उत्तर प्रदेश

वृंदावन पुलिस ने Aniruddhacharya की रिपोर्ट दाखिल नहीं की, CJM कोर्ट ने जताई नाराजगी

मथुरा के वृंदावन में बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में सुनवाई के दौरान पुलिस की लापरवाही सामने आई। कोर्ट ने Aniruddhacharya के खिलाफ दाखिल वाद में वृंदावन पुलिस द्वारा रिपोर्ट न दाखिल करने पर अपनी नाराजगी जाहिर की। अदालत ने पुलिस को कड़ा निर्देश देते हुए 4 सितंबर की नई तारीख मुकर्रर की और तत्काल रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया।

अनिरुद्धाचार्य के खिलाफ वाद और शिकायत

अखिल भारत हिंदू महासभा आगरा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष मीरा राठौर ने 28 जुलाई को वृंदावन के भागवताचार्य अनिरुद्धाचार्य के खिलाफ महिलाओं के खिलाफ अनुचित बयान देने के आरोप में कोर्ट में वाद दायर किया था। 21 अगस्त की पहली सुनवाई में कोर्ट ने वृंदावन पुलिस को कथावाचक अनिरुद्धाचार्य की रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया था।

सुनवाई के दौरान पुलिस की चूक

बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई में पुलिस ने अब तक रिपोर्ट दाखिल नहीं की। इसके बाद कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में पुलिस की लापरवाही पर नाराजगी जताई और पुलिस को निर्देश दिए कि 4 सितंबर तक अनिवार्य रूप से रिपोर्ट दाखिल करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस की देरी से मामले की न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

महिला अधिवक्ताओं का समर्थन

सुनवाई के दौरान वादी मीरा राठौर के समर्थन में अनिरुद्धाचार्य के खिलाफ वाद दायर करने वाली महिला अधिवक्ता सौम्या और प्रीति प्रियदर्शनी समेत अन्य अधिवक्ता मौजूद रहीं। अधिवक्ताओं ने कोर्ट में कहा कि महिलाओं के खिलाफ गलत बयान देने वाले मामलों में समय पर पुलिस रिपोर्ट दाखिल होना बेहद जरूरी है ताकि न्याय प्रक्रिया में देरी न हो।

कोर्ट की सख्ती और आगे की कार्रवाई

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस की लापरवाही और रिपोर्ट न दाखिल करना न्याय के लिए गंभीर चुनौती है। अदालत ने आदेश दिया कि 4 सितंबर तक रिपोर्ट दाखिल नहीं होने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम इस बात का संकेत है कि कोर्ट महिलाओं के खिलाफ होने वाले मामलों में गंभीर है और सभी सरकारी एजेंसियों से निष्पक्ष और समयबद्ध कार्रवाई की उम्मीद रखता है।

वृंदावन पुलिस द्वारा अनिरुद्धाचार्य की रिपोर्ट दाखिल न करने के कारण CJM कोर्ट ने अपनी नाराजगी जाहिर की है। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पुलिस 4 सितंबर तक रिपोर्ट दाखिल करे। महिला अधिवक्ताओं और वादी मीरा राठौर की मौजूदगी में यह सुनवाई न्यायिक प्रक्रिया की गति और महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कोर्ट का यह कदम यह संदेश देता है कि किसी भी लापरवाही को सहन नहीं किया जाएगा और सभी संबंधित अधिकारी समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करें।

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