Meerut में पकड़ा गया अवैध VOIP टेलीफोन एक्सचेंज, करोड़ों की ठगी का खुलासा
Meerut में साइबर थाना पुलिस और डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकम्युनिकेशन (DOT) की संयुक्त टीम ने लिसाड़ीगेट क्षेत्र के लक्खीपुरा में अवैध VOIP टेलीफोन एक्सचेंज पकड़ा। यह कार्रवाई रविवार रात की गई। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह द्वारा अंतरराष्ट्रीय वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VOIP) कॉल को लोकल कॉल में परिवर्तित किया जा रहा था, जिससे केंद्र सरकार के राजस्व को भारी नुकसान पहुँच रहा था।
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि नफीसा मस्जिद के पीछे पानी की टंकी के पास एक मकान में अवैध टेलीफोन एक्सचेंज संचालित हो रहा था। सूचना के आधार पर पुलिस और डॉट की संयुक्त टीम ने मकान पर छापा मारा। मौके से लक्खीपुरा जामिया चौक निवासी आस मोहम्मद, उसके भाई मोहम्मद चांद उर्फ सोनू, लक्खीपुरा गली नंबर-16आर निवासी कासिम व उसके भाई हाशिम, अहमदनगर कांच का पुल निवासी सरफराज और मोहम्मद इमरान को गिरफ्तार किया गया।
अवैध VOIP कॉल से सरकार को हो रहा नुकसान
पकड़े गए गिरोह के सदस्य अंतरराष्ट्रीय VOIP कॉल को लोकल कॉल में बदलते थे। इससे कॉल करने वाले की पहचान छिपी रहती थी और ट्रेस करना मुश्किल हो जाता था। इससे न केवल राजस्व हानि होती थी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी खतरा पैदा हो सकता था। एसपी सिटी ने कहा कि गिरफ्तार आरोपियों में से कोई भी ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं था, फिर भी वे इस तकनीक का उपयोग करके करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी कर रहे थे।
मौके से बरामद सामान
छापेमारी में पुलिस ने गिरोह से कई तकनीकी उपकरण जब्त किए। इसमें शामिल हैं:
32 सिम का VOIP गेटवे डिवाइस
4 वाई-फाई राउटर
22 सिम कार्ड
3 लैपटॉप
5 एंड्रॉइड मोबाइल
2 कीपैड मोबाइल
1 लैपटॉप चार्जर
4 एडॉप्टर
2 राउटर केबल
1 HDMI केबल
एसपी सिटी ने बताया कि यह गिरोह लंबे समय से अवैध टेलीफोन एक्सचेंज संचालित कर रहा था।
पिछले छापे की जानकारी
19 मार्च को भी लक्खीपुरा में इसी गिरोह से जुड़े लोग पकड़े गए थे। उस समय नगर निगम के कर्मचारी के पुत्र जुनैद, साकिब, मवाना के छप्पर वाली गली निवासी आरिस और मोहल्ला कल्याण निवासी आसिफ को गिरफ्तार किया गया था। उस कार्रवाई में स्थानीय थाना पुलिस को सूचना नहीं दी गई थी, जिससे स्थानीय पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे थे।
क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से होती थी राशि की लेनदेन
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे एक मिनट की कॉल के लिए 1000 से 1500 रुपये लेते थे। दैनिक रूप से यह गिरोह 35,000 से 40,000 रुपये तक कमा रहा था। लेनदेन क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से होता था, जिसे बाद में रुपये में बदला जाता था। आरोपी फेसबुक पर अंशुमन गुप्ता नामक व्यक्ति के जरिए सिमकार्ड खरीदते थे, जो ऑनलाइन भुगतान करने पर सिमकार्ड को कोरियर से भेज देता था।
अवैध VOIP एक्सचेंज के खतरे और कानूनी कार्रवाई
इस गिरोह के खिलाफ धोखाधड़ी, अपराधिक षडयंत्र, भारतीय तार और बेतार यांत्रिकी अधिनियम 1933, भारतीय तार अधिनियम 1885 और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया और उन्हें जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि VOIP कॉल के माध्यम से होने वाली अवैध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी की जा रही है।
अवैध VOIP एक्सचेंज की जटिल तकनीक और सोशल मीडिया का इस्तेमाल
पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह तकनीकी रूप से कुशल था। VOIP गेटवे डिवाइस का उपयोग करके अंतरराष्ट्रीय कॉल को लोकल कॉल में बदलना आसान नहीं है। इसके अलावा, फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से सिमकार्ड की आपूर्ति और कॉलिंग की व्यवस्था की जाती थी। इससे यह गिरोह कई महीनों से पहचान से बचकर चल रहा था।
देश की सुरक्षा और आर्थिक हानि पर प्रभाव
ऐसे अवैध VOIP टेलीफोन एक्सचेंज न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुँचाते हैं, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती भी पैदा करते हैं। अनट्रेसेबल कॉल के कारण किसी भी अपराध या आतंकवादी गतिविधि का पता लगाना कठिन हो जाता है। एसपी सिटी ने कहा कि भविष्य में इस प्रकार की गतिविधियों की रोकथाम के लिए साइबर टीम और डॉट के साथ और भी विशेष अभियान चलाए जाएंगे।
पुलिस की अगली कार्रवाई और नोएडा टीम की भूमिका
अभी गिरोह के अन्य सदस्य नोएडा में छिपे हुए हैं। पुलिस ने वहां विशेष टीम भेजी है ताकि सभी आरोपी पकड़े जा सकें। पूछताछ और तकनीकी जांच जारी है। पुलिस ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि इस प्रकार की किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत दें।

