BHU में एक साल के बच्चे की जटिल सर्जरी, ट्यूमर हृदय और फेफड़े से सटा हुआ था
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के आईएमएस में पीडियाट्रिक सर्जरी डिपार्टमेंट के डॉक्टर्स ने चिकित्सा जगत को एक नया संदेश दिया है। एक साल के छोटे से बच्चे के शरीर से डॉक्टरों की टीम ने करीब 10.9 सेंटीमीटर का विशाल ट्यूमर निकाला, जो बच्चे के हृदय से सटा हुआ था। यह सर्जरी न केवल जटिल थी, बल्कि चिकित्सा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर भी साबित हुई है।
13 दिसंबर को, प्रो. एसपी शर्मा के नेतृत्व में बाल सर्जकों और विशेषज्ञों की एक कुशल टीम ने वीडियो असिस्टेड थोरैकोस्कोपिक सर्जरी (VATS) का इस्तेमाल करते हुए इस ट्यूमर को निकाला। ऑपरेशन करीब दो घंटे तक चला, और इस दौरान सर्जरी की प्रक्रिया पूरी तरह से नियंत्रित रही। बच्चा ऑपरेशन के बाद तीन घंटे तक वेंटिलेटर पर था, लेकिन डॉक्टरों की टीम की कड़ी मेहनत और विशेषज्ञता ने उसे नई जिंदगी दी। इस प्रक्रिया में सर्जरी से जुड़ी हर छोटी-बड़ी चुनौती का सामना करते हुए चिकित्सा जगत को एक बार फिर यह साबित कर दिया कि भारत में चिकित्सा क्षेत्र अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उत्कृष्टता की मिसाल प्रस्तुत कर रहा है।
बच्चे का स्वास्थ्य संकट और इलाज की दिशा
यह घटना न केवल चिकित्सा क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हुई, बल्कि यह बच्चे के माता-पिता के लिए भी एक कठिन समय था। प्रयागराज से भेजे गए इस बच्चे के बारे में डॉ. सरिता चौधरी ने कहा कि इस उम्र में ट्यूमर होना अत्यंत दुर्लभ है। आमतौर पर बच्चों में ऐसे जटिल मेडिकल कंडीशन्स कम ही देखने को मिलती हैं। बच्चे के इलाज के लिए चिकित्सा विशेषज्ञों की एक पूरी टीम बनाई गई थी, जिसमें बाल सर्जरी, बाल रोग विशेषज्ञ, और एनेस्थेटिक विशेषज्ञ शामिल थे।
सर्जरी के दौरान, बच्चे का ट्यूमर दिल से सटा हुआ था और बायां फेफड़ा ढह चुका था। ऐसी स्थिति में, वीडियो असिस्टेड थोरैकोस्कोपिक सर्जरी (VATS) जैसे अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया, जिसमें शरीर में केवल छोटी सी छेद की जरूरत होती है। इस प्रक्रिया से सर्जरी को अधिक सटीकता और कुशलता के साथ किया गया। डॉक्टरों ने सर्जरी को पूरी तरह से नियंत्रित किया और बच्चे की जीवन रक्षा में सफलता प्राप्त की।
बीएचयू का बाल चिकित्सा विभाग और उसकी सफलता
यह सर्जरी बीएचयू के बाल चिकित्सा सर्जरी ओटी में की गई, जहां इस तरह की जटिल ऑपरेशनों के लिए अत्याधुनिक उपकरण और तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। पीडियाट्रिक सर्जन प्रो. एसपी शर्मा और उनकी टीम ने दिखा दिया कि कैसे उच्च तकनीकी उपकरण और कौशल का मिलाजुला उपयोग गंभीर स्थितियों में जीवन बचा सकता है। इस सर्जरी को सफल बनाने में प्रो. सरिता चौधरी, डॉ. कनिका शर्मा (एसोसिएट प्रोफेसर), डॉ. अजीत, डॉ. भानुमूर्ति, और एनेस्थेटिक टीम का भी योगदान रहा। एनेस्थेटिक टीम में प्रोफेसर आरबी सिंह, डॉ. अमृता, डॉ. स्टेफी, और डॉ. बबली ने अहम भूमिका निभाई।
सर्जिकल टीम की कड़ी मेहनत और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियां
बच्चे की सर्जरी, जो कि एक प्रकार के मीडियास्टिनल ट्यूमर से संबंधित थी, ने डॉक्टरों के सामने कई तरह की चुनौती रखी। मीडियास्टिनल ट्यूमर, जो हृदय और अन्य अंगों के पास पाया जाता है, अत्यंत दुर्लभ होते हैं। इस तरह के ऑपरेशन में हर कदम पर सावधानी और सटीकता की जरूरत होती है। ट्यूमर को सुरक्षित तरीके से निकालना और बच्चे की जीवन रेखा को बनाए रखना, दोनों ही काफी चुनौतीपूर्ण थे।
इस जटिल ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने वीडियो असिस्टेड थोरैकोस्कोपिक सर्जरी (VATS) का उपयोग किया, जो कि एक प्रकार की लेप्रोस्कोपिक सर्जरी है। यह तकनीक सर्जरी के दौरान शरीर में कम से कम कटौती करती है और ऑपरेशन के बाद जल्दी रिकवरी होती है। इस प्रक्रिया में, एक छोटा कैमरा और अत्याधुनिक उपकरण शरीर के अंदर डाले जाते हैं, जो डॉक्टरों को सर्जरी के दौरान सटीक दृष्टिकोण प्रदान करते हैं।
मेडिकल क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान
यह सफलता न केवल बीएचयू के मेडिकल स्कूल के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे देश में चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक प्रेरणा भी है। भारत में चिकित्सा सेवा का स्तर लगातार बढ़ रहा है, और इस तरह के ऑपरेशन यह साबित करते हैं कि देश में अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और विशेषज्ञता मौजूद हैं। ऐसे ऑपरेशनों से यह भी सिद्ध होता है कि भारत अब मेडिकल टूरिज़्म के क्षेत्र में भी एक अग्रणी भूमिका निभा सकता है।
साथ ही, इस ऑपरेशन ने यह भी साबित किया कि भारत के चिकित्सक न केवल विदेशों में, बल्कि देश के अंदर भी अपनी विशेषज्ञता का लोहा मनवा रहे हैं। इस सफलता के बाद, बीएचयू और अन्य चिकित्सा संस्थान अब और अधिक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं, और चिकित्सा के क्षेत्र में और अधिक सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं।
भविष्य की दिशा
भारत में अब तक कई मुश्किल और जटिल ऑपरेशनों की सफलता का उदाहरण पेश किया जा चुका है, लेकिन यह घटना चिकित्सा क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ने वाली साबित हुई। इस ऑपरेशन से यह स्पष्ट होता है कि आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का इस्तेमाल बच्चों के इलाज में भी किया जा सकता है। आगे चलकर, ऐसी और अधिक सर्जरी के द्वारा बच्चों को जीवन दान देने में मदद मिल सकती है। साथ ही, इस तरह की सफलता से चिकित्सक और चिकित्सा क्षेत्र में और भी वृद्धि की संभावना बनती है।

