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Muzaffarnagar News: कीटनाशकों का सुरक्षित उपयोग विषय पर कार्यक्रम का हुआ आयोजन

मुजफ्फरनगर। (Muzaffarnagar News) श्रीराम कालेज के कृषि विभाग द्वारा कीटनाशकों का सुरक्षित उपयोग विषय पर एक प्रेरक कार्यक्रम का आयोजन कराया गया । इस कार्यक्रम का शुभारम्भ संस्थान के कार्यवाहक निदेशक डॉ निशांत राठी, कृषि विभाग के डीन डॉ अशोक कुमार एवं विभागाध्यक्ष डॉ नईम के द्वारा किया गया।

इस कार्यक्रम के मुख्य. अतिथि श्री पी के पांडेय जनरल मैनेजर क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन लिमिटेड कंपनी रहें।डॉ पी के पांडेय ने छात्रों को बताया की बढ़ती हुई आबादी एवं घटती हुई जमीन के कारण उत्पादन में बढ़ोतरी एक चुनौती का विषय है। इस चुनौती का सामना करने के लिए आज के समय में उत्पादन बढ़ाने के लिए अधिक प्रयाश किये जा रहे है।

लेकिन वैश्विक तापमान तथा अन्य परिस्थिति के कारण फसल को नुकशान पहुंचाने वाले शत्रु कीट एवं बीमारी बहुत तेजी से बढ़ रही है। जिसके कारण ४० प्रतिशत तक फसल बर्बाद हो जाती है । अतः इनसे फसलों को बचाने के लिए फसलों पर विभिन्न प्रकार की दवाइयों का प्रयोग करते है। लेकिन ये प्रयोग हम एक निश्चित समय से नहीं कर पाते किसके कारण दवाइयों का अच्छा असर नहीं होता। दवाइँया अलग-अलग प्रकार की होती है जो कीटनाशक कीट के लिए खरपतवार नाशी खरपतवार के लिए शाकनाशी शाक वाले खरपतवार लिए फफूंदनाशी फफूंदी वाली बीमारी के लिए निमोटोडासाइड निमेटोड को नष्ट करने लिए प्रयोग की जाती है।

तथा सभी दवाइयों को प्रयोग करने का तरीका अलग है। किसान को सभी दवाइया एक साथ मिलाकर प्रयोग नहीं करनी चाहिए। इसकी पहचान करने के लिए दो दवाई की दो-दो बून्द आपस में मिलकर देखे। यदि दवाई आपस में मिलकर फट जाती है तो ऐसी दवाई का प्रयोग अलग- अलग करे। यदि दवाई नहीं फटती तो एक साथ मिलकर कर सकते है। किसान ऐसी दवाई प्रयोग करे की इन्सेक्ट के साथ अंडे भी नष्ट हो जाए। डॉ अशोक कुमार के द्वारा इस कार्यकम के दौरान एक क्विज कराई गयी जिसमे सभी छात्रों से प्रश्न पूछे गए तथा सही उत्तर देने वाले छात्रों को पुरुष्कार देकर उनका उत्साहवर्द्धन भी किया गया। प्रतियोगिता में पूछे गए प्रश्न कीट विज्ञान से सम्बंधित थे।

डॉ नईम ने बताया की कीटनाशकों के समूह को आम तौर पर विभिन्न समूहों में वर्गीकृत किया जाता है कीट जीवों के आधार पर जिसके विरुद्ध यौगिकों का उपयोग किया जाता है। उनकी रासायनिक प्रकृति प्रवेश का तरीका और कार्यवाही का तरीका। तथा कीट के नष्ट के लिए इसके अलग-अलग रूप है पेट जहर यह कीटनाशक पत्तियों और अन्य भागों में लगाया जाता है

पौधे को जब कीट निगलता है तो कीट के पाचन तंत्र में कार्य करता है। संपर्क विष संपर्क में आये कीट की मृत्यु का कारण बनता है। फ्यूमिगेंट जब किट के अंदर विष वाष्प के रूप में श्वासनली प्रणाली ;श्वसनद्ध में प्रवेश करता है। प्रणालीगत विष पौधे या मिट्टी पर लगाया जाता है तो इसको पौधे जडो के द्वारा अवशोषित किया जाता है। पर्ण ;याद्ध जड़ें और संवहनी प्रणाली के माध्यम से स्थानांतरित और मृत्यु का कारण बनता है।

डॉ निशांत राठी ने छात्रों बताया की कृषि अध्ययन एक अहम् है। ओर आपसे उम्मीद है की बीएससी कृषि करने के बाद कृषि के विभिन क्षेत्रो में काम करेंगे और कॉलेज का नाम रोशन करेंगे।

कार्यक्रम के दौरान श्रीराम कॉलेज की प्राचार्या डॉ प्रेरणा मित्तल, डीन अकेडमिक्स डॉ ओमवीर चौधरी, आईक्यूएसी समंवयक डॉ विनीत कुमार शर्मा, डॉ विक्रांत, डॉ अंजलि झंकार, डॉ आबिद अली डॉ सचिन साहू, डॉ राजकुमार, डॉ, जमाल एवं सभी छात्र छात्राए उपस्थित रहे।

समाचार (Muzaffarnagar News)

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