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जिसने अभिनंदन को पकड़ा था, वही अब मारा गया: वजीरिस्तान में TTP से मुठभेड़ में pakistan मेजर मोइज अब्बास की मौत?

Pakistan से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। पाकिस्तानी सेना के स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) के मेजर मोइज अब्बास शाह, जिनका नाम वर्ष 2019 में विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को पकड़ने के दावे के कारण सुर्खियों में आया था, अब खुद आतंकियों के हाथों मारे गए हैं।

वजीरिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान (TTP) के साथ जबरदस्त मुठभेड़ के दौरान मेजर शाह की मौत हो गई। साथ ही इस भीषण झड़प में पाक सेना के लांस नायक जिब्रानुल्लाह भी मारे गए।


विंग कमांडर अभिनंदन को पकड़ने वाले अफसर की चौंकाने वाली मौत

मेजर मोइज अब्बास शाह वह नाम है, जो 2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद तब चर्चा में आया था, जब भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को पाकिस्तानी सेना ने हिरासत में लिया था। उस वक्त एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें दावा किया गया कि मेजर अब्बास ने अभिनंदन को पकड़कर सेना के हवाले किया था।

अब पांच साल बाद, उन्हीं मेजर अब्बास की मौत की खबर ने एक बार फिर सनसनी मचा दी है, लेकिन इस बार वह चर्चा का विषय बने हैं अपने अंत के कारण।


वजीरिस्तान बना मौत का मैदान – TTP ने बोला हमला

पाकिस्तान के अशांत और आतंक प्रभावित इलाके वजीरिस्तान में यह मुठभेड़ हुई। पाकिस्तान सेना ने तहरीक-ए-तालिबान (TTP) के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ रखा था। इसी ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे थे मेजर मोइज अब्बास।

आधिकारिक बयान के अनुसार, मेजर अब्बास शाह के नेतृत्व में सेना की एक टीम TTP के खिलाफ सर्च और डिस्ट्रक्शन मिशन पर थी। ऑपरेशन के दौरान आतंकियों से जबरदस्त गोलीबारी हुई, जिसमें मेजर शाह और लांस नायक जिब्रानुल्लाह ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।


37 साल की उम्र में शहीद हुए मेजर अब्बास – कभी थे सेना के गर्व

मेजर अब्बास शाह की उम्र महज 37 साल थी। वह पाकिस्तानी सेना के सबसे विशिष्ट यूनिट SSG यानी स्पेशल सर्विस ग्रुप का हिस्सा थे। यह यूनिट विशेष ऑपरेशनों और खतरनाक मिशनों के लिए जानी जाती है।

पाकिस्तान में कई लोग उन्हें ‘हीरो’ मानते थे, खासकर उस समय जब उन्होंने अभिनंदन को पकड़ने का दावा किया था। लेकिन अब वही ‘हीरो’ तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के खिलाफ जंग में शहीद हो गया।


पाक सेना के लिए बढ़ती चुनौतियां – TTP के हमलों में तेजी

साल 2025 पाकिस्तान के लिए काफी घातक साबित हो रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, साल की शुरुआत से अब तक तहरीक-ए-तालिबान के साथ मुठभेड़ों में 116 सैनिक मारे जा चुके हैं। 2024 में यह आंकड़ा 284 तक पहुंच चुका था।

इससे साफ है कि TTP अब पहले से कहीं अधिक सक्रिय और आक्रामक हो गई है। वजीरिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे इलाकों में सेना को आए दिन हमलों का सामना करना पड़ रहा है।


कौन है तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP)?

TTP की स्थापना वर्ष 2007 में कारी महसूद नामक आतंकी ने की थी। इस संगठन की जड़ें पाकिस्तान के भीतर गहरे तक फैली हुई हैं। इसका गठन पाक सेना द्वारा इस्लामाबाद स्थित लाल मस्जिद पर की गई कार्रवाई के विरोध में हुआ था।

शुरुआती दौर में TTP ने फिदायीन (सुसाइड बॉम्बर) तैयार करने शुरू किए और फिर सरकारी संस्थानों, पुलिस और सेना पर हमले करने लगे। अब यह संगठन पाकिस्तान के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन चुका है।


कितनी गहरी है सेना और TTP की दुश्मनी?

पाकिस्तान में सेना लंबे समय तक अफगान तालिबान और अन्य आतंकी संगठनों के साथ ‘संबंधों’ को लेकर चर्चा में रही है। लेकिन TTP पाकिस्तान के भीतर एक विद्रोही रूप में उभर कर सामने आया है, जिसे अब ‘देशद्रोही’ और सबसे बड़ा आतंकी खतरा माना जाता है।

वजीरिस्तान में चल रहे ऑपरेशनों का मकसद इसी संगठन को जड़ से खत्म करना है, लेकिन इसके लिए पाक सेना को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।


विंग कमांडर अभिनंदन से जुड़े वो पल जो पाकिस्तान कभी नहीं भूलेगा

27 फरवरी 2019 को भारत-पाकिस्तान के बीच हुई हवाई झड़प के दौरान अभिनंदन का मिग-21 विमान क्रैश हो गया था और वह पाकिस्तान में जा गिरे थे। उन्हें पकड़कर पाकिस्तानी सेना ने हिरासत में लिया था।

उसी घटना के बाद पाकिस्तान में जिस अफसर का नाम सबसे ज्यादा उछला, वो थे मेजर मोइज अब्बास शाह। अब उसी अफसर की आतंकियों के हाथों मौत ने पाकिस्तानी फौज के हौसलों को करारा झटका दिया है।


क्या पाकिस्तान की नीतियों की कीमत चुका रहे हैं उनके सैनिक?

विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान की दोहरी नीतियों और पूर्व की रणनीतिक गलतियों का ही नतीजा है कि आज TTP जैसा संगठन इतना ताकतवर हो गया है। अब स्थिति यह है कि खुद सेना के मेजर रैंक के अधिकारी भी सुरक्षित नहीं हैं।

मेजर मोइज अब्बास शाह की मौत को लेकर देश में शोक की लहर है, लेकिन सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या यह मौत व्यर्थ नहीं जा रही?


क्या पाकिस्तान सेना फिर से रणनीति बदलेगी?

इस घटना के बाद उम्मीद की जा रही है कि पाक सेना अब TTP के खिलाफ और आक्रामक रुख अपनाएगी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सैन्य बल से नहीं, बल्कि राजनीतिक इच्छाशक्ति और स्थायी रणनीति के जरिए ही इस खतरे से निपटा जा सकता है।


मेजर मोइज अब्बास शाह की मौत न केवल एक अधिकारी के अंत की कहानी है, बल्कि यह पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के चरमराते ढांचे की भी तस्वीर पेश करती है। जो अफसर कभी युद्धबंदी को पकड़ने का दावा करता था, वह अब खुद एक ऐसी लड़ाई में मारा गया जो खत्म होने का नाम नहीं ले रही। वजीरिस्तान की यह घटना पाकिस्तानी सेना के लिए चेतावनी है कि आतंक अब उनके दरवाजे तक आ पहुंचा है।

 

News-Desk

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