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Greenland पर ट्रम्प की नजर फिर तेज़: व्हाइट हाउस ने माने सैन्य विकल्प, यूरोप बोला– यह कब्ज़े की धमकी

Trump Greenland control को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 2019 से ही ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की बात करते रहे हैं, लेकिन अब यह मुद्दा मजाक या बयानबाजी से आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि ग्रीनलैंड को अमेरिका के प्रभाव में लाने के लिए सभी विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, जिनमें सैन्य कदम भी शामिल हो सकते हैं।


🔴 व्हाइट हाउस का बयान: ग्रीनलैंड अमेरिकी सुरक्षा के लिए अहम

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलीन लेविट ने मंगलवार को कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि प्रशासन इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए “कई रास्तों” पर विचार कर रहा है और सैन्य बल का इस्तेमाल भी पूरी तरह से खारिज नहीं किया गया है।

इस बयान के बाद यूरोप से लेकर आर्कटिक क्षेत्र तक हलचल मच गई है। कूटनीतिक हलकों में इसे अमेरिकी विदेश नीति के और अधिक आक्रामक होने का संकेत माना जा रहा है।


🔴 ट्रम्प का दावा: रूस और चीन की मौजूदगी चिंता का विषय

राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोमवार को कहा था कि ग्रीनलैंड राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक, वहां रूसी और चीनी जहाजों की बढ़ती मौजूदगी अमेरिका के लिए खतरे की घंटी है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि वह आने वाले 20 दिनों में ग्रीनलैंड के मुद्दे पर खुलकर बात करेंगे।

Trump Greenland control की इस सोच के पीछे अमेरिका की आर्कटिक रणनीति को अहम वजह माना जा रहा है, जहां रूस और चीन अपनी गतिविधियां लगातार बढ़ा रहे हैं।


🔴 ग्रीनलैंड की स्थिति: डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र, NATO का हिस्सा

ग्रीनलैंड, डेनमार्क का एक स्वायत्त इलाका है और NATO का भी हिस्सा है। यहां डेनमार्क के लगभग 200 सैनिक तैनात हैं। ग्रीनलैंड की अपनी कोई स्थायी सेना नहीं है, उसकी रक्षा और विदेश नीति की जिम्मेदारी डेनमार्क संभालता है।

ग्रीनलैंड की आबादी केवल करीब 57 हजार है, लेकिन इसका रणनीतिक महत्व इसकी जनसंख्या से कहीं अधिक है।


🔴 विदेश मंत्री का अलग रुख: हमला नहीं, खरीद की बात

जहां व्हाइट हाउस सैन्य विकल्प की बात कर रहा है, वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का रुख थोड़ा नरम नजर आता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का इरादा ग्रीनलैंड पर हमला करने का नहीं है, बल्कि डेनमार्क से इसे खरीदने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, विकल्पों में सीधी खरीद या ग्रीनलैंड के साथ विशेष रणनीतिक समझौता शामिल हो सकता है। अमेरिका ग्रीनलैंड के लोगों के साथ “फायदेमंद रिश्ते” बनाना चाहता है।


🔴 स्टीफन मिलर का बयान: अमेरिका का हिस्सा होना चाहिए ग्रीनलैंड

ट्रम्प के वरिष्ठ सलाहकार स्टीफन मिलर ने CNN को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिकी सरकार चाहती है कि ग्रीनलैंड अमेरिका का हिस्सा बने। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भविष्य में कोई भी देश ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका से टकराने की हिम्मत न करे।

यह बयान यूरोपीय देशों के लिए सीधा संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका अब नरम कूटनीति की जगह ताकत की भाषा अपनाने को तैयार है।


🔴 पहले मजाक, अब गंभीर चेतावनी

ट्रम्प के पहले कार्यकाल में ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात को मजाक समझा गया था। उस समय कई मीडिया रिपोर्ट्स में इसे राष्ट्रपति की सनक बताया गया। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं।

पिछले साल डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर और अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस की ग्रीनलैंड यात्रा के बाद इस मुद्दे ने फिर तूल पकड़ा। तब भी अमेरिका की काफी आलोचना हुई थी, लेकिन अब यूरोपीय नेता ट्रम्प की बातों को हल्के में लेने के मूड में नहीं हैं।


