Budhana News: घर छोड़कर कुश्ती सीखने वाले बच्चों को खूब तराश रहे कुलदीप बालियान
Budhana News:बुढ़ाना। ग्राम उमरपुर में मशहूर उस्ताद पहलवान शमीम पहलवान, शादाब पहलवान के नेतृत्व में नए पहलवानों को कुश्ती के गुर सिखाए जा रहे हैं .आज ग्राम शिकारपुर और ग्राम उमरपुर के पहलवान आसिफ पहलवान एवं साहिल पहलवानों के बीच जबरदस्त कुश्ती सादे अखाड़े में हुई और जबरदस्त जोर आजमाइश की गई
उल्लेखनीय है कि यहां रोजमर्रा कुश्ती का पहलवानी का प्रशिक्षण देकर नए-नए पहलवानों को देश के लिए तैयार किया जाता है ताकि आने वाले भविष्य में यह पहलवान पूरे देश में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन कर सकें। लड़कियों के लिए भी तैयार हुआ कुश्ती अखाड़ा , जल्द होगा शुरू गांव उमरपुर के २ बेरोजगार खलीफा अपने ही खर्चे से ४० बच्चों को सिखा रहे हैं
कुश्ती बुढ़ाना में कोच कुलदीप बालियान घर छोड़कर कुश्ती सीखने वाले बच्चों को खूब तराश रहे। गांव उमरपुर के २ बेरोजगार खलीफा अपने ही खर्चे से आसपास के बच्चों को फ्री में कुश्ती का खेल सिखाकर उनको अंतरराष्ट्रीय खेलों के लिए तैयार कर रहे हैं ताकि कुश्ती के क्षेत्र में देश का नाम रोशन हो लेकिन दिन प्रतिदिन बढ़ रही महंगाई अब कुश्ती के खेल पर भारी पड़ती दिखाई पड़ रही है
यही वजह है कि अब पहलवान और अखाड़े दोनों ही कहीं कहीं दिखाई देते हैं । पहलवान की खुराक को अगर महंगाई ने पटखनीदी है तो अखाड़े खेल नीति की उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं । अगर देखा जाए तो पहले की अपेक्षा अब कुश्ती के खेल के प्रति युवाओं का रूझान बहुत कम हुआ है ।
लगभग दो दशक से पहले बुढ़ाना क्षेत्र में काफी अखाड़े होते थे । कुछ लोग अपने बच्चे को पहलवान बनाने की इच्छा रखते थे लेकिन आज गावों से अखाड़े का अस्तित्व ही खत्म होता जा रहा है । इसकी प्रमुख वजह महंगाई भी है और बच्चों का मोबाइल के प्रति रुझान आज के युवा स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह हो गए हैं । अब वह पहलवानी से दूर भागते हैं । पहले पहलवानों को जो खुराक मिलती थी अब उस खुराक को ले पाना मुश्किल सा हो गया है ।
फिर भी कुछ बच्चे कुश्ती के दांव सीखने के लिए जमीन तलाश रहे हैं । अब बुढ़ाना क्षेत्र में कुलदीप बालियान के अखाडे और उमरपुर में शमीम व शादाब सिद्दीकी द्वारा सैंकड़ों बच्चों को कुश्ती सिखाई जा रही है । ये तीनों पहलवान अपने ही खर्चे से कुश्ती के पहलवानों को तैयार कर रहे हैं । इन ़ सब खिलाड़ियों के लिए तीनों कोच ६ घंटे का समय इन बच्चों को दे रहे हैं । सब खिलाड़ियों को रोजाना सुबह ४ बजे जगना पड़ता है । पहले बच्चे सुबह के समय मार्निंग वॉक के दौरान एक दो किलोमीटर दौड़ करते हैं ।
इसके बाद तेज दौड़ करवाई जाती है । फिर पीटी का अभ्यास करते हैं और फिर शाम को अखाड़े में उतरकर टेक्निकल प्रेक्टिस में दांव – पेंच सिखाए जाते हैं । यहां किसी भी बच्चे से फीस के नाम पर कोई वसूली नहीं होती जबकि इन तीनों अखाड़ों से अलग अन्य आसपास के अखाड़ों में बच्चों से कुश्ती सिखाने के नाम से वसूली की जाती है । ये कोच अपने खेतों की फसलों से मिलने वाले धन को इन खिलाड़ियों पर खर्च कर करते हुये कहा कि अल्लाह के रसूल रहे हैं ।
सरकार ने आज तक इनकी सुध नहीं ली । इन अखाड़ों में मेट की कमी है । अब सर्दी शुरू हो गई है तो बच्चों को बिना मेट के परेशानी उठानी पड़ेगी । कुलदीप बालियान बताते हैं कि यहां तो टैलेंट की कमी है और न ही बेहतर कोच की । बस माहौल व सुविधा मिल जाएं तो हम भी टॉप हों । बुढ़ाना क्षेत्र में पहलवानी के माहौल को पुनर्जीवित करने के लिए अब अखाड़ों को बचाने की जरूरत है । अखाड़ों की रौनक अब दिखाई नहीं देती ।
दंगल भी मेलों में ही सजते है । मिट्टी की उड़ती धूल , एक दूसरे को चित करते पहलवानों को देख मचता शोरगुल जैसे नजारे अब खो गए है । कुल मिलाकर कुश्ती के खिलाड़ियों पर महंगाई भारी पड़ रही है इसलिए दंगलों से दर्शकों का हौंसला बढ़ाने वाला शोरगुल और शाबासी खत्म होती जा रही है । क्या इन सब चीजों को फिर से इन दंगलों में लाने के लिए इस और यहां के जनप्रतिनिधि ध्यान देंगे या फिर बेचारे खिलाड़ी एक अंतरराष्ट्रीय पदक पाने की लालसा में यूं ही अपना पसीना अखाड़ों में बेवजह यूं ही बहाते रहेंगे।
प्राप्त समाचार के अनुसार जनपद मुजफ्फरनगर के ग्राम उमरपुर में मशहूर उस्ताद पहलवान श्री शमीम पहलवान, शादाब पहलवान के नेतृत्व में नए पहलवानों को कुश्ती के गुर सिखाए जा रहे हैं आज ग्राम शिकारपुर और ग्राम उमरपुर के पहलवान आसिफ पहलवान एवं साहिल पहलवानों के बीच जबरदस्त कुश्ती सादे अखाड़े में हुई और जबरदस्त जोर आजमाइश की गई
उल्लेखनीय है कि यहां रोजमर्रा कुश्ती का पहलवानी का प्रशिक्षण देकर नए-नए पहलवानों को देश के लिए तैयार किया जाता है ताकि आने वाले भविष्य में यह पहलवान पूरे देश में ही नहीं अपितु पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन कर सकें

