जेएनयू हिंसा: शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने कुलपति एम जगदीश कुमार को हटाने की मांग की
जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में रविवार को हुई हिंसा के बाद आज पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस का कहना है कि सीसीटीवी और सोशल मीडिया को जांच का आधार बनाया जाएगा। वहीं एम्स में भर्ती सभी छात्रों को छुट्टी दे दी गई है और केंद्रीय गृह मंत्रालय भी इस पूरे मामले पर नजर रखे हुए है।जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने नकाबपोश लोगों द्वारा विद्यार्थियों एवं शिक्षकों पर हमला होने के बाद सोमवार को कुलपति एम जगदीश कुमार को हटाने की मांग की।
Delhi: Jawaharlal Nehru University students and teachers form human chain in protest against yesterday's violence in the university. #JNUViolence pic.twitter.com/QVR2q8AYq0
— ANI (@ANI) January 6, 2020
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय(जेएनयू) कैंपस में रविवार शाम छात्र गुटों में जमकर मारपीट हुई। इससे दोनों पक्षों के 26 से अधिक छात्र घायल हो गए, जिनमें से 12 के सिर में गंभीर चोटें आईं हैं। घायलों में छात्र संघ अध्यक्ष आईशी घोष सहित महिला शिक्षक भी हैं। आईशी को गंभीर हालत में एम्स ट्रामा सेंटर में भर्ती करवाया है।
जेएनयू छात्रसंघ ने मारपीट व तोड़फोड़ का एबीवीपी पर आरोप लगाया है। जबकि, एबीवीपी का कहना है कि यह सब लेफ्ट ने किया है। बताया जाता है कि नकाब पहने 40 से 50 युवकों की भीड़ कैंपस में पहुंची और हॉस्टल में घुसकर हमला किया। कई वाहनों को तोड़ दिया गया। देर रात तक 23 घायलों को एम्स ट्रामा और 3 को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करवाया था।
The brutal attack on JNU students & teachers by masked thugs, that has left many seriously injured, is shocking.
The fascists in control of our nation, are afraid of the voices of our brave students. Today’s violence in JNU is a reflection of that fear.
#SOSJNU pic.twitter.com/kruTzbxJFJ
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) January 5, 2020
जेएनयू में हुए बवाल को लेकर दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस को अभी तीन शिकायतें मिली हैं, हालांकि मामले में अभी पुलिस ने केस दर्ज किया गया है या नहीं, इसका पता नहीं चल पाया है। वहीं, दिल्ली पुलिस ने कहा कि जेएनयू हिंसा पर कई शिकायतें आई हैं। जांच की जा रही है।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल ने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के लिए हैं और इन्हें कभी भी राजनीतिक आधार नहीं बनाना चाहिए। जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। विश्वविद्यालयों को राजनीति का ‘अड्डा’ कभी नहीं बनने देंगे।जेएनयू हिंसा पर पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने कहा यह घटना शायद सबसे बड़ा सबूत है कि हम तेजी से अराजकता की तरफ बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह घटना भारत की राजधानी में अग्रणी यूनिवर्सिटी में गृहमंत्री, एलजी और पुलिस आयुक्त की निगरानी में हुई। चिंदबरम ने कहा कि हम मांग करते हैं कि हिंसा के अपराधियों की पहचान की जाए और उन्हें 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर न्याय किया जाए। हम यह भी मांग करते हैं कि अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और तुरंत कार्रवाई की जाए।
Union Minister of Human Resource Development, Dr Ramesh Pokhriyal: Universities are meant for education and should never be made a political base. Action will be taken against those who will be found guilty. Will never let universities become "adda" for politics. #JNUViolence pic.twitter.com/Zrn4Xx1qOW
— ANI (@ANI) January 6, 2020
जेएनयू हिंसा पर अभिनेता अनिल कपूर ने कहा कि यह घटना निंदनीय है। काफी दुखद और चौंकाने वाला है। जो मैंने देखा, वह बहुत परेशान करने वाला था। मैं इसके बारे में सोचकर पूरी रात सो नहीं सका। हिंसा से हमें कुछ हासिल नहीं होगा, जिन्होंने ये किया है उन्हें सजा मिलनी चाहिए।
Bollywood actor Anil Kapoor on #JNUViolence: It has to be condemned. It was quite sad & shocking what I saw, it was very disturbing. I could not sleep the whole night thinking about it. Violence is not going to get us anything and those who have done it should be punished. pic.twitter.com/YHAWWnzKid
— ANI (@ANI) January 6, 2020
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जेएनयू में हुई हिंसा बहुत परेशान करने वाली घटना है, यह लोकतंत्र पर खतरनाक और नियोजित वार है। जो भी उनके खिलाफ बोलता है उसे पाकिस्तानी और देश का दुश्मन कह दिया जाता है। हमने देश में ऐसी स्थिति पहले नहीं देखी थी। दिल्ली की पुलिस केजरीवाल के नियंत्रण में नहीं है बल्कि केंद्र के अधीन है। एक तरफ उन्होंने भाजपा के गुंडे भेजे और दूसरी तरफ उन्होंने पुलिस को निष्क्रिय कर दिया।
West Bengal CM: Delhi's Police is not under Arvind Kejriwal rather it is under Central Govt. On one side they have sent the BJP goons & on the other side they made the Police inactive. What can Police do if they are directed by higher authority. This is a fascist surgical strike. https://t.co/oNtR1vxKCl pic.twitter.com/DivFnvGOr8
— ANI (@ANI) January 6, 2020
