India-China रिश्तों में बहार: कैलाश मानसरोवर यात्रा बहाल, सीधी उड़ानें फिर शुरू
India-China के बीच लंबे समय से खिंची तल्खी अब नए रिश्तों की कहानी लिख रही है। विवादों और तनाव के दौर से गुजरने के बाद दोनों देश अब सहयोग और संवाद की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। हालिया घटनाक्रम में, कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली और सीधी उड़ानों का फिर से शुरू होना इस बदलाव का बड़ा संकेत है।
पांच साल बाद फिर से खुले कैलाश मानसरोवर के द्वार
2020 के बाद से ठप पड़ी कैलाश मानसरोवर यात्रा पांच साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार फिर से शुरू होने जा रही है। 2020 में गलवान घाटी और पैंगोंग त्सो झील पर हुए विवादों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में खटास बढ़ गई थी। इस तनाव ने न केवल कूटनीतिक संबंधों को झटका दिया, बल्कि कैलाश मानसरोवर यात्रा और भारत-चीन सीधी उड़ानें भी बंद हो गई थीं।
लेकिन अब, दोनों देशों ने पुरानी कड़वाहट भुलाकर आगे बढ़ने का फैसला किया है। इस साल की गर्मियों में भारतीय श्रद्धालु एक बार फिर कैलाश मानसरोवर की यात्रा कर सकेंगे।
कैसे पिघली रिश्तों पर जमी बर्फ?
भारत और चीन के बीच रिश्तों में सुधार का श्रेय संवाद और उच्चस्तरीय मुलाकातों को जाता है। रूस के कजान शहर में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन ने दोनों देशों के बीच नए संबंधों की नींव रखी।
- पिछले साल अक्टूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ने इस नई दिशा की शुरुआत की। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने सीमा पर शांति बहाल करने, कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने और सीधी उड़ानों की बहाली पर सहमति जताई।
- इसके बाद, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद का सिलसिला तेज हो गया। विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी की बैठकों ने इस प्रक्रिया को और मजबूती दी।
- भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी हाल ही में बीजिंग का दौरा किया, जहां उन्होंने सीमा विवाद सुलझाने और रिश्तों को सुधारने पर चर्चा की।
चीन क्यों मान गया कैलाश मानसरोवर यात्रा पर?
चीन का कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने पर सहमत होना केवल धार्मिक पहलू नहीं, बल्कि कूटनीतिक सफलता भी है। भारत की तरफ से लगातार बातचीत और भरोसे का माहौल बनाने की कोशिशों ने चीन को इस फैसले पर सहमति देने के लिए प्रेरित किया।
चीन की यह सहमति इस बात का संकेत है कि वह भी संबंधों को बेहतर बनाने के लिए तैयार है। चीन को यह समझ आ गया है कि भारत के साथ सकारात्मक रिश्ते न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए जरूरी हैं, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी फायदेमंद हैं।
सीधी उड़ानों का भी रास्ता साफ
कैलाश मानसरोवर यात्रा के साथ-साथ भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें भी फिर से शुरू होने जा रही हैं। 2020 में इन उड़ानों को बंद कर दिया गया था, लेकिन अब दोनों देश व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए तैयार हैं। सीधी उड़ानों के शुरू होने से न केवल यात्रियों को सुविधा होगी, बल्कि दोनों देशों के बीच संपर्क भी मजबूत होगा।
गलवान से दोस्ती तक: कैसे बदला समीकरण?
2020 में गलवान घाटी की झड़पों ने भारत-चीन रिश्तों को दशकों पीछे धकेल दिया था। दोनों देशों ने सीमा पर सैनिकों की भारी तैनाती कर दी थी, और व्यापारिक रिश्तों पर भी असर पड़ा। लेकिन, पिछले तीन वर्षों में कई दौर की बातचीत और उच्चस्तरीय बैठकों के बाद स्थिति में सुधार हुआ।
- एलएसी पर डिसइंगेजमेंट: दोनों देशों के सैनिकों ने विवादित क्षेत्रों से पीछे हटने का फैसला किया।
- सीमा पर शांति बहाली: तनावग्रस्त इलाकों में अब शांति है।
आर्थिक संबंधों में मजबूती
एक और दिलचस्प पहलू यह है कि चीन अब भारत का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार बन गया है। पहले यह स्थान अमेरिका के पास था। भारत और चीन के बीच व्यापारिक संबंध भी रिश्तों को सुधारने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
भारत-चीन संबंध: आगे की राह
हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि भारत और चीन के बीच सभी समस्याएं खत्म हो गई हैं। सीमा विवाद, आर्थिक असंतुलन, और भरोसे की कमी अभी भी बड़े मुद्दे हैं। लेकिन, कैलाश मानसरोवर यात्रा और सीधी उड़ानों की बहाली से एक सकारात्मक शुरुआत जरूर हुई है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देश इस सहयोग को किस हद तक आगे ले जाते हैं।

