Hezbollah का चेहरा बेनकाब: आतंकी गतिविधियों के लिए स्कूलों, मस्जिदों, और अन्य रिहायशी इलाकों का इस्तेमाल कर रहा
इजरायल के खिलाफ लगभग 300 रॉकेट और मिसाइलें दागने वाले Hezbollah की हकीकत दुनिया के सामने आ गई है। यह चरमपंथी संगठन लेबनान में अपनी आतंकी गतिविधियों के लिए स्कूलों, मस्जिदों, और अन्य रिहायशी इलाकों का इस्तेमाल कर रहा है। इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने दावा किया है कि हिजबुल्लाह द्वारा किए गए अधिकतर हमले रिहायशी क्षेत्रों से किए गए थे, जिससे यह साफ होता है कि यह संगठन निर्दोष नागरिकों को अपनी ढाल बना रहा है।
Hezbollah की रणनीति और इजरायल का जवाब
हिजबुल्लाह ने इजरायल के उत्तरी और मध्य क्षेत्रों पर कुल 230 रॉकेट-मिसाइल और 20 ड्रोन दागे थे। इन हमलों में सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि ये सभी हमले रिहायशी इलाकों जैसे मस्जिद, स्कूल, और संयुक्त राष्ट्र की साइट्स से किए गए थे। इजरायली सेना ने इन हमलों का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने हिजबुल्लाह के उन ठिकानों को निशाना बनाया, जहां से यह संगठन इजरायल पर हमले की तैयारी कर रहा था।
यह कोई नई बात नहीं है कि हिजबुल्लाह अपने आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देने के लिए आम नागरिकों को ढाल की तरह इस्तेमाल करता है। इस बार भी, इजरायल द्वारा जारी किए गए मैप्स और अन्य सबूतों के अनुसार, हिजबुल्लाह ने लगभग 90% रॉकेट रिहायशी इलाकों से दागे। हिजबुल्लाह का यह कदम उसकी कायरता का प्रतीक है, जिसमें वह मासूम लोगों की जान को खतरे में डालता है।
ईरान का समर्थन और Hezbollah की भूमिका
हिजबुल्लाह को सीधे तौर पर ईरान का समर्थन प्राप्त है। ईरान न केवल इसे हथियारों और आर्थिक सहायता प्रदान करता है, बल्कि इसे अपने चरमपंथी एजेंडे का हिस्सा भी बनाता है। हिजबुल्लाह को हमेशा से ईरान का समर्थन मिलता रहा है, और यह संगठन लेबनान के भीतर ईरान के हितों को आगे बढ़ाने का कार्य करता है।
इजरायल पर हिजबुल्लाह के हमलों का मकसद न केवल अपने व्यक्तिगत एजेंडे को पूरा करना है, बल्कि यह ईरान द्वारा इजरायल को अस्थिर करने की एक साजिश का हिस्सा भी है। हिजबुल्लाह की इस कायराना हरकत के पीछे का बड़ा उद्देश्य क्षेत्र में तनाव को बढ़ाना और युद्ध को लंबा खींचना है। हिजबुल्लाह ने यह हमला उस वक्त किया जब इजरायल और ईरान के बीच संबंधों में और भी तनाव बढ़ रहा था।
इजरायल-हमास युद्ध और हिजबुल्लाह की कुटिल चाल
इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध के बीच, हिजबुल्लाह ने एक नया मोर्चा खोलने की कोशिश की। हिजबुल्लाह का कहना है कि अगर गाजा में युद्धविराम होता है, तो वह भी अपनी जंग को रोक देगा। लेकिन, यह सिर्फ एक दिखावा है, क्योंकि हिजबुल्लाह का असली उद्देश्य मध्य पूर्व में इजरायल के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा चरमपंथियों को एकजुट करना है।
ईरान के समर्थन से ही हिजबुल्लाह, हमास, और अन्य चरमपंथी संगठन इजरायल के खिलाफ अपने हमले जारी रखे हुए हैं। यह सिर्फ लेबनान या गाजा तक सीमित नहीं है; ईरान सीरिया, इराक, और यमन में भी चरमपंथी समूहों का समर्थन करता है, जो कभी भी संघर्ष में शामिल हो सकते हैं। इस प्रकार, यह एक व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले सकता है, जहां इजरायल को कई मोर्चों पर लड़ना पड़ सकता है।
इस्लामी आतंकवाद का बढ़ता खतरा
हिजबुल्लाह के इस कृत्य को सिर्फ इजरायल के खिलाफ हमले के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि यह इस्लामी आतंकवाद का एक और उदाहरण है, जिसमें मासूम लोगों की जान को खतरे में डालकर अपने उद्देश्यों को पूरा किया जाता है।
इस्लामी आतंकवाद की जड़ें गहरी हैं और यह सिर्फ एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं है। हिजबुल्लाह, हमास, अल-कायदा, आईएसआईएस, और अन्य आतंकवादी संगठनों का मकसद अपने धार्मिक और राजनीतिक एजेंडों को आगे बढ़ाने के लिए आतंक फैलाना है।
Hezbollah का कायराना चेहरा
Hezbollahने हमेशा से ही कायराना हमले किए हैं, जिसमें आम नागरिकों को निशाना बनाया गया है। चाहे वह लेबनान में हो या इजरायल में, हिजबुल्लाह ने अपने हर हमले में यह साबित किया है कि वह आतंक और भय के माध्यम से अपनी सत्ता कायम करना चाहता है।
हिजबुल्लाह का यह चेहरा अब पूरी दुनिया के सामने आ चुका है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठनों को अब इस मामले में सख्त कदम उठाने की जरूरत है, ताकि हिजबुल्लाह जैसे आतंकवादी संगठन पर लगाम लगाई जा सके।
हिजबुल्लाह के इजरायल पर हमलों ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि इस्लामी आतंकवाद का खतरा अभी भी दुनिया के सामने मंडरा रहा है। ईरान के समर्थन से हिजबुल्लाह और अन्य चरमपंथी संगठनों का इजरायल के खिलाफ यह संघर्ष एक बड़े युद्ध की ओर इशारा करता है। अगर समय रहते इसे रोका नहीं गया, तो इसका परिणाम सिर्फ मध्य पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी हो सकता है।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को अब और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि ऐसे आतंकवादी संगठनों के खिलाफ एक मजबूत और एकजुट मोर्चा खड़ा किया जा सके।

