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Muzaffarnagar News: शुकतीर्थ मंदिर प्रांगण में कथा सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु

मुजफ्फरनगर।(Muzaffarnagar News) शुकतीर्थ की पावन धरा पर अष्टोत्तर शत श्रीमद् भागवत मूल पाठ के साथ श्री लक्ष्मी नारायण महायज्ञ एवं श्रीमद् भागवत कथा छठे दिन शुकतीर्थ मंदिर प्रांगण में स्थित व्यासपीठ से आचार्य श्री जयराम जी महाराज ने श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह का प्रसंग समेत श्री कृष्ण से जुड़ी कथाओं का वर्णन किया

इससे पूर्व शुकतीर्थ पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद जी महाराज ने शुक्रतीर्थ से जुड़ी विभिन्न कथा का वर्णन किया। महाराज श्री ने समुद्र मंथन से जुड़ी कथा का वर्णन करते हुए बताया की यही वह पावन धरा है जहां सुखदेव जी महाराज को देवताओं ने अमृत कलश के बदले कथा सुनाने की शर्त रखी थी लेकिन उसे महाराज श्री ने सिरे से ही नकार दिया था।

ललीतांबा पीठाधीश्वर आचार्य जय राम जी महाराज भागवत कथा के छठे दिन भागवत भक्तों पर भगवत ज्ञान की अमृत वर्षा कर रहे थे। उन्होंने श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग सुनाया।

व्यास पीठ पर विराजमान कथावाचक आचार्य ने रास पांच अध्याय का वर्णन करते हुए उन्होंने भगवान का मथुरा प्रस्थान, कंस का वध, महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना, कालयवन का वध, उधव गोपी संवाद, ऊधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना, द्वारका की स्थापना एवं रुक्मणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया गया। कथा के दौरान आचार्य ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और महारास लीला के द्वारा ही जीवात्मा परमात्मा का ही मिलन हुआ। जीव और ब्रह्म के मिलने को ही महारास कहते है।

इस समय भक्ति की बयार बह रही है जिस कारण पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। शुकतीर्थ मैं छठे दिन श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में रुक्मणि विवाह प्रसंग का वर्णन किया गया। महाराज श्री ने कहा कि कलयुग में भागवत कथा से बड़ा कोई ज्ञान यज्ञ नहीं है। उन्होंने कहा कि नौ प्रकार की भक्तियों में सरल श्रेष्ठ भक्ति कथा एवं कीर्तन है।

जहां कीर्तन होता है वहा भगवान का नाम लिया जाता है वहीं भागवत कथा कल्पवृक्ष है। संतान की इच्छा वाले को संतान तथा धन की कामना करने वाले को धन प्राप्त होता है। मोक्ष की कामना करने वाले को मोक्ष प्राप्ति होती है।

इसीलिए ज्ञानी पुरुष इस ज्ञान यज्ञ को कराते हैं। कथा में श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह की कथा के साथ गीत रूकमणि मंगल , सुदामा चरित्र का वर्णन किया गया। कथा के दौरान महाराज श्री के द्वारा कहा गया कि जीव प्रेम का भूखा है परमात्मा प्रेम करने वाले हैं। लौकिक प्रेम टिकता नहीं है परंतु शुद्ध प्रेम टिकता है। परिवार का प्रेम वासना से सना हुआ है। परंतु कृष्ण का प्रेम विशुद्ध प्रेम है। आनंद रुपये पैसे या भौतिक सुखों में नहीं है यह तो क्षणिक है, लेकिन परमात्मा के प्रति आस्था ही प्रति पूर्णानंद है।

इस दौरान अखिल भारतीय शक्ति समिति से जुड़े सुरेंद्र शर्मा आनंद प्रकाश शर्मा विजेंद्र शर्मा अशोक शर्मा शाकुंबर प्रसाद शर्मा सपा नेता राकेश शर्मा हरेंद्र शर्मा पूर्व जिला पंचायत सदस्य जनार्दन शर्मा सुभाष शर्मा बिट्टू प्रधान ब्रजमोहन शर्मा पूर्व सभासद योगेश मित्तल अनिरुद्ध मित्तल रविंद्र सिंह संजय शर्मा अमित शर्मा समेत आसपास के क्षेत्रों की श्रद्धालुओं की भीड़ मौजूद रहे।

News-Desk

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