भारत-अमेरिका रिश्तों पर Ro Khanna का बड़ा दावा: बोले- ट्रम्प की नीतियों से 30 साल में सबसे खराब दौर, अमेरिकी राजदूत ने कहा- व्यापार समझौता अंतिम चरण में
News-Desk
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Ro Khanna, USISPF, अंतरराष्ट्रीय समाचार, अमेरिकी राजनीति, एस जयशंकर, डोनाल्ड ट्रम्प, नरेंद्र मोदी, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, भारत-अमेरिका संबंध, रो खन्ना, सर्जियो गोरभारत और अमेरिका के संबंधों को लेकर अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर तीखी बहस देखने को मिली है। भारतीय मूल के अमेरिकी डेमोक्रेटिक सांसद Ro Khanna ने दावा किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नीतियों के कारण भारत और अमेरिका के रिश्ते पिछले तीन दशकों के सबसे कठिन दौर में पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि टैरिफ नीति, ईरान को लेकर अमेरिकी सैन्य रणनीति और सहयोगी देशों से बिना व्यापक सलाह-मशविरा किए गए फैसलों ने दोनों देशों के बीच भरोसे को प्रभावित किया है।
हालांकि, इसी कार्यक्रम में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बताते हुए कहा कि प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है और दोनों देश मिलकर आगे बढ़ना चाहते हैं।
USISPF लीडरशिप समिट में रो खन्ना का तीखा हमला
वॉशिंगटन में आयोजित यूएस-इंडिया स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप फोरम (USISPF) लीडरशिप समिट 2026 को संबोधित करते हुए रो खन्ना ने ट्रम्प प्रशासन की विदेश नीति पर सवाल उठाए।
उन्होंने कहा कि वह अपनी बात स्पष्ट रूप से रखते हैं और उनके अनुसार भारत-अमेरिका संबंध पिछले 30 वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।
खन्ना ने आरोप लगाया कि अमेरिका की टैरिफ नीति, ईरान के साथ बढ़ा तनाव और सहयोगी देशों से पर्याप्त परामर्श के बिना लिए गए निर्णयों ने अमेरिका की वैश्विक विश्वसनीयता को प्रभावित किया है।
‘ईरान युद्ध का असर भारत पर भी पड़ा’
रो खन्ना ने कहा कि ईरान से जुड़े घटनाक्रमों का प्रभाव केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ा।
उन्होंने कहा कि ईरान से जुड़े तनाव के कारण ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ और भारत में गैस की कीमतों पर भी असर देखने को मिला। उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी को इस बात पर संदेह हो तो वह भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी इस विषय पर जानकारी ले सकता है।
‘टैरिफ नीति से भरोसे की एक पीढ़ी खत्म हो गई’
रो खन्ना ने ट्रम्प की टैरिफ नीति की आलोचना करते हुए दावा किया कि हाल ही में चीन यात्रा के दौरान उनकी मुलाकात एक भारतीय राजनयिक से हुई।
उनके अनुसार उस राजनयिक ने कहा कि अमेरिका की मौजूदा नीतियों के कारण दोनों देशों के बीच वर्षों में बना भरोसा कमजोर हुआ है। खन्ना ने कहा कि यदि इस नुकसान को स्वीकार नहीं किया गया तो यह वास्तविक स्थिति से आंखें मूंदने जैसा होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय साझेदारी केवल आर्थिक समझौतों से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास और स्थिर नीति से मजबूत होती है।
ट्रम्प को बताया ‘लेम डक’ राष्ट्रपति
अपने संबोधन के दौरान रो खन्ना ने राजनीतिक टिप्पणी करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ‘लेम डक’ राष्ट्रपति बताया।
उन्होंने दावा किया कि आगामी मिड-टर्म चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल करेगी और वर्ष 2028 के राष्ट्रपति चुनाव में भी जीत दर्ज करेगी।
खन्ना ने कहा कि नई पीढ़ी की जिम्मेदारी होगी कि वह अमेरिका के सहयोगी देशों के साथ भरोसे और साझेदारी को फिर से मजबूत करे।
रूजवेल्ट का किया उल्लेख
रो खन्ना ने अपने भाषण में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि वे बहुपक्षीय सहयोग और विश्व के देशों के साथ मिलकर आगे बढ़ने में विश्वास रखते थे।
उन्होंने कहा कि रूजवेल्ट ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रति भी सकारात्मक दृष्टिकोण रखा था और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्राथमिकता दी थी।
अमेरिकी राजदूत बोले- भारत के साथ संबंध मजबूत हैं
इसी कार्यक्रम में भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।
उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को वैश्विक स्तर पर उभरती हुई महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में देखता है और दोनों देश कई क्षेत्रों में मिलकर काम करना चाहते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है और जल्द ही इस दिशा में सकारात्मक प्रगति देखने को मिल सकती है।
’50 साल बाद भी भारत और अमेरिका दोस्त रहेंगे’
सर्जियो गोर ने बताया कि कुछ सप्ताह पहले नई दिल्ली में उनकी मुलाकात एक भारतीय मंत्री से हुई थी।
उनके अनुसार उस मंत्री ने कहा कि समाचारों में चाहे जो दिखाई दे, लेकिन आने वाले कई दशकों तक भारत और अमेरिका के संबंध मजबूत बने रहेंगे।
गोर ने कहा कि अमेरिका दुनिया का सबसे पुराना लोकतंत्र है, जबकि भारत सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यही साझा लोकतांत्रिक मूल्य दोनों देशों की साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत हैं।
मोदी और ट्रम्प की दोस्ती का किस्सा भी सुनाया
सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच व्यक्तिगत संबंधों का एक दिलचस्प प्रसंग भी साझा किया।
उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले मियामी में आयोजित एक UFC कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने अचानक प्रधानमंत्री मोदी को फोन करने की इच्छा जताई।
गोर के अनुसार जब उन्होंने ट्रम्प को बताया कि भारत में उस समय सुबह के लगभग छह बजे हैं, तो ट्रम्प ने मुस्कुराते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी शायद जाग चुके होंगे क्योंकि वे भी उनकी तरह कम सोते हैं।
हालांकि कार्यक्रम शुरू होने के कारण उस समय बातचीत नहीं हो सकी और दोनों नेताओं के बीच वार्ता अगले दिन तय की गई।
‘दोस्ती में हर बातचीत पहले से तय नहीं होती’
सर्जियो गोर ने कहा कि यह घटना दर्शाती है कि ट्रम्प प्रधानमंत्री मोदी को अपना करीबी मित्र मानते हैं।
उन्होंने कहा कि जब दो नेताओं के बीच व्यक्तिगत विश्वास होता है, तो हर बातचीत पहले से तय करने की आवश्यकता नहीं होती। यही व्यक्तिगत भरोसा दोनों देशों के संबंधों को भी मजबूती प्रदान करता है।
भारत-अमेरिका संबंधों पर अलग-अलग नजरिए
USISPF लीडरशिप समिट में एक ओर जहां रो खन्ना ने ट्रम्प प्रशासन की नीतियों की आलोचना करते हुए भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर चिंता जताई, वहीं अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दोनों देशों के बीच सहयोग, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत बताया।
दोनों नेताओं के बयानों से यह स्पष्ट हुआ कि भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर अमेरिकी राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में अलग-अलग दृष्टिकोण मौजूद हैं।

