उत्तर प्रदेश

गैंगरेप के आरोपी को अखिलेश यादव का संरक्षण प्राप्त है- Keshav Prasad Maurya

मुजफ्फरनगर, शुकतीर्थ – मीरापुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो चुकी है। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya ने शुकतीर्थ की पंजाबी धर्मशाला में आयोजित एक युवा सम्मेलन और ग्राम चौपाल में जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने मीरापुर उपचुनाव को भाजपा के लिए “मान और सम्मान से जुड़ी” लड़ाई बताया।

भाजपा का मीरापुर पर विशेष फोकस:

कार्यक्रम में Keshav Prasad Maurya ने जोर देकर कहा कि मीरापुर उपचुनाव भाजपा के लिए केवल एक चुनाव नहीं है, बल्कि पार्टी के स्वाभिमान से जुड़ा मसला है। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे पूरी एकजुटता के साथ चुनावी तैयारियों में जुट जाएं और हर बूथ पर मजबूती से काम करें। मौर्य का यह बयान इस बात की तस्दीक करता है कि भाजपा मीरापुर उपचुनाव को एक महत्वपूर्ण अवसर मानकर इसे प्रतिष्ठा का सवाल बना चुकी है।

Keshav Prasad Maurya ने आगे कहा, “आप सभी ने देखा है कि उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा की सरकारों ने किस तरह से भ्रष्टाचार और कुशासन को बढ़ावा दिया। लेकिन 2019 में आपने हमें सेवा करने का मौका दिया और 2024 में मोदी सरकार फिर से सत्ता में आई। इसके लिए हम आपका धन्यवाद करते हैं।”

गठबंधन की मजबूती और जीत की उम्मीद:

भाजपा और रालोद के गठबंधन के महत्व को रेखांकित करते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि गठबंधन की ताकत मीरापुर उपचुनाव में भी अपना जलवा दिखाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता बूथ स्तर पर अपनी तैयारियों में जुटे हुए हैं और इस बार की जीत पहले से भी अधिक निर्णायक होगी। मौर्य ने दावा किया कि मीरापुर उपचुनाव में उनकी पार्टी की जीत निश्चित है।

मंच से कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने भी भाजपा सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा, “इस सरकार ने समाज के हर वर्ग को उचित सम्मान दिया है। छोटे से छोटे समाज को भी अपनी बात रखने का अधिकार मिला है। मीरापुर उपचुनाव में हमे निश्चित रूप से जीत मिलेगी।”

डिप्टी सीएम का कड़ा संदेश: सपा और बसपा को निशाने पर

अपने भाषण में केशव प्रसाद मौर्य ने समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सपा और बसपा की राजनीति ने जनता को गुमराह करने का काम किया है, लेकिन अब लोग जागरूक हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा गैंगरेप के आरोपियों को समर्थन दे रही है और अखिलेश यादव उन अपराधियों को संरक्षण प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने इस मामले को लेकर न्यायपालिका पर पूरा भरोसा जताया और कहा कि इस प्रकरण की जांच चल रही है।

उपचुनाव और गठबंधन के समीकरण:

उपचुनावों में भाजपा के प्रदर्शन पर मौर्य ने कहा कि भाजपा और रालोद गठबंधन पूरी ताकत से चुनावी मैदान में उतरेगा। गठबंधन को लेकर पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल पर मौर्य ने कहा, “यह फैसला हाईकमान का है कि कौन सी सीट पर कौन लड़ेगा, लेकिन हमारा मुख्य उद्देश्य 10 में से सभी सीटों पर जीत दर्ज करना है।”

मीरापुर उपचुनाव की चुनौती:

मीरापुर सीट भाजपा के लिए हमेशा से एक चुनौती रही है, जहां गठबंधन की राजनीति ने कई बार समीकरण बदले हैं। सपा-बसपा की संयुक्त राजनीति भी इस चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि भाजपा के लिए इस बार मीरापुर उपचुनाव, 2024 के लोकसभा चुनावों की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है। भाजपा के बड़े नेता और कार्यकर्ता मीरापुर की जमीनी राजनीति को पकड़ने के लिए पूरी तैयारी कर रहे हैं, ताकि इस सीट पर एक निर्णायक जीत हासिल हो सके।

भाजपा की चुनावी रणनीति:

