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Muzaffarnagar में ईंट भट्टे का कहर: दीवार गिरने से दो मजदूरों की दर्दनाक मौत, मालिक पर लापरवाही के गंभीर आरोप

Muzaffarnagar (उत्तर प्रदेश)। जनपद के चरथावल थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को दहला दिया। एक ईंट भट्टे पर कार्य कर रहे मजदूरों के लिए बुधवार की सुबह काल बनकर आई। जब मजदूर ईंटों की निकासी में व्यस्त थे, तभी भट्टे की एक विशाल दीवार अचानक भरभराकर गिर पड़ी। इस भयावह हादसे में दो मजदूर — ईश्वर और रोहित — मलबे के नीचे दबकर मौके पर ही दम तोड़ बैठे, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

हादसे का मंजर देख कांप उठे लोग

घटना के समय भट्टे पर करीब दर्जनभर मजदूर काम कर रहे थे। अचानक गिरी दीवार से मचा हड़कंप इतना जबरदस्त था कि आसपास के ग्रामीण और अन्य श्रमिक दौड़कर पहुंचे। हर तरफ चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। ईश्वर और रोहित की लाशें मलबे से जब निकाली गईं, तो माहौल गमगीन हो गया। वहीं पिंकू और किरण पाल को गंभीर हालत में इलाज के लिए नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया।

ग्रामीणों ने शुरू किया बचाव कार्य, पुलिस ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही चरथावल थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के साथ ग्रामीणों ने मिलकर तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। मलबे में दबे घायलों को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। मौके पर एंबुलेंस की कमी के चलते स्थानीय लोगों ने घायलों को निजी वाहनों से अस्पताल पहुंचाया।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी बनी मौत का कारण?

हादसे ने एक बार फिर से ईंट भट्टों पर काम कर रहे मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि भट्टे की दीवार काफी पुरानी थी और उसमें समय-समय पर मरम्मत नहीं की गई थी। मजदूरों के अनुसार, कई बार मालिक को दीवार की हालत बताई गई थी, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।

पुलिस ने भट्टा मालिक से सख्ती से पूछताछ शुरू कर दी है। सुरक्षा उपायों की घोर अनदेखी को लेकर IPC की धारा 304A (लापरवाही से हुई मौत) सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज करने की तैयारी है।

लंबे समय से काम कर रहे थे मृतक मजदूर

मृतक ईश्वर और रोहित वर्षों से इसी भट्टे पर काम कर रहे थे। दोनों मजदूर स्थानीय ही थे और अपने परिवार का पेट पालने के लिए हर मौसम में कठिन परिश्रम करते थे। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। रोहित की पत्नी ने मीडिया को बताया कि उसका पति पिछले 6 सालों से भट्टे पर काम कर रहा था। “रोज़ी-रोटी के लिए जान गंवानी पड़ी,” ये कहते हुए वह बेसुध हो गई।

प्रशासन पर भी उठे सवाल, मजदूर यूनियन ने जताया आक्रोश

मजदूर यूनियन के नेताओं ने इस हादसे को श्रमिकों के खिलाफ हो रहे ‘सिस्टमेटिक अत्याचार’ का उदाहरण बताया है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन छेड़ा जाएगा। प्रशासन को भी घेरते हुए कहा गया कि क्षेत्रीय श्रम विभाग की लापरवाही और नियमित निरीक्षण की कमी के चलते ऐसे हादसे बढ़ते जा रहे हैं।

भट्टों की हालत जर्जर, फिर भी जारी है उत्पादन

चरथावल और आसपास के गांवों में सैकड़ों की संख्या में ईंट भट्टे संचालित हो रहे हैं, जिनमें से अधिकांश पुराने ढांचे पर खड़े हैं। इन भट्टों में न तो कोई सुरक्षा मानक लागू किए जाते हैं और न ही किसी सरकारी एजेंसी की नियमित जांच होती है। मजदूरों को ना तो हेलमेट मिलते हैं, ना सेफ्टी गियर। बेहद खतरनाक परिस्थितियों में ये लोग अपना जीवन जोखिम में डालकर दो वक्त की रोटी कमाते हैं।

स्थानीय नेताओं और अधिकारियों ने जताया शोक

हादसे की सूचना मिलने पर स्थानीय विधायक, ब्लॉक प्रमुख और DM कार्यालय से भी अधिकारियों ने घटनास्थल का दौरा किया। मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा की गई है। प्रशासन ने हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। जिलाधिकारी ने कहा कि “जो भी दोषी होगा, उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह भट्टा मालिक हो या कोई सरकारी कर्मचारी।”


सामाजिक चेतना और मजदूरों की सुरक्षा की जरूरत

यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। मजदूरों की सुरक्षा को लेकर अब ठोस और कठोर कदम उठाने की जरूरत है। ईंट भट्टों की कार्यप्रणाली, श्रमिकों के रहने और काम करने की परिस्थितियों का पुनर्मूल्यांकन अनिवार्य हो गया है। सरकार को चाहिए कि हर भट्टे को रजिस्ट्रेशन से पहले सुरक्षा मानकों पर पास होना अनिवार्य बनाए।


निष्क्रिय नहीं रह सकता प्रशासन: मांग उठी सीलिंग की

ग्रामीणों और मजदूर संगठनों ने मांग की है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, भट्टे को तत्काल प्रभाव से सील किया जाए और अन्य सभी भट्टों का ऑडिट कराया जाए। एक बार फिर यह सवाल उठा है कि गरीब मजदूरों की जान की कीमत कब तक इतनी सस्ती बनी रहेगी?

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