UAE में डीजल भारत से महंगा! दुबई में ₹123 लीटर पहुंचा भाव, 8 महीने में 90% तक बढ़ीं कीमतें
दुबई। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन यहां डीजल की कीमतें भारत के कई शहरों से अधिक हो गई हैं। 22 अक्टूबर 2026 के बताए गए भाव के मुताबिक, दुबई में एक लीटर डीजल की कीमत करीब 123 रुपये है, जबकि दिल्ली में यही डीजल लगभग 95 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। यानी दोनों कीमतों में करीब 28 रुपये प्रति लीटर का अंतर है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, UAE में अक्टूबर के दौरान डीजल की कीमत में लगभग 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। पिछले आठ महीनों में इसकी कीमत करीब 90 प्रतिशत तक बढ़ने का दावा किया गया है। इस तेजी ने ईंधन की लागत और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में जारी अस्थिरता को लेकर चर्चा बढ़ा दी है।
भारत के कई शहरों में डीजल दुबई से सस्ता
दुबई और भारत के विभिन्न शहरों में डीजल की बताई गई कीमतों की तुलना करने पर बड़ा अंतर दिखाई देता है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, भारत के इन शहरों में डीजल के भाव इस प्रकार हैं:
- दिल्ली: 95 रुपये प्रति लीटर
- मुंबई: 98 रुपये प्रति लीटर
- कोलकाता: 100 रुपये प्रति लीटर
- चेन्नई: 100 रुपये प्रति लीटर
- हैदराबाद: 105 रुपये प्रति लीटर
- दुबई: करीब 123 रुपये प्रति लीटर
इन आंकड़ों के आधार पर दुबई में डीजल दिल्ली के मुकाबले करीब 28 रुपये, मुंबई से 25 रुपये और हैदराबाद से 18 रुपये प्रति लीटर महंगा बताया गया है। हालांकि, अलग-अलग देशों में ईंधन की कीमतों की तुलना करते समय स्थानीय करों, सरकारी मूल्य निर्धारण, विनिमय दर और कीमतें लागू होने की तारीख को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
UAE में पेट्रोल-डीजल की कीमतें क्यों बढ़ीं?
UAE में ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ी हैं। वहां हर महीने वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के आधार पर पेट्रोल और डीजल के नए खुदरा भाव घोषित किए जाते हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और तैयार ईंधन की कीमतों में तेजी आने पर इसका असर स्थानीय बाजार पर भी पड़ सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता को भी कीमतों में तेजी के प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है। इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से तेल की ढुलाई, जहाजों के संचालन और आपूर्ति मार्गों पर जोखिम बढ़ सकता है। इससे वैश्विक बाजार में कीमतों पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है।
हालांकि, किसी एक महीने में ईंधन की कीमत कितनी बढ़ेगी, यह केवल युद्ध की स्थिति पर निर्भर नहीं करता। अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें, रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च और स्थानीय मूल्य निर्धारण भी इसमें भूमिका निभाते हैं।
फुजैराह तेल केंद्र पर हमलों से आपूर्ति प्रभावित होने की चिंता
UAE के तेल निर्यात ढांचे में फुजैराह की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित है और तेल की ढुलाई के लिए एक अहम वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराता है। ऐसे में यहां तेल भंडारण, पाइपलाइन और निर्यात सुविधाओं को नुकसान पहुंचने से आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
उपलब्ध रिपोर्टों में 2026 के दौरान फुजैराह और UAE के ऊर्जा ढांचे के आसपास हुई घटनाओं का उल्लेख किया गया है। इनमें तेल निर्यात केंद्र पर आग लगने, ड्रोन हमले और ऊर्जा प्रतिष्ठानों के संचालन में बाधा आने की घटनाएं शामिल बताई गई हैं। इन घटनाओं के प्रभाव और प्रत्येक हमले के विवरण की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्रोतों से आवश्यक है।
मार्च में तेल लोडिंग घटने का दावा
रॉयटर्स की पड़ताल के हवाले से दी गई जानकारी के मुताबिक, युद्ध के दौरान फुजैराह पर कम से कम 19 हमले होने का दावा किया गया है। रिपोर्ट में तेल टैंकों और पाइपलाइन तंत्र को नुकसान पहुंचने का भी उल्लेख है। इसके अलावा मार्च में यहां से तेल लोडिंग घटकर लगभग 4.4 लाख बैरल प्रतिदिन रह जाने की बात कही गई है, जबकि 2025 में यह स्तर इससे दोगुने से अधिक बताया गया था।
फुजैराह पर दबाव बढ़ने से UAE के लिए वैकल्पिक निर्यात मार्गों का संचालन चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि भंडारण या लोडिंग सुविधाएं प्रभावित होती हैं, तो तेल की उपलब्धता और ढुलाई की लागत पर असर पड़ने की आशंका रहती है। हालांकि, इन घटनाओं का डीजल के खुदरा भाव पर कितना सीधा प्रभाव पड़ा, इसका आकलन करने के लिए विस्तृत बाजार आंकड़ों की जरूरत होगी।
UAE के तेल निर्यात और वैश्विक बाजार पर नजर
UAE प्रमुख तेल उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल है। उसके तेल निर्यात की दिशा, प्रमुख खरीदारों की मांग और समुद्री मार्गों की उपलब्धता वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं। चीन सहित एशियाई देशों की मांग भी क्षेत्रीय तेल व्यापार में अहम भूमिका निभाती है।
यदि किसी प्रमुख निर्यात केंद्र पर हमलों के कारण लोडिंग या परिवहन प्रभावित होता है, तो खरीदारों को दूसरे स्रोतों से तेल खरीदना पड़ सकता है। इससे ढुलाई का समय और लागत बढ़ सकती है। दूसरी ओर, बाजार में उपलब्ध अतिरिक्त आपूर्ति और दूसरे निर्यात मार्गों की क्षमता कीमतों पर पड़ने वाले दबाव को कम भी कर सकती है।
क्या भारत में भी बढ़ेंगे डीजल के दाम?
दुबई में डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि भारत में भी उसी अनुपात में कीमतें बढ़ेंगी। भारत में खुदरा ईंधन कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार के अलावा करों, सरकारी नीतियों, तेल विपणन कंपनियों की मूल्य निर्धारण व्यवस्था और अन्य लागतों का असर पड़ता है। इसलिए दोनों देशों में कीमतों का अंतर अपने आप में भविष्य की कीमतों का संकेत नहीं देता।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और तैयार ईंधन की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है, तो इसका असर आयात लागत पर पड़ सकता है। लेकिन भारत में डीजल की खुदरा कीमतों में बदलाव कितना होगा, यह संबंधित नीतिगत और बाजार परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
दुबई में डीजल का भाव 123 रुपये प्रति लीटर बताए जाने से UAE और भारत के ईंधन बाजारों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता और फुजैराह जैसे अहम निर्यात केंद्रों पर दबाव ऊर्जा आपूर्ति के लिए चिंता का विषय हैं। हालांकि, अलग-अलग देशों की कीमतों और युद्ध के प्रभाव का आकलन करते समय आंकड़ों की तारीख तथा उनके स्रोत की पुष्टि जरूरी है।

