उत्तर प्रदेश

अधिकारियों की उदासीनता के चलते शौचालय हुआ जर्जर- प्रधानमंत्री के सपनो को चूर रहे जिले अधिकारी

बाराबंकी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ओडीएफ मुक्त मिशन का सपना अधिकारियों की उदासीनता के चलते जिले में परवान नहीं चढ़ सका। विकास खण्ड हैदरगढ़ की अधिकतर ग्राम पंचायतों में बनाये गए शौचालय बहुत ही कम समय में दयनीय एवं जर्जर अवस्था मे पहुंच गये है जो अपनी सच्चाई खुद बयां कर रहे है

इससे साफ तौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस अति महत्वाकांक्षी योजना मे किस कदर भ्रष्टाचार का खेल हुआ है।ओडीएफ मुक्त गांव की मुहिम को अमलीजामा पहनाने के लिए प्रदेश सरकार ने भी युद्ध स्तर पर भरकस प्रयास किए और अपने सरकारी नुमाइंदों को उचित कड़े निर्देश भी दिए।

सरकार की सख्ती एवं निर्देशों को न मानकर कर खाऊ- कमाऊं नीति के चलते गांवों में ऐसे घटिया किस्म के शौचालय बना दिए गये जो देखने लायक है। इन शौचालयों को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे ये शौचालय खंडहर में तब्दील हो गए है, यहीं नहीं इस ब्लॉक की दर्जनों ग्राम पंचायतें ऐसी भी है

जहाँ पर वर्षों से शौचालय अधूरे है जिनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है और ये अधूरे शौचालय कब पूर्ण होंगे इसको लेकर जिम्मेदार ब्लॉक के अधिकारी उदासीन बने हुए है।

सरकार की मंशा के विपरीत घटिया किस्म के शौचालयों का निर्माण कराकर इस विकास खण्ड में एक बड़ा घोटाला हुआ है, कहने को कागजों पर ओडीएफ मुक्त गांव है

लेकिन धरातल पर आज भी लोग खुले में शौच करने को मजबूर है। सबसे खराब हालत भेतमुआ ग्राम पंचायत के पासिन पुरवा गांव की है। राम सेवक का शौचालय अधूरा बनाकर छोड़ दिया गया है

शौचालय की छत और टैंक का ढक्कन नहीं है। रामरती पत्नी स्व दिनेश, शिवकला पत्नी गुरू प्रसाद, दान बहादुर, रमझारा पत्नी राम केश, राम गुलाम सहित कई अन्य लोगों के बने शौचालय अधूरे है किसी में छत नहीं है तो किसी में टैंक बने है, लेकिन ढक्कन नदारद है यही नहीं कई शौचालयों की दिवारों में दरारें आने के साथ उनका प्लास्टर भी उखड़ गया है

और दरवाजे भी टूट गए है कुछ शौचालय तो खंडहर में तब्दील हो गए है।भेतमुआ के अजय दीप सिंह, सन्तोष कुमार वर्मा और पप्पू और विश्वनाथ के बने शौचालयों का भी यहीं हाल है।

इसी तरह बली गेरावां में शिव प्रसाद, शिव नरायन, इंद्र पाल, राम आधार, जग मोहन, शिव मोहन, केवला पत्नी साहेब दीन का शौचालय अधूरा है इसमें जो बने भी है कम समय में दयनीय हालत में पहुंच गए है। रूकनुद्दीन में राजा सिंह और शिव नरायण का शौचालय बनने के बाद दयनीय अवस्था में पहुंच गया है

और अलख सिंह के शौचालय के टैंक में ढक्कन व दीवारों में फर्स नहीं है। बारा ग्राम पंचायत के रामपुर में संजू पांडेय, दुखराम, माता फेर, धर्मा, इसी ग्राम पंचायत के अमिलहरा में जगपता, रामेश्वरी, प्रीति, गुदानी, राम प्रताप के शौचालयों की हालत बद से बदतर हो चुकी है इसमें कुछ शौचालय अधूरे भी पड़े है।

इसके अलावा मंगौवा, हरपालपुर सहित दर्जनों गांवों में बनाए गये तमाम शौचालय दयनीय व जर्जर अवस्था में पहुंचे चुके है जहाँ के लोग आज भी खुले में शौच जाने को विवश है।

शौचालय निर्माण के दौरान बरती गई भारी अनियमितता का नतीजा है कि बनाए गये शौचालय अल्प समय में दयनीय एवं गिरी हालत में पहुंच गए है और तमाम शौचालयों को आधे- अधूरे बनाकर ही छोड़ दिया गया है ये अधूरे शौचालय कब पूर्ण होंगे यह जानने की जिम्मेदारों को फुर्सत तक नहीं है।

कुल मिलाकर सरकार की मंशा पर अधिकारियों की उदासीनता एवं गैर जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली भारी पड़ रही है।

इन अधूरे पड़े एवं जर्जर हो चुके शौचालयों को लेकर एडियों पंचायत विवेक कुमार शुक्ला से दूरभाष के माध्यम से बात की गई तो उन्होंने गैर जिम्मेदाराना बयान देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कहा कि यदि हमें अधूरे शौचालयों की सूची मिलेगी तो हम उनकी जाँच कराएंगे।

News Desk

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