Muzaffarnagar News- शहीद लोकेश सहरावत की अंतिम यात्रा उमड़ा जनसैलाब, लगे गगनभेदी नारे
मुजफ्फरनगर। (Muzaffarnagar News) सिक्किम हादसे में शहीद हुए युसूफपुर के लाल सेना नायक लोकेश सहरावत का शव रविवार को उनके पैतृक गांव पहुंचा। शहीद हुए सेना के नायक लोकेश सहरावत की अंतिम विदाई में शामिल होने के लिए सैकड़ों लोग गांव पहुंचे। इस दौरान हर आंख नम हो गई। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान व मंत्री कपिलदेव अग्रवाल तथा जिंप अध्यक्ष डा. वीरपाल निर्वाल ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया।
शहीद की अंतिम यात्रा पर जगह-जगह फूल बरसाए गए। ग्रामीणों ने पूरी यात्रा के दौरान भारत माता की जय, वंदे मातरम और जब तक सूरज चांद रहेगा, लोकेश तेरा नाम रहेगा का जयघोष किया। इससे पहले ग्रामीण सुबह ही मुजफ्फरनगर बाईपास पर पहुंच गए थे। जहां से अंतिम यात्रा गांव के लिए शुरू हुई। गांव की निजी जमीन पर अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान सैन्य अधिकारी, डीएम चन्द्रभूषण सिंह, एसएसपी विनीत जायसवाल सहित कई अन्य पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
शहीद लोकेश के अंतिम संस्कार के दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री डा. संजीव बालियान, मंत्री कपिलदेव अग्रवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष विजय शुक्ला, जिला पंचायत अध्यक्ष डा. वीरपाल निर्वाल, पालिका चेयरमैन श्रीमती अंजू अग्रवाल, पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक, विधायक अनिल कुमार, विधायक चन्दन सिंह चौहान, सपा नेता राकेश शर्मा, रालोद नेता अजित राठी, रालोद जिलाध्यक्ष संदीप मलिक, रालोद मंडल अध्यक्ष प्रभात तोमर, पूर्व मंत्री योगराज सिंह, भाजपा नेता अचिन्त मित्तल सहित विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े राजनीतिज्ञ एवं क्षेत्र के गणमान्य लोग व भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
उल्लेखनीय है कि लोकेश २०१३ में जबलपुर से २५ ग्रेनेडियर (सेना) में भर्ती हुए था। वह एक माह की छुट्टी पूरी कर दस दिन पहले ही ड्यूटी पर लौटे थे। लोकेश किसान उदयवीर के इकलौता बेटे थे, जिसकी शहादत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। नायक लोकेश की लगभग ढाई वर्ष पूर्व तनु के साथ शादी हुई थी। मां कुसुम सहित पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
गुरुवार रात को ही लोकेश कुमार की शहादत का समाचार गांव पहुंचा था। बेटे की शहादत की खबर सुनते ही परिजनों में कोहराम मच गया। शुक्रवार को दिनभर गांव में सन्नाटा पसरा रहा। सैकड़ों लोग शहीद के घर सांत्वना देने पहुंचे। रविवार सुबह तक शहीद का पार्थिव शरीर पहुंचा। जिसके बाद उनके पार्थिव शरीर को उनके आवास पर ले जाया गया। गांव की ही निजी भूमि में शहीद का सैनिक सम्मान के साथ गांव में ही अंतिम संस्कार किया किया।

