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ऐसा कोई व्यापार है क्या है, जिसमें पैसा तीन साल में मिलता हो: Rakesh Tikait

Rakesh Tikait का दावा है कि बिजली बिल से लेकर गन्ना भुगतान सरीखे अहम मुद्दों पर किसानों की अहम मांगें अभी भी अटकी हैं। ऐसे में देश में फिर बड़े आंदोलन की जरूरत लग रही है। उन्होंने इसके साथ ही समझाया कि अन्नदाता किस कदर घाटे की मार से जूझ रहा है।

 पत्रकारों से बातचीत के दौरान Rakesh Tikait ने कहा, “पूरे प्रदेश में बिजली के सबसे ज्यादा रेट हैं। भुगतान है नहीं…दो-दो साल में गन्ने का पेमेंट होता है। जो गन्ना हम आज लगाएंगे, दवाई उसमें आज लग रही है। अगले साल वो जाएगा। तीसरे साल उसके पैसे मिलेंगे। ऐसे में तीन साल की खेती हो जाएगी।”

Rakesh Tikait ने आगे पूछा- ऐसा कोई व्यापार है क्या है, जिसमें पैसा तीन साल में मिलता हो? दुनिया में कोई ऐसा कारोबार हो तो बता दो? इसलिए तो किसान घाटे में है। एक बड़े आंदोलन की देश में फिर से जरूरत है। सरकारें बातचीत करने को तैयार नहीं हैं। जो दिल्ली का समझौता हुआ, वह ऑनलाइन समझौता हुआ। सरकार उसे भी मान नहीं रही है। वह एमएसपी का सवाल हो या फिर एनजीटी के नाम पर ट्रैक्टर तोड़े जा रहे हैं।

Rakesh Tikait- “हमने यह कहा कि एनजीटी में एक बार विचार होना चाहिए। हमको भी तो बैठाओ वहां पर…जज की गाड़ी 10 साल में 50-60 हजार किमी चलती है। डॉक्टर की 80-90 हजार किमी चल जाती है। रोडवेज की गाड़ी 10 लाख किमी चलती है और किसान का ट्रैक्टर व जज-डॉक्टर की गाड़ी एक श्रेणी में आती है। लेकिन यह है कि कंपनी को फायदा कैसे होगा…वो देश में राज चल रहा है।”

उनके मुताबिक, “सरकारें अगर गलत फैसला लेंगी तो हम उसका विरोध करेंगे। बिजली संशोधन विधेयक पर बातचीत हुई थी कि इस पर कोई दिक्कत होगी तो बात करेंगे। कोयले की कमी दिखाकर के धीमे-धीमे कर के रेट बढ़ाने का काम हो रहा है।”

उन्होंने इससे पहले 16 मई, 2022 को ट्वीट कर कहा था- सरकारों का काम होता है किसान आंदोलन को तोड़ना, फूट डालना या कमजोर करना। हमारा धर्म है किसानों की आवाज को और बुलंद करना। उनके अधिकारों की रक्षा करना। आखिरी सांस तक किसानों की लड़ाई जारी रहेगी।

भारतीय किसान यूनियन में फूट के बाद भारतीय किसान यूनियन दो गुटों में बंट गई है। किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत और Rakesh Tikait से अलग होकर कुछ नेताओं ने भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) नाम से अपना संगठन बना लिया है। BKU के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राजेश सिंह चौहान इस नए संगठन के अध्यक्ष होंगे।

लेकिन, यह पहला मौका नहीं है जब किसान यूनियन में टूट हुई हो बल्कि 35 साल के इतिहास में संगठन में कई बार बगावत हो चुकी है। भारतीय किसान यूनियन से नाराज नेता भाकियू के नाम से या मिलते-जुलते नाम से अपना अलग संगठन बना चुके हैं।

रविवार (15 मई) को महेंद्र सिंह टिकैत की पुण्यतिथि पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में विवाद हुआ और BKU दो भाग में बंट गई। नए संगठन के चीफ राजेश चौहान ने टिकैत बंधुओं पर आरोप लगाया है कि किसान आंदोलन के बाद संगठन किसानों के मुद्दों से भटक गई और राजनीतिक मुद्दों की ओर जाने लगी।

 1 मार्च 1987 को किसानों के मुददे को लेकर महेंद्र सिंह टिकैत ने भारतीय किसान यूनियन का गठन किया था। इसी दिन शामली के करमूखेड़ी बिजलीघर पर संगठन ने पहला धरना शुरू किया था। 17 मार्च 1987 को भाकियू की पहली बैठक हुई और फैसला लिया गया कि भाकियू एक गैर-राजनीतिक दल के रूप में किसानों की लड़ाई लड़ेगा। महेंद्र सिंह टिकैत को बालियान खाप से लेकर गठवाला खाप मुस्लिम किसान का पूरा समर्थन मिला और वो एक बड़े किसान नेता के रूप में सामने आए। टिकैत बंधुओं ने कई बार केंद्र और राज्य सरकारों को अपनी मांगों के आगे झुकाया।

जून 1987 में महेंद्र सिंह टिकैत का चौधरी सुखबीर सिंह से विवाद हुआ और उन्होंने खुद को BKU से अलग कर लिया था। अक्टूबर 1988 में जब महेंद्र सिंह टिकैत ने दिल्ली के बोट क्लब पर धरना खत्म किया उसके बाद कई नेताओं ने संगठन से अलग राह पकड़ ली। महेंद्र सिंह टिकैत के भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के दौरान उत्तर प्रदेश में संगठन की कमान भानु प्रताप सिंह के हाथों में हुआ करती थी।

जब महेंद्र सिंह टिकैत ने किसान कामगार नाम से राजनीतिक पार्टी बनाई तो उसकी कमान भानु प्रताप सिंह को सौंपी। लेकिन बाद में उन्होंने पार्टी की कमान चौधरी अजित सिंह को सौंप दी जिसकी वजह से भानु प्रताप नाराज हो गए। साल 2006 में महेंद्र टिकैत ने उन्हें दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाया। 2008 में राकेश टिकैत ने इलाहाबाद की बैठक में भानु प्रताप पर आरोप लगाया, जिसके बाद उन्होंने भारतीय किसान यूनियन (भानु गुट) नाम से अलग संगठन बना लिया।

हरियाणा भाकियू के अध्यक्ष रह चुके ऋषिपाल अंबावता ने भी भाकियू अंबावता के नाम से अलग संगठन बनाया था। भाकियू (तोमर) संगठन भी किसान यूनियन से निकली है। चौधरी हरिकिशन मलिक ने भी BKU से अलग होकर राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन का गठन किया था।

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News-Desk

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