रामनगर: मनमाने तरीके से समस्याएं कागज पर निस्तारित
रामनगर ।ऑनलाइन आ रही शिकायतों का निस्तारण संबंधित विभाग घर बैठे कर रहे हैं, जिससे फरियादियों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। निस्तारण में फरियादी को एक प्रति देने की बात कही जाती है किंतु वह भी नही दी जाती।मनमाने तरीके से समस्याएं कागज पर निस्तारित की जा रही है।
सरकार द्वारा जब से आइजीआरएस व्यवस्था के तहत ऑनलाइन शिकायतों का पोर्टल शुरू किया था तो तमाम लोगों ने समझा था कि इसकी मानिटरिंग मुख्यमंत्री कार्यालय से हो रही है और आईजीआरएस करने से उनकी समस्या का समाधान होगा।
आईजीआरएस की शिकायतों को निस्तारित करते समय जिनको जांच मिलती है वे मौके पर भी आना मुनासिब नहीं समझते और कार्यालय में ही बैठ कर इधर-उधर के गवाह लेकर समस्या को निस्तारित कर देते हैं
फर्जी लगती हैं निस्तारण रिपोर्ट: ऐसा नहीं है कि वह समस्या के निस्तारण में सही रिपोर्ट लगाते हैं बल्कि उल्टी-सीधी रिपोर्ट लगाकर भेज देते हैं ताकि उन्हें काम न करना पड़े।
कुल मिलाकर सरकार की यह महत्वपूर्ण योजना जनता को लाभ देती नजर नहीं आ रही है जबकि मुख्यमंत्री द्वारा बार-बार कहा जाता है कि आईजीआरएस पोर्टल पर दी गई समस्याओं के समाधान की सम्यक व सही व्यवस्था की जाए। अब चाहे पुलिस विभाग हो या विकास विभाग, समाज कल्याण हो या राजस्व।
सभी विभागों की समस्यों में घर बैठे फर्जी रिपोर्ट लगा दी जाती है। शिकायतकर्ता के यहां जाकर उसकी समस्या को नहीं देखा जाता है और न ही उसे बताया जाता है कि तुम्हारे दिए गए प्रार्थना पत्र पर जांच हो रही है ।अगर स्थल पर जाकर जांच की जाए तो वस्तु स्थिति से जांचकर्ता अवगत हो सकते हैं और समस्या निस्तारित भी हो सकती
लेकिन मौके ओर जाना मुनासिब नहीं समझते। इसे बोझ समझकर उल्टा सीधा निस्तारित कर देते हैं। अगर कोई तहसील दिवस में प्रार्थना पत्र देता है और अपनी बात अधिकारियों से कहता है तो उसमें जमीनी विवाद के निस्तारण के लिए टीम बनाकर भेजी जाती जिसमें लोग मौके पर जाते हैं लेकिन जो अन्य निस्तारण के लिए प्रार्थना पत्र आते हैं उन्हें घर बैठे निस्तारित कर दिया जाता है।
कुल मिलाकर समस्याओं के निस्तारण के लिए लोगों के पास कहीं भी कोई ठिकाना मुनासिब नहीं रह गया है। ऐसे में जनता अब फरियाद करते समय असमंजस में रहती है कि उसकी समस्या का समाधान होगा कि नहीं।

