Middle East US Warship Deployment: मिडिल ईस्ट में अमेरिकी वॉरशिप और 50 फाइटर जेट तैनात, JD Vance की ईरान को कड़ी चेतावनी
Middle East US Warship Deployment के बीच वैश्विक राजनीति का पारा चढ़ गया है। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी वॉरशिप, एयरक्राफ्ट कैरियर और 50 से ज्यादा फाइटर जेट की तैनाती के साथ वॉशिंगटन ने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि कूटनीति के साथ-साथ सैन्य विकल्प भी मेज पर मौजूद है। इसी बीच अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिकी कूटनीति को कमजोरी समझने की भूल न की जाए।
🔴 जेडी वेंस का तीखा संदेश: ‘कूटनीति की सीमा है’
फॉक्स न्यूज से बातचीत में जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका ऐसी स्थिति तक पहुंचना चाहता है जहां ईरान परमाणु आतंकवाद के जरिए दुनिया को धमकी देने की स्थिति में न हो। उन्होंने ईरान को “दुनिया में आतंकवाद का सबसे बड़ा गढ़” बताते हुए कहा कि एक “सनकी, क्रूर और खतरनाक शासन” को परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
वेंस ने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कूटनीतिक समाधान के पक्षधर हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर अन्य विकल्पों का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेंगे। उनके मुताबिक, बातचीत कितने समय तक जारी रखनी है और कब यह तय करना है कि कूटनीति अपनी सीमा पर पहुंच चुकी है—इसका अंतिम निर्णय ट्रम्प के हाथ में है।
🔴 संसद में ट्रम्प का आरोप: ईरान विकसित कर रहा लंबी दूरी की मिसाइलें
राष्ट्रपति ट्रम्प ने संसद में अपने संबोधन के दौरान दावा किया कि ईरान ऐसी मिसाइलें विकसित कर रहा है जो अमेरिका तक मार करने में सक्षम हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले साल अमेरिकी हमलों के बाद भी ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा खड़ा करने की कोशिश कर रहा है।
इन आरोपों ने Middle East US Warship Deployment को और अधिक संवेदनशील बना दिया है, क्योंकि सैन्य तैयारियों और बयानबाजी के बीच कूटनीतिक वार्ता जारी है।
🔴 जिनेवा में तीसरे दौर की बातचीत, माहौल बेहद नाजुक
आज जिनेवा में ईरान और अमेरिका के बीच तीसरे दौर की वार्ता हो रही है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची अपनी टीम के साथ जिनेवा पहुंच चुके हैं। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व मिडिल ईस्ट दूत स्टीव विटकॉफ कर रहे हैं।
ईरान ने वार्ता से पहले अमेरिकी “मैक्सिमम प्रेशर” रणनीति को खारिज करते हुए इसे दुष्प्रचार बताया। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने ट्रम्प के बयानों को “झूठा और राजनीतिक दबाव का हिस्सा” बताया।
🔴 50 से ज्यादा फाइटर जेट और एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती
Middle East US Warship Deployment के तहत अमेरिका ने पिछले सप्ताह 50 से अधिक फाइटर जेट क्षेत्र में भेजे। स्वतंत्र फ्लाइट-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, कई F-22 Raptor, F-35 Lightning II और F-16 Fighting Falcon विमानों को मिडिल ईस्ट की ओर जाते हुए रिकॉर्ड किया गया।
इनमें से कुछ जेट इजराइल के बेन गुरियन और ओवडा एयरबेस पर उतरते देखे गए। इसके अलावा एरियल रिफ्यूलिंग टैंकर भी तैनात किए गए हैं, जो संकेत देते हैं कि अमेरिकी विमान लंबी अवधि के ऑपरेशन के लिए तैयार हैं।
🔴 USS जेराल्ड आर. फोर्ड की एंट्री से बदला समीकरण
अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, USS Gerald R. Ford एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप कैरिबियन से रवाना होकर मिडिल ईस्ट पहुंच चुका है। इसके साथ तीन गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर—USS Mahan, USS Bainbridge और USS Winston Churchill भी मौजूद हैं।
इससे पहले USS Abraham Lincoln भी क्षेत्र में तैनात किया जा चुका था। इन तैनातियों ने Middle East US Warship Deployment को अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दिया है।
🔴 बैलिस्टिक मिसाइल विवाद: सबसे बड़ा अड़ंगा
ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते की वार्ता में सबसे बड़ा विवाद बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को लेकर है। ईरान इसे अपनी “रेड लाइन” मानता है और कहता है कि यह उसकी रक्षा क्षमता का अहम हिस्सा है।
तेहरान का दावा है कि हालिया हमलों के दौरान उसकी मिसाइलों ने ही देश की रक्षा की। वहीं अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने मिसाइल कार्यक्रम और हिजबुल्लाह, हूती जैसे समूहों को समर्थन पर भी बातचीत करे। ईरान इस दायरे को सिर्फ परमाणु मुद्दे तक सीमित रखना चाहता है।
🔴 क्षेत्रीय देशों की चिंता और संभावित खतरा
क्षेत्रीय देशों को आशंका है कि अगर वार्ता विफल होती है और सैन्य कार्रवाई होती है, तो पूरा मिडिल ईस्ट संघर्ष की आग में झुलस सकता है। ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि किसी भी हमले की स्थिति में क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य अड्डे उसके निशाने पर होंगे।
इससे हजारों अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि Middle East US Warship Deployment एक तरह का शक्ति प्रदर्शन भी है, ताकि वार्ता में दबाव बनाया जा सके।
🔴 अरागची का बयान: हमला हुआ तो असर व्यापक होगा
अब्बास अरागची ने हालिया बयान में कहा था कि बातचीत से टिकाऊ समाधान निकल सकता है, लेकिन ईरान किसी भी खतरे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो इसका असर सिर्फ ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक क्षेत्र प्रभावित होगा।

