नवरात्रि में मां दुर्गा के इन 9 शक्तिशाली बीज मंत्रों का करें जाप, होगी मां की कृपा
नवरात्रि के समय में दुर्गा बीज मंत्रों का जाप कल्याणकारी माना जाता है।इस वर्ष शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ एक माह विलंब से हो रहा है। मलमास के कारण इसमें यह देरी हुई है।
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर दिन शनिवार से प्रारंभ हो रही है। नवरात्रि के समय में मां दुर्गा के 9 स्वरुपों की विधि विधान से पूजा की जाती है, इसलिए इसे दुर्गा पूजा भी कहा जाता है।
नवरात्रि के समय में मां दुर्गा के बीज मंत्रों का जाप कल्याणकारी और प्रभावी माना जाता है। इस नवरात्रि आप 9 दुर्गा के बीज मंत्रों का जाप कर सकते हैं।
इसमें शब्दों के उच्चारण का विशेष ध्यान रखा जाता है। आइए मां दुर्गा के 9 स्वरुपों के बीज मंत्रों के बारे में जानते हैं।
9 दुर्गा के बीज मंत्र
1. शैलपुत्री: ह्रीं शिवायै नम:।
2. ब्रह्मचारिणी: ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।
3. चन्द्रघण्टा: ऐं श्रीं शक्तयै नम:।
4. कूष्मांडा: ऐं ह्री देव्यै नम:।
5. स्कंदमाता: ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:।
6. कात्यायनी: क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:।
7. कालरात्रि: क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।
8. महागौरी: श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:।
9. सिद्धिदात्री: ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।
किस दिन किस देवी की पूजा
इस बार मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आ रही हैं। 17 अक्टूबर को घट स्थापना के साथ ही मां दुर्गा की विधि विधान से पूजा अर्चना शुरू हो जाएगी। 25 अक्टूबर को पारण के साथ ही नवरात्रि का समापन हो जाएगा।
आप भी इस वर्ष नवरात्रि व्रत रहने वाले हैं और मां दुर्गा के बीज मंत्रों का जाप करना चाहते हैं तो आपको नवरात्रि की तिथियों के बारे में जानकारी होनी चाहिए।
आइए जानते हैं कि किस दिन किस देवी की पूजा होगी और किस बीज मंत्र का जाप होगा।
17 अक्टूबर 2020: कलश स्थापना की पूजा के बाद मां शैलपुत्री की आराधना होगी। इस दिन आप मां शैलपुत्री के बीज मंत्र का जाप करें।
18 अक्टूबर 2020: इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी और उनके बीज मंत्र का जाप किया जा सकता है।
19 अक्टूबर 2020: सोमवार के दिन मां चंद्रघंटा की विधिविधान से पूजा होगी तथा उनके बीज मंत्र का जाप शुद्धता के साथ कर सकते हैं।
20 अक्टूबर 2020: इस दिन मां दुर्गा के चतुर्थ अवतार मां कुष्मांडा की पूजा की जाएगी और उनके बीज मंत्र का जाप होगा।
21 अक्टूबर 2020: आज के दिन स्कंदमाता की विधिपूर्वक आराधना की जाएगी और उनके बीज मंत्र का जाप हो सकता है।
22 अक्टूबर 2020: आज नवरात्रि की षष्ठी तिथि को मां कात्यायनी की पूजा होगी। इस दौरान मां कात्यायनी के बीज मंत्र का जाप हो सकता है।
23 अक्टूबर 2020: नवरात्रि की सप्तमी तिथि को मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी। मां कालरात्रि के बीज मंत्र का जाप करना इस दिन उत्तम होता है।
24 अक्टूबर 2020: इस नवरात्रि अष्टमी और महानमी एक ही तारीख को है। अष्टमी को मां महागौरी तथा महानवमी को मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। ऐसे में आप महागौरी तथा मां सिद्धिदात्री के बीज मंत्रों का जाप इस दिन कर सकते हैं।
25 अक्टूबर 2020: इस दिन पारण के साथ नवरात्रि का व्रत पूर्ण होगा। विजयदशमी और दशहरा मनाया जाएगा। समापन वाले दिन हवन भी किया जाता है।
नवरात्रि में जपें दुर्गा सप्तशती, 6 सबसे अधिक शक्तिशाली मंत्र
नवरात्रि में श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ मनोरथ सिद्धि के लिए किया जाता है ; क्योंकि श्री दुर्गा सप्तशती दैत्यों के संहार की शौर्य गाथा से अधिक कर्म , भक्ति एवं ज्ञान की त्रिवेणी हैं।
मार्कण्डेय पुराण में ब्रह्माजी ने मनुष्यों के रक्षार्थ परमगोपनीय साधन , कल्याणकारी देवी कवच एवं परम पवित्र उपाय संपूर्ण प्राणियों को बताया, जो देवी की नौ मूर्तियां – स्वरूप हैं , जिन्हें ‘ नव दुर्गा ‘ कहा जाता है , उनकी आराधना आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से महानवमी तक की जाती है।
यह श्री मार्कण्डेय पुराण का अंश है। यह देवी महात्म्य धर्म , अर्थ , काम एवं मोक्ष चारों पुरुषार्थों को प्रदान करने में सक्षम है। सप्तशती में कुछ ऐसे भी स्रोत एवं मंत्र हैं , जिनके विधिवत पारायण से इच्छित मनोकामना की पूर्ति होती है। यहां पढ़ें खास 6 मंत्र –
* बाधा मुक्ति एवं धन – पुत्रादि प्राप्ति के लिए –
सर्वाबाधा वि निर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वितः।
मनुष्यों मत्प्रसादेन भवष्यति न संशय॥
* सर्वकल्याणकारी मंत्र –
सर्व मंगलं मांगल्ये शिवे सर्वाथ साधिके ।
शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुऽते॥
* आरोग्य एवं सौभाग्य –
देहि सौभाग्यं आरोग्यं देहि में परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषोजहि॥
* विपत्ति नाश के लिए-
शरणागतर्दनार्त परित्राण पारायणे।
सर्व स्यार्ति हरे देवि नारायणि नमोऽतुते॥
* आरोग्य , ऐश्वर्य , सौभाग्य , संपदा एवं शत्रु भय मुक्ति –
ऐश्वर्य यत्प्रसादेन सौभाग्य – आरोग्य सम्पदः।
शत्रु हानि परो मोक्षः स्तुयते सान किं जनै॥
* विघ्नहरण मंत्र –
सर्वबाधा प्रशमनं त्रेलोक्यसयाखिलेशवरी।
एवमेय त्याया कार्य मस्माद्वैरि विनाशनम्॥
जाप विधि- नवरात्रि के प्रतिपदा के दिन घटस्थापना के बाद संकल्प लेकर प्रातः स्नान करके दुर्गा की मूर्ति या चित्र की पंचोपचार या दक्षोपचार या षोड्षोपचार से गंध , पुष्प , धूप दीपक नैवेद्य निवेदित कर पूजा करें। मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।

