Nepal में डिजिटल क्रांति! डिस्कॉर्ड पर हुई वोटिंग से चुनी गई पहली महिला प्रधानमंत्री सुशीला कार्की – Gen-Z ने लिखी नई राजनीतिक कहानी
Nepal की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आया जब देश की युवा पीढ़ी यानी Gen-Z ने सोशल मीडिया बैन के बाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म डिस्कॉर्ड पर वोटिंग करके अपने नए प्रधानमंत्री का चुनाव किया। यह दुनिया में पहला मौका है जब किसी लोकतांत्रिक देश में इस तरह से नेता चुना गया हो।
युवाओं ने शुरू की ‘हामी नेपाल’ की क्रांति
इस पूरे आंदोलन का नेतृत्व नेपाल की युवा संगठन ‘हामी नेपाल’ ने किया। इस संगठन के 1.6 लाख से ज्यादा सदस्य हैं, जो लंबे समय से भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सरकार की नाकाम नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। इस संगठन ने डिस्कॉर्ड पर ‘यूथ अगेंस्ट करप्शन’ नाम से चैनल शुरू किया। सिर्फ 48 घंटे में 10,000 से ज्यादा लोग इस चैनल से जुड़ गए।
सोशल मीडिया बैन ने दिया चिंगारी
नेपाल सरकार ने बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे Facebook, Instagram, TikTok और X पर बैन लगा दिया था। ऐसे में युवाओं ने एक सुरक्षित और खुला प्लेटफॉर्म खोजा – डिस्कॉर्ड, जो गेमिंग और चैटिंग के लिए मशहूर है और Gen-Z में पहले से पॉपुलर है।
रियल टाइम बहस और पोल: वॉयस चैनल्स और टेक्स्ट चैट्स में लोग एक साथ कनेक्ट हुए।
ऑर्गनाइजेशन आसान: शहर और मुद्दे के हिसाब से चैनल बनाए गए।
सर्वर फुल होने पर YouTube स्ट्रीम: जब सर्वर पर जगह कम पड़ी तो YouTube लाइव से 6,000 और लोग जुड़े।
वोटिंग के जरिए चुने गए 5 उम्मीदवार
युवाओं ने डिस्कॉर्ड पर बहस और वोटिंग के जरिए 5 नाम शॉर्टलिस्ट किए –
पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की
सामाजिक कार्यकर्ता हरका सम्पांग
नवप्रवर्तक महाबीर पुन
शिक्षाविद सागर ढकाल
युवा नेता राष्ट्र बिमोचन तिमल्सिना
काठमांडू के मेयर और रैपर बालेन शाह का नाम भी चर्चा में था, लेकिन वे उपलब्ध नहीं हुए। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर सुशीला कार्की का समर्थन किया।
युवाओं का कहना: लोकतंत्र की नई प्रयोगशाला
25 वर्षीय लॉ ग्रेजुएट रेजिना बेसनेट ने कहा –
“हमने इस बहस के दौरान संसद भंग करने, अंतरिम सरकार बनाने जैसे कानूनी विषयों को सीखा। यह सिर्फ वोटिंग नहीं थी, यह सीखने और समाधान खोजने की प्रक्रिया थी।”
26 वर्षीय प्रदर्शनकारी विशाल सपकोटा ने कहा –
“हमें उम्मीद नहीं थी कि सरकार सिर्फ दो दिन में गिर जाएगी। यह बदलाव हमारी उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज आया।”
पत्रकार प्रणय राणा ने चेतावनी दी कि ऐसे प्लेटफॉर्म पर फेक अकाउंट्स और गलत सूचना का खतरा रहता है। इसलिए प्रदर्शनकारियों ने एक फैक्ट-चेक सब-रूम बनाया ताकि अफवाहें रोकी जा सकें।
10 सितंबर: सर्वर पर बनी आम सहमति
10 सितंबर को डिस्कॉर्ड सर्वर पर आम सहमति बनी और सुशीला कार्की को प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया। कुल 7,713 वोटों के बाद वह 50% से अधिक समर्थन हासिल करने वाली पहली उम्मीदवार बनीं। 12 सितंबर को राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने उन्हें शपथ दिलाई।
220 साल में पहली महिला प्रधानमंत्री
सुशीला कार्की नेपाल के इतिहास में पहली महिला प्रधानमंत्री बन गई हैं। यह उपलब्धि केवल नेपाल ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए मिसाल है कि कैसे युवा तकनीक का उपयोग करके लोकतंत्र को और मजबूत बना सकते हैं।
डिजिटल लोकतंत्र का भविष्य
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि नेपाल में हुआ यह प्रयोग दुनिया के कई देशों के लिए प्रेरणा बन सकता है। यह दिखाता है कि जब पारंपरिक सिस्टम जवाबदेह नहीं होते, तब तकनीक से जनमत को नई दिशा दी जा सकती है।

