Western UP में ऑनलाइन दवा व्यापार के खिलाफ कैमिस्टों का बड़ा विरोध, काली पट्टी बांधकर खोली दुकानें
Western UP के कई जिलों में दवा व्यापारियों ने ऑनलाइन दवा व्यापार के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। ऑर्गेनाइजिंग कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन (रजि.) उत्तर प्रदेश के आह्वान पर मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, मेरठ, हापुड़, बिजनौर, गाजियाबाद, हाथरस, रामपुर समेत कई जिलों में दवा बाजार पूरी तरह खुले रहे, लेकिन व्यापारियों ने काली पट्टी बांधकर ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया।
दवा व्यापारियों ने कहा कि उनका विरोध जनहित और दवा व्यवसाय की सुरक्षा को लेकर है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसलिए मेडिकल स्टोर बंद नहीं किए गए।
काली पट्टी बांधकर जताया विरोध, दुकानों पर दिखी एकजुटता
मुजफ्फरनगर में जिला परिषद मार्केट, अग्रवाल मार्केट और जिले के अन्य थोक एवं खुदरा दवा व्यापारियों ने एकजुट होकर काली पट्टी बांधी और ऑनलाइन दवा व्यापार का विरोध किया।
मेडिकल स्टोर संचालकों का कहना था कि ऑनलाइन दवा बिक्री से न केवल छोटे व्यापारियों का रोजगार प्रभावित हो रहा है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
दुकानों पर सुबह से ही व्यापारियों ने काली पट्टी बांधकर ग्राहकों को दवाइयां दीं और सरकार तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश की।
‘जनहित को ध्यान में रखते हुए दुकानें खुली रखीं’
दवा व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य आम जनता को परेशानी पहुंचाना नहीं है। इसी वजह से सभी मेडिकल स्टोर खुले रखे गए ताकि मरीजों को दवाइयों के लिए इधर-उधर न भटकना पड़े।
व्यापारियों का कहना है कि यदि दवा बाजार बंद किया जाता तो बीमार लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता था। इसलिए उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराने का रास्ता चुना।
ऑनलाइन दवा व्यापार को लेकर क्या हैं व्यापारियों की चिंताएं
दवा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री के बढ़ते चलन से कई गंभीर समस्याएं सामने आ सकती हैं। उनका आरोप है कि कई बार बिना उचित चिकित्सकीय परामर्श और सत्यापन के दवाइयां बेची जाती हैं, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है।
व्यापारियों का मानना है कि मेडिकल स्टोर पर फार्मासिस्ट मरीजों को दवा के इस्तेमाल, डोज और सावधानियों की जानकारी देते हैं, जबकि ऑनलाइन खरीदारी में यह सुविधा सीमित हो जाती है।
इसके अलावा छोटे और मध्यम स्तर के दवा व्यापारियों को भी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
पश्चिमी यूपी के कई जिलों में दिखा विरोध का असर
मुजफ्फरनगर के अलावा शामली, मेरठ, सहारनपुर, हापुड़, बिजनौर, गाजियाबाद, हाथरस और रामपुर समेत अन्य जिलों में भी दवा व्यापारियों ने काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन किया।
कई स्थानों पर व्यापार मंडल और कैमिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। व्यापारियों ने कहा कि अगर ऑनलाइन दवा व्यापार को नियंत्रित नहीं किया गया तो भविष्य में उनका आंदोलन और बड़ा हो सकता है।
दवा व्यापारियों ने सरकार से की सख्त नियम बनाने की मांग
प्रदर्शन कर रहे कैमिस्टों ने सरकार से ऑनलाइन दवा व्यापार के लिए सख्त नियम लागू करने की मांग की। उनका कहना है कि दवाइयों की बिक्री सामान्य व्यापार नहीं बल्कि स्वास्थ्य से जुड़ा संवेदनशील विषय है।
व्यापारियों ने कहा कि बिना नियंत्रण के ऑनलाइन दवा व्यापार से नकली दवाइयों, गलत दवाओं और दुरुपयोग की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि दवा बिक्री में पारदर्शिता और मरीज सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण पहलू होने चाहिए।
मेडिकल सेक्टर में तेजी से बढ़ रहा डिजिटल बदलाव
हाल के वर्षों में ऑनलाइन फार्मेसी और डिजिटल हेल्थ प्लेटफॉर्म तेजी से बढ़े हैं। लोग घर बैठे दवाइयां मंगाने लगे हैं, जिससे ऑनलाइन दवा कंपनियों का कारोबार लगातार बढ़ रहा है।
हालांकि पारंपरिक दवा व्यापारी इसे अपने व्यवसाय और स्थानीय रोजगार के लिए चुनौती मान रहे हैं। उनका कहना है कि छोटे मेडिकल स्टोर समाज में स्वास्थ्य सेवाओं की पहली कड़ी होते हैं।
विशेषज्ञ बोले- संतुलन जरूरी
स्वास्थ्य और व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल सुविधा और मरीज सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना बेहद जरूरी है। जहां ऑनलाइन सेवाएं लोगों को सुविधा देती हैं, वहीं दवाओं के गलत इस्तेमाल का खतरा भी बना रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार सरकार को ऐसा नियामक ढांचा तैयार करना चाहिए जिससे मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो और छोटे व्यापारियों के हितों की भी रक्षा हो सके।
मुजफ्फरनगर में कैमिस्ट एसोसिएशन की एकजुटता बनी चर्चा का विषय
मुजफ्फरनगर कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन की अगुवाई में जिलेभर के थोक और खुदरा दवा व्यापारियों ने जिस तरह एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया, वह पूरे व्यापारिक जगत में चर्चा का विषय बना रहा।
व्यापारियों ने कहा कि यह केवल व्यवसाय का मुद्दा नहीं बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था और स्थानीय रोजगार से जुड़ा मामला भी है।

