संपादकीय विशेष

मोरना/Muzaffarnagar: विकास से आज भी कोसो दूर खुशीपुरा गांव, कई मर्तबा शिकायत के बाद भी सड़क नहीं

मोरना।मुजफ्फरनगर।(Muzaffarnagar News) मोरना ब्लॉक का एक गांव विकास से कोसों दूर है सैकड़ो साल पुराने इस गांव में ना पानी की सही व्यवस्था है ना बिजली की ही व्यवस्था यही नहीं ग्रामीणों का आरोप है कि सैकड़ो साल पुराने इस गांव में आज तक भी सड़क नहीं बनी है गांव में वोट मांगने के लिए एमपी एमएलए तक आते हैं लेकिन कई मर्तबा शिकायत के बाद भी आज तक किसी ने सड़क नहीं बनवाई है

ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की गर्भवती महिलाएं,बीमार लोगों को भी काफी परेशानियो का सामना करना पड़ता है गांव में रेतीला रास्ता होने के कारण गांव में एम्बुलेंस भी नही आती है ग्रामीणों का आरोप है की बाढ़ ग्रस्त इलाके के सोनाली नदी किनारे भी बसा है अब ग्रामीणों ने मिडिया का सहारा लिया है ताकि यह शिकायत मुख्यमन्त्री तक पहुंच सके। दरअसल पूरा मामला जनपद मु० नगर के भोपा थाना क्षेत्र अंतर्गत ब्लाक मोरना क्षेत्र के गांव खुशीपुरा का है

जहां सैंकड़ों साल पुराना यह गांव विकास से कोसों दूर है और यहां विकास के दावों की सारी पोल खुल रही है खुशीपुरा गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है ग्रामीणों ने पंचायत कर मुख्य मार्ग के निर्माण, गांव में अस्पताल बनवाने की मांग सहित स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की मांग जिला प्रशासन सहित शासन से भी की है। बता दें मोरना ब्लॉक क्षेत्र के गांव सीकरी का मजरा खुशीपुरा जिला मुख्यालय से लगभग ३५ किलोमीटर दूर सोलानी नदी के किनारे पर आबाद है गांव में मैव कलन्दर जाति (मुस्लिम समाज) के लगभग १५० परिवार रहते हैं।

जो खेती बाड़ी तथा मजदूरी कर अपने परिवार की गुजर बसर करते हैं। गाँव के अधिकतर परिवार झोंपड़ियों में रहते हैं गांव के व्यक्ति बताते हैं कि उनका गाँव सैकड़ो वर्षों से एक स्थान पर आबाद है गांव का संपर्क मार्ग आज तक पक्का नहीं बन सका है सरकार द्वारा हर गांव को पक्की सड़क से जोड़ने का अभियान खुशीपुरा में आकर दम तोड़ देता है। ग्रामीण अभी भी कच्चे रास्ते से गुजरने को मजबूर है।

ग्रामीणों का आरोप है की गांव में कोई चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है स्वास्थ्य विभाग की ओर से आशाओं द्वारा बच्चों का टीकाकरण तो किया जाता है मगर यहाँ डॉक्टरों की टीम तक नही आती है वहीं सरकार की हर घर स्वच्छ पेयजल योजना भी गांव में आकर दम तोड़ती दिख रही है। स्वच्छ पेय जलापूर्ति के लिए टंकी की पाइपलाइन तो बिछा दी गयी है लेकिन उसमें आज तक पानी की एक बूंद भी नहीं आई है गांव में किसी भी व्यक्ति की कोई पेंशन आदि नही है यहीं नही कुछ लोगों को छोड़कर गांव में अधिकतर लोगों के राशन कार्ड तक नही बने है

जिनके बने है उन ग्रामीणों को सरकारी सस्ते गल्ले का राशन लेने के लिए दूसरे गांव में जाना पड़ता है। बरसात के मौसम में दूसरे गांव में राशन लेने जाना भी यहां आसान काम नहीं है रात में किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ जाने पर उसे किसी प्रकार टूटे मार्गो से १० किलोमीटर दूर मोरना लाया जाता है

ग्रामीणों ने गांव के मुख्य मार्ग को पक्का बनवाने तथा गांव में चिकित्सा सुविधा केंद्र व आंगनवाड़ी केन्द्र की स्थापना सहित गांव में ही राशन डीलर की दुकान खुलवाने व स्वच्छ पेयजल आपूर्ति की जिला प्रशासन सहित योगी सरकार से मांग की है ग्रामीणों का कहना है कि यहां एमपी एमएलए सहित प्रशासनिक अधिकारी आते तो जरूर है लेकिन कोरा आश्वासन देकर ही लौट जाते हैं।

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