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शाह और नड्डा की चंद्रबाबू नायडू से बातचीत , BJP से हाथ मिला सकती है TDP

BJP  ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को और मजबूत बनाने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। 2018 में भाजपा से नाता तोड़ने वाले टीडीपी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू एक बार फिर भाजपा से हाथ मिलाकर नया राजनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। 

इसी दिशा में मजबूत पहल करते हुए नायडू ने शनिवार को गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के साथ महत्वपूर्ण बैठक की है। भाजपा सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्री शाह के आवास पर हुई बैठक के दौरान आंध्र प्रदेश में गठजोड़ की सियासी संभावनाओं पर गहराई से चर्चा की गई है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस बैठक का बड़ा नतीजा दिख सकता है। 

तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) और भाजपा के बीच गठजोड़ की काफी दिनों से सियासी अटकलें लगाई जाती रही हैं। चंद्रबाबू नायडू राज्य में नया राजनीतिक समीकरण बनाने और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी महत्ता बढ़ाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। इसी सिलसिले में उन्होंने भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ चर्चा शुरू की है। शाह के आवास पर शनिवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक के दौरान दोनों दलों के बीच गठजोड़ की संभावनाओं पर गहराई से मंथन किया गया। इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष नड्डा भी मौजूद थे। दोनों नेताओं ने चंद्रबाबू नायडू के साथ गहराई से मंथन किया है।

आंध्र प्रदेश की सियासत में टीडीपी को महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत माना जाता रहा है। मौजूदा समय में टीडीपी राज्य में मुख्य विपक्षी दल है। भाजपा सूत्रों का कहना है कि आंध्र प्रदेश के साथ ही तेलंगाना में भी दोनों दलों के बीच गठजोड़ की संभावनाओं पर चर्चा हुई है। भाजपा इन दिनों तेलंगाना में अपनी सियासी मजबूती की कोशिश में जुटी हुई है। इसके लिए भाजपा ने केसीआर के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ रखा है। तेलंगाना में केसीआर की मजबूत पकड़ है और ऐसे में भाजपा टीडीपी की मदद से यहां बड़ा सियासी खेल करने की कोशिश में जुट गई है।

टीडीपी के मुखिया चंद्रबाबू नायडू पहले भी एनडीए में शामिल रह चुके हैं। 2018 में उन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन तोड़ दिया था। दरअसल नायडू लंबे समय से आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहे थे। अपनी मांग पूरी न होने के कारण उन्होंने 2018 में भाजपा का साथ छोड़ दिया था। अब वे एक बार फिर भाजपा के साथ मिलकर राज्य में नया समीकरण बनाने के इच्छुक हैं। 

वैसे सियासी जानकारों के मुताबिक यह आसान काम नहीं है क्योंकि आंध्र प्रदेश के कई भाजपा नेताओं की ओर से इस गठबंधन का विरोध किया जा रहा है। इन नेताओं का कहना है कि पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान नायडू ने पीएम मोदी के खिलाफ तीखे हमले किए थे। इसके साथ ही उनकी कांग्रेस से नजदीकी के संकेत भी मिले थे। नायडू के इस तेवर के कारण दोनों दलों के बीच तीखा आरोप-प्रत्यारोप भी हुआ था। राज्य भाजपा के नेताओं की ओर से ही इस बात की दलील दी जा रही है मगर सियासी जानकारों के मुताबिक लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राज्य में नया समीकरण बनने की संभावनाएं दिख रही हैं।

कर्नाटक में हाल में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के हाथों मिली बड़ी हार के बाद भाजपा ने भी दक्षिण के राज्यों पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया है। पार्टी की ओर से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में विशेष रूप से फोकस किया जा रहा है। इसी कड़ी में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की ओर से नायडू से चर्चा शुरू की गई है। टीडीपी ने पिछले साल हुए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान एनडीए के उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू का समर्थन किया था। 

 

News-Desk

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