उपचुनावों के लिए भाजपा की रणनीति पहले से ही काफी स्पष्ट है। पार्टी ने बूथ स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की टीम को मजबूत किया है। साथ ही, मीरापुर के ग्रामीण इलाकों में जनसंपर्क बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार, कपिलदेव अग्रवाल, और पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने अपने-अपने भाषणों में मीरापुर चुनाव के लिए पार्टी की तैयारियों का जिक्र किया और कार्यकर्ताओं को सक्रिय रूप से भाग लेने का आह्वान किया।

भाजपा की सामाजिक समीकरण पर पकड़

उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक समीकरण हमेशा महत्वपूर्ण रहे हैं। भाजपा ने इस बार भी विभिन्न जातीय और सामाजिक वर्गों को साधने की कोशिश की है। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान ने कार्यक्रम में बताया कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में सड़कों का चौड़ीकरण और विकास कार्य बड़े पैमाने पर हुआ है, जिसमें से अधिकांश कार्य केशव प्रसाद मौर्य के कार्यकाल में पूरे किए गए हैं। इस तरह के विकास कार्यों के जरिए भाजपा मीरापुर में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।

मीरापुर में विकास बनाम जातिवाद की राजनीति

मीरापुर में जातिवादी राजनीति का भी एक महत्वपूर्ण पक्ष है। सपा-बसपा जैसे दल जाति आधारित राजनीति पर ज्यादा ध्यान देते रहे हैं, जबकि भाजपा विकास के एजेंडे के जरिए लोगों को अपनी ओर खींचने की कोशिश कर रही है। मौर्य ने सपा-बसपा के जातिवादी एजेंडे को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी समाज के सभी वर्गों का विकास चाहती है और इसी नीति पर काम कर रही है।

भविष्य की रणनीति और चुनाव का महत्व

मीरापुर उपचुनाव सिर्फ एक सीट का चुनाव नहीं है, बल्कि यह 2024 के लोकसभा चुनावों के पहले का संकेत भी हो सकता है। भाजपा ने इस उपचुनाव को एक चुनौती के रूप में लिया है, और मौर्य की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि पार्टी इस चुनाव को किसी भी हालत में नहीं गंवाना चाहती।

कार्यक्रम के अंत में, मौर्य ने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर पर मजबूती से काम करने की अपील की और कहा कि चुनाव की जीत पूरी तरह से कार्यकर्ताओं की एकजुटता और मेहनत पर निर्भर करेगी।

मीरापुर उपचुनाव भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। इसे केवल एक उपचुनाव की तरह नहीं देखा जा रहा, बल्कि 2024 के लिए पार्टी की तैयारियों का अहम हिस्सा माना जा रहा है। भाजपा ने इस चुनाव को अपने मान-सम्मान से जोड़ लिया है, और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की उपस्थिति और रणनीति इस बात की गवाही देती है कि वे इसे किसी भी हालत में हारना नहीं चाहते।

केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सपा ने लोगो को गुमराह कर वोट हासिल की हैं। उन्होने कटाक्ष किया कि सपा गैंगरेप के आरोपी का साथ दे रही है। आरोपी को अखिलेश यादव का संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने कहा कि इस मामले में जांच चल रही है तथा यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। पत्रकार द्वारा पूछे गये सवाल में उत्तर प्रदेश मे होने वाले उपचुनाव मे भाजपा को 10 मे से कितनी सीटों पर चुनाव लडने का मौका मिलेगा। इसका जवाब देते हुए श्री मोर्य ने कहा कि यह गठबंधन का मामला है। टिकट वितरण को लेकर क्या स्थिती रहेगी।

यह हाईकमान का निर्णय रहेगा। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य उपचुनाव मे सभी 10 सीटों पर जीत हासिल करना हमारा लक्ष्य है। यति नरिंसंह महराज के बयान से बुलन्दशहर एवं गाजियाबाद मे हो रहे हंगामे पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होने कहा कि उनकी जानकारी मे ऐसी कोई वीडियो नही आई है। अतः उन्हे इस प्रकरण की कोई जानकारी नही है।

इस दौरान कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिलदेव अग्रवाल, पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, पूर्व सांसद राजपाल सैनी, पूर्व मंत्री योगराज सिंह, एमएलसी वंदना वर्मा, प्रदीप सैनी, राजीव सिसौदिया, श्रीमोहन तायल, डा. पुरूषोत्तम, अमित राठी, रालोद अध्यक्ष संदीप मलिक, शरद शर्मा, अचिन्त मित्तल मौजूद रहे।

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