शाही जामा मस्जिद (Shahi Jama Masjid) इंतजामिया कमेटी में 50 लाख की हड़पने का सनसनीखेज मामला, अध्यक्ष और भाई पर दर्ज हुआ केस
आगरा: शाही जामा मस्जिद (Shahi Jama Masjid) इंतजामिया कमेटी के अध्यक्ष जाहिद कुरैशी और उनके भाई फैसल के खिलाफ आगरा के मंटोला थाने में 50 लाख रुपये की हड़पने और वक्फ संपत्तियों के गबन का केस दर्ज किया गया है। मामला तब प्रकाश में आया जब वक्फ मैनेजमेंट कमेटी के सचिव आजम खां मलिक ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अध्यक्ष और उनके भाई ने वक्फ की संपत्तियों के किराये और ट्रांसफर में गड़बड़ी की।
पारदर्शिता और वक्फ नियमों की अनदेखी
उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, लखनऊ ने 12 नवंबर 2021 को आगरा वक्फ 74-94 की प्रबंध समिति का गठन किया था। इस समिति में कुल 11 सदस्य हैं, और यह पांच साल के लिए गठित की गई थी। सचिव आजम खां मलिक को समिति सचिव नियुक्त किया गया, जबकि मोहम्मद जाहिद कुरैशी को अध्यक्ष बनाया गया।
वक्फ अधिनियम और प्रबंध समिति के प्रस्ताव के अनुसार, वक्फ संपत्ति का किराया वसूलना और संपत्ति ट्रांसफर करना सचिव का अधिकार है। लेकिन आरोप है कि अध्यक्ष और उनके भाई ने अपनी हैसियत का दुरुपयोग करके गैरकानूनी रूप से 50 लाख रुपये वसूल कर अपने पास रख लिए।
किरायेदारों को नोटिस देने के बाद भी यह राशि वक्फ के खाते में जमा नहीं कराई गई। फैसल कमेटी का सदस्य भी नहीं है, इसके बावजूद उसने सक्रिय भूमिका निभाई और वक्फ संपत्तियों के ट्रांसफर में हस्तक्षेप किया।
फर्जी दस्तावेज और व्हाट्सएप वायरलिंग का मामला
आजम खां मलिक ने आरोप लगाया कि 9 अगस्त 2024 को फैसल ने एक व्हाट्सएप ग्रुप में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर तैयार कर कूटरचित प्रपत्र वायरल किया। इस प्रपत्र में उनके अधिकार सीज़ करने की धमकी दी गई।
इस पूरे मामले की जांच के लिए पुलिस ने आवश्यक साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एसीपी छत्ता पियूष कांत राय ने बताया कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने और वायरल करने के आरोप में कार्रवाई की जाएगी।
पद हनन और प्रबंध समिति की बैठक
15 सितंबर 2024 को प्रबंध समिति की एक बैठक में जाहिद कुरैशी को अध्यक्ष पद से हटाने का प्रस्ताव पास किया गया। यह प्रस्ताव वक्फ बोर्ड को भेजा गया, जिसके आधार पर एक जांच कमेटी गठित की गई। जांच अभी तक लंबित है।
वक्फ बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि किसी भी सदस्य को वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में अपनी भूमिका का दुरुपयोग नहीं करने दिया जाएगा। इसके अलावा, किसी भी गैरकानूनी कार्रवाई की सख्त समीक्षा की जाएगी।
वक्फ संपत्ति और आगरा के मस्जिद कमिटी के मामलों पर प्रभाव
इस घटना ने आगरा में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़ा कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसी घटनाओं पर समय पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इससे धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता और सामाजिक सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
इस तरह के मामलों में आम जनता का भरोसा कम होना स्वाभाविक है। आगरा जैसे ऐतिहासिक शहर में वक्फ संपत्तियों की सही देखरेख न होना न केवल प्रशासनिक खामियों को उजागर करता है बल्कि धार्मिक और सामाजिक स्थिरता को भी प्रभावित कर सकता है।
पुलिस और वक्फ बोर्ड की संयुक्त कार्रवाई
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। अब तक के शुरुआती साक्ष्य यह संकेत दे रहे हैं कि अध्यक्ष और उनके भाई फैसल ने वक्फ के नियमों का उल्लंघन किया है।
जांच में शामिल दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई करेगी। साथ ही वक्फ बोर्ड ने भी कमिटी के अन्य सदस्यों को मामले की पूरी जानकारी दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए इस मामले से एक मिसाल बन सकती है।
आगरा के वक्फ मामलों में सुधार की आवश्यकता
आगरा में वक्फ संपत्तियों के मामलों को लेकर यह पहला बड़ा विवाद नहीं है। लेकिन इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सभी सदस्यों को कानून और नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
यदि समय पर सुधार नहीं किया गया तो धार्मिक संस्थाओं के कार्य में लगातार गड़बड़ी की संभावना बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सभी वक्फ कमिटियों में नियमित ऑडिट और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
नज़र रखने की जरूरत
आगरा और आसपास के क्षेत्रों में वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग सुनिश्चित करना जरूरी है। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि यदि कमिटी सदस्यों की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई तो धार्मिक संपत्तियों का दुरुपयोग हो सकता है।
आगरा की शाही जामा मस्जिद कमिटी के अध्यक्ष और उनके भाई पर दर्ज यह केस न केवल वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में गड़बड़ी को उजागर करता है बल्कि प्रशासन और धर्म के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी सामने लाता है। पुलिस और वक्फ बोर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि गैरकानूनी गतिविधियों में कितनी गहराई थी और भविष्य में इस पर क्या क़दम उठाए जाएंगे।

