संसद में लेडी किलर विवाद: Jyotiraditya Scindia और कल्याण बनर्जी के बीच तीखी बहस, महिलाओं ने उठाई कार्रवाई की मांग
नई दिल्ली: संसद का शीतकालीन सत्र हमेशा से चर्चाओं और बहसों का केंद्र रहा है, लेकिन इस बार लोकसभा में टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी और केंद्रीय मंत्री Jyotiraditya Scindia के बीच हुई तीखी बहस ने राजनीतिक पारा और भी बढ़ा दिया है। बुधवार को लोकसभा में हुए इस विवाद के बाद पूरे देश में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
क्या था पूरा मामला?
बुधवार को लोकसभा की कार्यवाही के दौरान टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर तीखा कटाक्ष करते हुए उन्हें “लेडी किलर” कह दिया। इस टिप्पणी के बाद सदन में हंगामा खड़ा हो गया। बीजेपी सांसदों ने इसे न केवल सिंधिया बल्कि देश की महिलाओं का भी अपमान बताया।
टीएमसी सांसद ने बाद में इस विवादित टिप्पणी के लिए निजी तौर पर माफी मांगी, लेकिन Jyotiraditya Scindia ने इसे खारिज कर दिया। सिंधिया ने इसे महिलाओं का अपमान करार दिया और इस पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “यह माफी स्वीकार करने योग्य नहीं है। ऐसी टिप्पणियां व्यक्तिगत ही नहीं, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी आपत्तिजनक हैं।”
महिला सांसदों ने किया विरोध
टीएमसी सांसद की इस टिप्पणी को लेकर बीजेपी की महिला सांसद भी विरोध में उतर आईं। उन्होंने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात की और इस बयान पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। महिला सांसदों ने कहा कि इस तरह के बयान न केवल असंसदीय हैं, बल्कि समाज में महिलाओं की गरिमा को भी ठेस पहुंचाते हैं।
महिला सांसदों की इस बैठक के बाद रिजिजू ने आश्वासन दिया कि मामले को गंभीरता से लिया जाएगा और इस मुद्दे पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
बनर्जी की सफाई
विवाद बढ़ता देख कल्याण बनर्जी ने अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनका इरादा किसी को भी दुख पहुंचाने का नहीं था। उन्होंने कहा, “मेरी टिप्पणी का मकसद केवल मजाकिया था, लेकिन अगर इससे किसी को ठेस पहुंची है तो मैं इसके लिए माफी मांगता हूं।” हालांकि, उनकी इस सफाई को न तो ज्योतिरादित्य सिंधिया ने और न ही बीजेपी सांसदों ने स्वीकार किया।
सदन में हंगामे के बाद कार्यवाही स्थगित
कल्याण बनर्जी की टिप्पणी और इसके बाद हुए विरोध के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई। बीजेपी सांसदों ने इस मामले में कल्याण बनर्जी को मौजूदा सत्र के शेष भाग के लिए निलंबित करने की मांग की। सदन में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के कारण कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी।
विवाद का राजनीतिक असर
इस घटना ने केवल संसद तक ही सीमित विवाद नहीं पैदा किया, बल्कि सड़कों पर भी राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई। बीजेपी ने टीएमसी पर महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। वहीं, टीएमसी ने इसे मुद्दा बनाकर भाजपा पर पलटवार किया। पार्टी ने कहा कि बीजेपी असल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए इस विवाद को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रही है।
सोशल मीडिया पर गूंज
इस घटना की गूंज सोशल मीडिया पर भी सुनाई दी। जहां एक ओर बीजेपी समर्थकों ने कल्याण बनर्जी के बयान की आलोचना की, वहीं दूसरी ओर टीएमसी समर्थकों ने इसे राजनीतिक रणनीति करार दिया। ट्विटर पर #LadyKillerComment और #ParliamentClash जैसे हैशटैग ट्रेंड करते रहे। कई महिलाओं ने भी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए इस पर कार्रवाई की मांग की।
महिलाओं के अधिकार और संसद की गरिमा
इस घटना ने संसद में महिलाओं के अधिकार और गरिमा के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि संसद जैसे पवित्र स्थल पर इस तरह की टिप्पणियां अस्वीकार्य हैं। यह न केवल व्यक्तिगत हमला है, बल्कि यह संकेत देता है कि महिलाओं के प्रति समाज में किस तरह की मानसिकता मौजूद है।
आगे की राह
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि बीजेपी और टीएमसी इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं। क्या संसद में कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे? क्या कल्याण बनर्जी पर कोई कार्रवाई होगी? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिलेंगे।
यह घटना न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दिखाती है कि संसद में बहस के दौरान भाषा और मर्यादा का कितना महत्व है। इस विवाद ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता को लेकर अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

