ईरान पर अमेरिकी दबाव के बीच Putin का बड़ा बयान: ‘परमाणु हथियार बनाने का कोई सबूत नहीं’, रूस ने दिया नया ऑफर
News-Desk
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Geopolitics, IAEA, international news, Iran nuclear deal, Putin, putin news, Russia News, US Iran Conflict, अमेरिका-ईरान तनाव, ईरान परमाणु कार्यक्रम, पश्चिम एशिया संकट, रूस ईरान संबंध, व्लादिमीर पुतिनVladimir Putin ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ऐसा बयान दिया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। रूस में आयोजित विक्ट्री डे परेड के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए पुतिन ने कहा कि अब तक ऐसा कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि Iran परमाणु हथियार बना रहा है।
रूसी राष्ट्रपति का यह बयान ऐसे समय आया है, जब United States लगातार ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है और पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। पुतिन के बयान को वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप माना जा रहा है।
‘अमेरिका-ईरान संघर्ष बेहद जटिल’, पुतिन ने बातचीत से समाधान पर दिया जोर
मीडिया से बातचीत के दौरान पुतिन ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच जो हालात बने हुए हैं, वे बेहद संवेदनशील और जटिल हैं। उन्होंने कहा कि रूस दोनों देशों के संपर्क में है और लगातार तनाव कम करने की कोशिश कर रहा है।
पुतिन ने कहा कि युद्ध या सैन्य कार्रवाई किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकती। उन्होंने उम्मीद जताई कि बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए इस संकट का शांतिपूर्ण हल निकाला जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस खुद को इस पूरे मामले में मध्यस्थ की भूमिका में पेश करने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि उसके ईरान और खाड़ी देशों दोनों के साथ मजबूत संबंध हैं।
‘ईरान परमाणु हथियार बना रहा है, इसका कोई सबूत नहीं’
अपने बयान में पुतिन ने सबसे महत्वपूर्ण बात यह कही कि रूस को कभी ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में काम कर रहा है।
यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका की ओर से लंबे समय से यह दावा किया जाता रहा है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम हथियार निर्माण की दिशा में आगे बढ़ सकता है। हालांकि ईरान हमेशा से यह कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए है।
पुतिन के बयान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उस बहस को फिर तेज कर दिया है कि क्या ईरान के खिलाफ लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह प्रमाणित हैं या नहीं।
2015 परमाणु समझौते का किया जिक्र, रूस ने दोबारा मध्यस्थता की पेशकश की
Vladimir Putin ने 2015 के उस ऐतिहासिक परमाणु समझौते को भी याद किया, जिसमें ईरान और कई वैश्विक शक्तियों के बीच परमाणु डील हुई थी। इस समझौते में रूस ने अहम भूमिका निभाई थी।
पुतिन ने कहा कि उस समय अपनाया गया मॉडल आज भी कारगर साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर सभी पक्ष तैयार हों तो रूस एक बार फिर उसी तरह के समझौते की दिशा में काम करने के लिए तैयार है।
उन्होंने यह भी कहा कि उस समझौते ने उस समय क्षेत्रीय तनाव कम करने में बड़ी भूमिका निभाई थी और अंतरराष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था के तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित रखा गया था।
रूस ने ईरानी यूरेनियम रखने का दिया प्रस्ताव
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला प्रस्ताव रूस की ओर से सामने आया। पुतिन ने कहा कि अगर सभी देश सहमत हों, तो रूस ईरान के यूरेनियम को अपने पास सुरक्षित रखने के लिए तैयार है।
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया की निगरानी International Atomic Energy Agency यानी IAEA द्वारा की जा सकती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि परमाणु सामग्री का इस्तेमाल केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए हो।
रूस का कहना है कि इस तरह का कदम पश्चिमी देशों की चिंताओं को कम कर सकता है और साथ ही ईरान को भी अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने का अवसर मिलेगा।
बुशेहर न्यूक्लियर प्लांट का भी किया जिक्र
पुतिन ने ईरान में रूस की मदद से बने बुशेहर न्यूक्लियर प्लांट का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट इस बात का उदाहरण हैं कि परमाणु तकनीक का इस्तेमाल ऊर्जा उत्पादन और नागरिक उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।
रूस का दावा है कि वह ईरान के साथ परमाणु सहयोग को पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय नियमों और निगरानी के तहत आगे बढ़ा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस इस मुद्दे पर खुद को जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में प्रस्तुत करना चाहता है, जो युद्ध की बजाय कूटनीति को प्राथमिकता देती है।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बढ़ी वैश्विक चिंता
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने दुनिया भर की बड़ी शक्तियों की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव का असर तेल बाजार, वैश्विक व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ता है तो इसका असर केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और कूटनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
रूस, चीन और कई अन्य देश लगातार कूटनीतिक समाधान की वकालत कर रहे हैं, जबकि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अधिक कठोर निगरानी की मांग करता रहा है।
वैश्विक राजनीति में फिर बढ़ी रूस की सक्रियता
यूक्रेन युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार दबाव झेल रहे रूस के लिए यह मुद्दा रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुतिन इस पूरे मामले में खुद को एक ऐसे नेता के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, जो वैश्विक संकटों में बातचीत और संतुलन की बात करता है।
विश्लेषकों का कहना है कि रूस इस मुद्दे के जरिए पश्चिम एशिया में अपनी कूटनीतिक पकड़ और प्रभाव को और मजबूत करना चाहता है।

