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पूर्व उपप्रधानमंत्री Lal Krishna Advani (एल० के० आडवाणी) को भारत रत्न से सम्मानित करने का एलान

Lal Krishna Advani (एल० के० आडवाणी) भारतीय राजनीति के एक प्रमुख और पूर्व उपप्रधानमंत्री, को भारत रत्न से सम्मानित करने का एलान होने के बाद देशवासियों में एक बड़ी खुशी है. नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पोस्ट में इस घोषणा के बाद, आडवाणी जी के योगदान को सराहा गया है, जो उन्होंने अपने लंबे और सेवाभावपूर्ण राजनैतिक करियर में दिया।

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री Lal Krishna Advani (एल० के० आडवाणी) को भारत रत्न मिलेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी. पीएम मोदी ने X पर अपने पोस्ट में लिखा ‘मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि श्री Lal Krishna Advani (एल० के० आडवाणी) को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा.’

PM मोदी ने आगे लिखा ‘मैंने भी उनसे बात की और इस सम्मान से सम्मानित होने पर उन्हें बधाई दी. हमारे समय के सबसे सम्मानित राजनेताओं में से एक, भारत के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है. उनका जीवन जमीनी स्तर पर काम करने से शुरू होकर हमारे उपप्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा करने तक का है. उन्होंने हमारे गृह मंत्री और सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में भी अपनी पहचान बनाई. उनके संसदीय हस्तक्षेप हमेशा अनुकरणीय और समृद्ध अंतर्दृष्टि से भरे रहे हैं.’ आइए इस खबर में उनके बार में जानते हैं.

Lal Krishna Advani (एल० के० आडवाणी) पिछले कुछ दशकों में भारतीय राजनीति में प्रतिष्ठित शख्सियतों में से एक हैं और 10वीं और 14वीं लोकसभा में विपक्ष के नेता रहे. 1998 से 2004 तक, भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार के दौरान, अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में, उन्होंने गृह मंत्री और बाद में उप प्रधान मंत्री के रूप में कार्य किया. उनका जन्म 8 नवंबर 1927 को कराची (अब पाकिस्तान में) में किशनचंद आडवाणी और ज्ञानीदेवी के घर हुआ था. लालकृष्ण आडवाणी का परिवार सिंधी हिंदुओं की आमिल शाखा से था.

साल 1951 में डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जनसंघ की स्थापना की. तब से लेकर साल 1957 तक Lal Krishna Advani (एल० के० आडवाणी)  पार्टी के सचिव रहे. साल 1973 से 1977 तक उन्होंने भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष का दायित्व संभाा वर्ष 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के बाद से 1986 तक लालकृष्ण आडवाणी पार्टी के महासचिव रहे. इसके बाद साल 1986 से 1991 तक पार्टी के अध्यक्ष पद का उत्तरदायित्व भी उन्होंने सम्भाला.

साल 1990 में राम मंदिर आंदोलन शुरू हुआ था. इस आंदोलन के दौरान आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या के लिए राम रथ यात्रा निकाली थी. हालांकि Lal Krishna Advani (एल० के० आडवाणी) को बीच में ही गिरफ़्तार कर लिया गया था. लेकिन राजनीति में उनका कद बहुत बड़ा हो गया था. 990 की रथयात्रा ने लालकृष्ण आडवाणी की लोकप्रियता को चरम पर साल 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद जिन लोगों को अभियुक्त बनाया गया है उनमें आडवाणी का नाम भी शामिल है.

लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को कराची (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। उनका परिवार सिंधी हिंदुओं की आमिल शाखा से था। वह जनसंघ के सचिव रहे और इसके बाद भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया और फिर भारतीय जनता पार्टी के महासचिव और अध्यक्ष के पदों पर सेवा की।

1990 में राम मंदिर आंदोलन के दौरान, आडवाणी ने भारतीय राजनीति को हिला कर रख दिया था। उन्होंने अयोध्या के लिए राम रथ यात्रा निकाली और इसके दौरान उन्हें गिरफ्तार किया गया था। इस घटना ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ा दिया और राम मंदिर के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उच्च स्थान पर ले आया।

लालकृष्ण आडवाणी का सबसे महत्वपूर्ण क्षण उनके नेतृत्व में हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस का था, जिसमें उन्हें अभियुक्त माना गया। इसके बाद उन्होंने नेतृत्व छोड़ा, लेकिन उनका पूर्वाधिकारिक योगदान राजनीति में अविस्मरणीय रहा।

आडवाणी जी का योगदान राजनीति में विभिन्न पदों पर सेवा करने के साथ-साथ, उनके नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी का विकास और स्थापना में भी है। उन्होंने गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री के रूप में भी कार्य किया और उनकी नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस सम्मान से सम्मानित होते हुए, आडवाणी जी ने भारतीय राजनीति में अपने सामर्थ्य और सेवा को साबित किया है और देशवासियों के बीच उनकी महत्वपूर्ण स्थान बनी रहेगी।

लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी की गहरी दोस्ती ने भारतीय राजनीति के इतिहास में एक अद्वितीय संबंध की नींव रखी है। इन दोनों नेताओं का मिलन ने नहीं सिर्फ भाजपा को संगठित करने में मदद की, बल्कि उन्होंने साझा विचारधारा और सामर्थ्य के साथ देश के नेतृत्व में एक साथ योगदान किया।

आडवाणी और वाजपेयी का रिश्ता गहरा और समर्पित था। इन्होंने साथ में अनेक राजनीतिक चुनौतियों का सामना किया और एक दूसरे के साथ मिलकर नेतृत्व में सफलता प्राप्त की। वाजपेयी जी की प्रधानमंत्री शैली और आडवाणी जी का नेतृत्व संबंध भाजपा को सशक्त बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के समय से लेकर, आडवाणी ने पार्टी के महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उन्होंने पार्टी के अध्यक्ष के रूप में सेवा की और उसकी नेतृत्व में भाजपा ने विभिन्न राजनीतिक चरणों में अपनी मुद्रा बनाई।

आडवाणी जी का हिन्दू धर्म के प्रति गहरा समर्पण रहा है। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन के दौरान भारतीय समाज को राम जन्मभूमि के मुद्दे में एक साथ आने के लिए प्रेरित किया। उनकी आध्यात्मिकता और हिन्दू धर्म के प्रति उनका समर्पण उन्हें भारतीय राजनीति में एक अद्वितीय व्यक्ति बनाता है।

लालकृष्ण आडवाणी ने अपने समर्थ नेतृत्व और समर्पण से भारतीय जनता पार्टी को सशक्त बनाए रखा है और उनका योगदान देश की राजनीतिक स्कीम में अद्वितीय है। उनकी भूमिका और उनका समर्थन आज भी देशवासियों के बीच में याद किया जाता है।

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