🔴 यूरोप की चेतावनी: ग्रीनलैंड उसके लोगों का है

ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, पोलैंड, स्पेन और डेनमार्क समेत कई यूरोपीय देशों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि ग्रीनलैंड उसके लोगों का है और उसके भविष्य का फैसला केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड ही कर सकते हैं।

यूरोपीय नेताओं ने आर्कटिक सुरक्षा को NATO के सभी सदस्यों के साथ मिलकर मजबूत करने की बात कही, लेकिन साथ ही संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर जोर दिया।


🔴 डेनमार्क की PM का कड़ा बयान: NATO खत्म हो जाएगा

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश की, तो NATO सैन्य गठबंधन का अंत हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि NATO में एक सदस्य पर हमला सभी सदस्यों पर हमला माना जाता है। अगर अमेरिका किसी सहयोगी देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करता है, तो “कुछ भी नहीं बचेगा।”


🔴 ग्रीनलैंड PM बोले: सम्मानजनक बातचीत जरूरी

ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने यूरोपीय नेताओं के समर्थन का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड को लेकर बातचीत सम्मानजनक और शांतिपूर्ण तरीके से होनी चाहिए।

नीलसन ने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड को वेनेजुएला से जोड़कर सैन्य हस्तक्षेप की बात करना न केवल गलत है, बल्कि वहां के लोगों के प्रति अपमानजनक भी है।


🔴 ग्रीनलैंड में कौन-कौन से सैनिक तैनात हैं

ग्रीनलैंड में अमेरिका का पिटुफिक स्पेस बेस स्थित है, जिसे पहले थुले एयर बेस कहा जाता था। यहां करीब 150 से 200 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो मिसाइल चेतावनी, स्पेस निगरानी और आर्कटिक सुरक्षा का काम करते हैं। यह अमेरिका का सबसे उत्तरी सैन्य अड्डा है।

डेनमार्क की जॉइंट आर्कटिक कमांड भी यहां सक्रिय है, जिसमें करीब 150 से 200 डेनिश सैन्य और सिविलियन कर्मी शामिल हैं। इसमें प्रसिद्ध सीरियस डॉग स्लेज पेट्रोल भी है, जो बर्फीले इलाकों में लंबी गश्त करता है।


🔴 अमेरिका को ग्रीनलैंड से क्या फायदा

ग्रीनलैंड की भौगोलिक स्थिति इसे उत्तर अमेरिका और यूरोप के बीच एक रणनीतिक पुल बनाती है। यहां से रूस और चीन की गतिविधियों पर नजर रखना आसान होता है। इसके अलावा, ग्रीनलैंड में दुर्लभ खनिज, तेल, गैस और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के बड़े भंडार माने जाते हैं।

आर्कटिक की बर्फ पिघलने से नई समुद्री व्यापारिक राहें खुल रही हैं। इन पर नियंत्रण भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था और सैन्य शक्ति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।


🔴 इतिहास की परछाईं: ग्रीनलैंड एयर गैप

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान ग्रीनलैंड के आसपास का क्षेत्र ‘ग्रीनलैंड एयर गैप’ कहलाता था, जहां हवाई निगरानी नहीं हो पाती थी। जर्मनी की पनडुब्बियों ने इसी कमजोरी का फायदा उठाकर मित्र देशों के जहाजों पर हमले किए।

आज, आठ दशक बाद, ग्रीनलैंड फिर से वैश्विक शक्ति संतुलन के केंद्र में आ खड़ा हुआ है।


ग्रीनलैंड को लेकर ट्रम्प प्रशासन के सख्त तेवरों ने यह साफ कर दिया है कि आर्कटिक क्षेत्र अब केवल बर्फ और सन्नाटे का इलाका नहीं रहा। यहां होने वाले फैसले आने वाले दशकों की वैश्विक राजनीति, सैन्य संतुलन और अंतरराष्ट्रीय कानून की दिशा तय कर सकते हैं।

 

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