जिन शब्दों को हटाया गया उसका उपयोग पक्ष विपक्ष दोनों करते थे: Om Birla
संसद में असंसदीय शब्दों को बैन कर दिया इसके लिए शब्दों की एक सूची जारी की गई जिसमें साफ तौर पर ऐसे शब्दों को असंसदीय घोषित करते हुए बैन कर दिया गया। इस बात को लेकर गुरुवार को विपक्ष ने हंगामा खड़ा कर दिया।
लोकसभा के स्पीकर Om Birla इस दौरान सबको शांत करवाया और कहा कि किसी भी शब्द पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। उन्होंने कहा इस मामले में विपक्ष को गलफहमी में नहीं रहना चाहिए और न ही ऐसी गलतफहमियां फैलानी चाहिए। उन्होंने कहा हमने किसी भी शब्द पर बैन नहीं लगाया है लेकिन उन शब्दों को हटा दिया है जिसको लेकर आपत्तियां थीं।
Om Birla ने बताया कि इसके पहले असंसदीय शब्दों को लेकर एक किताब लिखी जाती थी लेकिन अब सरकार ने कागजों की बर्बादी से बचने के लिए इसको इंटरनेट पर अपलोड कर दिया है। किसी भी शब्द पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है जिन शब्दों पर आपत्तियां थी उन्हें हटा दिया गया है। साथ ही उन्होंने बताया कि हमने उन शब्दों का संकलन भी जारी किया है।
‘जुमलाजीवी’, ‘बाल बुद्धि’, ‘कोविड स्प्रेडर’ और ‘स्नूपगेट’ ‘शर्मिंदा’,’दुर्व्यवहार’,’विश्वासघात’,’ड्रामा’,’पाखंड’और ‘अक्षम’ जैसे रोजमर्रा के उपयोग होने वाले शब्दों को लोकसभा सचिवालय ने बुधवार को असंसदीय सूची में डाल दिया। विपक्ष ने इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि इससे सरकार की आलोचना करने की उनकी क्षमता बाधित होगी।
सोमवार से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है इस सत्र के शुरू होने से पहले ही जारी की गई इस किताब से ‘अराजकतावादी’, ‘शकुनि’, ‘तानाशाही’, ‘तानाशाह’, ‘तानाशाही’, ‘जयचंद’, ‘विनाश पुरुष’, ‘खालिस्तानी’ और ‘खून से खेती’ जैसे शब्दों को को भी वाद-विवाद के दौरान या अन्यथा इस्तेमाल करने पर हटा दिया जाएगा।
लोकसभा सचिवालय की सूची में एक चेतावनी शामिल है कि कुछ शब्दों को संसदीय कार्यवाही के दौरान बोली जाने वाली अन्य अभिव्यक्तियों के संयोजन के साथ पढ़े जाने तक असंसदीय नहीं माना जा सकता है। बुकलेट में यह भी कहा गया है कि अध्यक्ष के खिलाफ दोनों सदनों में अंग्रेजी या हिंदी में किए गए किसी भी आरोप को असंसदीय माना जाएगा और संसद के रिकॉर्ड से हटा दिया जाएगा। बुकलेट की आलोचना को पहले सरकारी सूत्रों के माध्यम से मीडिया को जारी एक बयान में काउंटर किया गया था। बयान में कहा गया है, इनमें से अधिकतर शब्दों को यूपीए सरकार के दौरान भी असंसदीय माना जाता था। किताब केवल शब्दों का संकलन है सुझाव या आदेश नहीं।
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