित रखने जैसी पेशकश कर खुद को एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में पेश किया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या वैश्विक शक्तियां बातचीत के रास्ते पर आगे बढ़ती हैं या पश्चिम एशिया का यह संकट और गहराता है।

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