उत्तर प्रदेश

Etawah: डाकघरों में करोड़ों की धोखाधड़ी! दो उप डाकपालों ने हड़पे 28 खाताधारकों के आठ लाख रुपये

Etawah (उत्तर प्रदेश): डाक विभाग में एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने जनता के सरकारी संस्थानों पर भरोसे को हिला कर रख दिया है। भरथना और सैफई क्षेत्र के डाकघरों में कार्यरत दो उप डाकपालों ने 28 खाताधारकों से जुड़ी नकदी का गबन कर लगभग आठ लाख रुपये हड़प लिए। इस गंभीर मामले में जांच के बाद दोनों आरोपियों को निलंबित कर दिया गया है, और पुलिस उनकी तलाश में जुट गई है।

शिकायत के बाद खुलासा

भरथना उपमंडल के डाक निरीक्षक परवेज अहमद ने मामले की जांच के बाद सैफई थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि भरथना शाखा के डाकपाल शैलेंद्र कुमार और सैफई क्षेत्र के परासना डाकघर के कार्यवाहक डाकपाल बृज किशोर पर खाताधारकों से धोखाधड़ी करने का आरोप है।

शैलेंद्र कुमार का खेल: शैलेंद्र कुमार, जो महावीर नगर, थाना भरथना का निवासी है, ने 12 खाताधारकों से लगभग साढ़े चार लाख रुपये की नकदी जमा करने का वादा किया। खाताधारकों को विश्वास में लेने के लिए उसने पासबुक पर जमा की पुष्टि की मुहरें लगाईं। हालांकि, यह रकम सरकारी खाते में जमा नहीं की गई।

बृज किशोर की धोखाधड़ी: दूसरी ओर, बृज किशोर ने परासना डाकघर में 16 खातों से लगभग साढ़े तीन लाख रुपये जमा करने के बजाय उन्हें गबन कर लिया।

जांच में निकले दोषी, दोनों फरार

जांच में दोषी पाए जाने पर दोनों को तत्काल निलंबित कर दिया गया। इसके बाद से ही दोनों आरोपी फरार हैं। पुलिस ने दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है और उनकी तलाश के लिए अभियान तेज कर दिया है।

कैसे हुआ घोटाला?

जांच से पता चला है कि दोनों डाकपाल फर्जी दस्तावेजों और डाक विभाग की मुहरों का दुरुपयोग कर खाताधारकों से पैसे लेकर उन्हें जमा करने का झूठा आश्वासन देते थे।

  1. खाताधारकों से नकदी प्राप्त करने के बाद पासबुक पर सरकारी मुहर लगा दी जाती थी।
  2. खातों में यह नकदी जमा करने के बजाय खुद के इस्तेमाल के लिए रख ली जाती थी।
  3. जब खाताधारकों ने अपने बैलेंस की जांच की, तो गड़बड़ी का खुलासा हुआ।

पुलिस जांच और कार्रवाई

सैफई थाने के प्रभारी निरीक्षक राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि डाक निरीक्षक परवेज अहमद की शिकायत पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब दोनों आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

डाक विभाग पर उठे सवाल

इस मामले ने डाक विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण इलाकों में डाकघर बैंकिंग का मुख्य माध्यम होते हैं, और ऐसे घोटालों से लोगों का विश्वास टूटता है।

  1. भरोसे की कमी: खाताधारकों का कहना है कि उन्होंने सरकारी संस्थानों पर भरोसा करके अपनी मेहनत की कमाई डाकघरों में जमा की थी।
  2. सख्त निगरानी की जरूरत: विशेषज्ञों का मानना है कि डाक विभाग में नियमित और सख्त ऑडिट होना चाहिए।

डाक विभाग के लिए सीख

इस घटना के बाद डाक विभाग ने शाखा कार्यालयों में निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया है। खाताधारकों को भी सतर्क रहने और अपने खातों की नियमित जांच करने की सलाह दी जा रही है।

ऐसे घोटाले पहले भी हुए हैं

इटावा का यह मामला कोई पहली बार नहीं है। डाक विभाग में धोखाधड़ी की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं।

  1. कानपुर मामला: पिछले साल, कानपुर में एक डाकपाल ने 50 खाताधारकों से 20 लाख रुपये गबन किए थे।
  2. प्रयागराज धोखाधड़ी: तीन साल पहले, प्रयागराज के एक डाकघर में 10 लाख रुपये का फर्जीवाड़ा सामने आया था।

जनता को सतर्कता बरतने की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि खाताधारकों को निम्नलिखित उपाय अपनाने चाहिए:

  • अपनी पासबुक का नियमित अद्यतन करवाएं।
  • ऑनलाइन बैलेंस जांचें।
  • किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत शिकायत करें।

समाप्ति नहीं, नई शुरुआत

इटावा का यह मामला प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि ऐसे घोटालों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएं। जनता को जागरूक करना और सिस्टम में पारदर्शिता लाना आज की प्राथमिकता होनी चाहिए।

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