Baghpat में सड़क चौड़ीकरण पर बड़ा एक्शन: 6 गांवों के 200 मकानों पर चला नोटिस, 7 दिन में हटाने के आदेश
Baghpat में सड़क चौड़ीकरण परियोजना को लेकर प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। बड़ौत-छपरौली-टांडा मार्ग के चौड़ीकरण की जद में आने वाले छह गांवों के करीब 200 मकानों पर नोटिस चस्पा किए गए हैं। इन मकानों को सात दिन के भीतर स्वयं हटाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद प्रशासन और लोक निर्माण विभाग संयुक्त रूप से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करेगा।
इस कार्रवाई के बाद प्रभावित गांवों में चिंता और असंतोष का माहौल है। कई परिवारों का कहना है कि उनके मकान वर्षों की मेहनत और जीवनभर की कमाई से बने हैं, ऐसे में प्रशासन को पारदर्शिता और उचित मुआवजे पर ध्यान देना चाहिए।
49 करोड़ रुपये की लागत से होगा सड़क चौड़ीकरण
लोक निर्माण विभाग के अनुसार बड़ौत-छपरौली-टांडा मार्ग के चौड़ीकरण के लिए शासन से लगभग 49 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। वर्तमान में यह सड़क करीब 7 मीटर चौड़ी है, जिसे बढ़ाकर 10 मीटर किया जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि सड़क को दोनों ओर से करीब डेढ़-डेढ़ मीटर तक चौड़ा किया जाएगा। इसके लिए नक्शा तैयार कर राजस्व विभाग की मदद से पैमाइश कराई गई, जिसमें कई स्थानों पर सड़क की जमीन पर अतिक्रमण पाया गया।
छह गांवों में सड़क की जमीन पर बने मिले मकान
पैमाइश के दौरान मलकपुर, सिनौली, आदर्श नंगला, छपरौली समेत छह गांवों में बड़ी संख्या में मकान और चबूतरे सड़क की जमीन पर बने हुए पाए गए।
राजस्व विभाग के अधिकारियों ने सड़क की सीमांकन प्रक्रिया पूरी करने के बाद करीब 200 मकानों को चिह्नित किया। अधिकारियों के मुताबिक कई मकान एक से डेढ़ मीटर तक सड़क की जमीन पर बने हुए हैं।
इसके बाद संबंधित मकानों पर नोटिस चस्पा कर दिए गए और मकान मालिकों को सात दिन के भीतर स्वयं अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए।
नोटिस के बाद ग्रामीणों में बढ़ी चिंता
नोटिस चस्पा होने के बाद प्रभावित गांवों में चिंता का माहौल बन गया है। कई परिवारों का कहना है कि अगर मकान तोड़े जाते हैं तो उन्हें भारी आर्थिक नुकसान होगा।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को निशानदेही पूरी पारदर्शिता के साथ करनी चाहिए ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति का घर गलत तरीके से प्रभावित न हो।
स्थानीय निवासी अर्जुन तोमर ने कहा कि लोगों ने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई लगाकर घर बनाए हैं। अगर तोड़फोड़ की जाती है तो प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
वहीं बबली तोमर ने कहा कि मकान केवल ईंट और पत्थर नहीं होते, बल्कि परिवारों के सपनों और मेहनत का सहारा होते हैं। उन्होंने दोबारा निष्पक्ष निशानदेही कराने की मांग की।
ग्रामीणों ने दोबारा निशानदेही की उठाई मांग
कार्रवाई को लेकर कई ग्रामीण लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से मिले और दोबारा निशानदेही कराने की मांग की।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की वास्तविक सीमा और मकानों की स्थिति को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में प्रशासन को दोबारा माप कर स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए।
इसके बाद राजस्व विभाग और लोक निर्माण विभाग की टीम ने मलकपुर, सिनौली और अन्य गांवों में दोबारा निशानदेही की प्रक्रिया भी शुरू की।
सड़क चौड़ीकरण से हजारों लोगों को मिलने की उम्मीद राहत
प्रशासन का कहना है कि बड़ौत-छपरौली-टांडा मार्ग से 20 से अधिक गांव जुड़े हुए हैं और प्रतिदिन हजारों वाहन इस सड़क से गुजरते हैं।
मार्ग संकरा होने के कारण आए दिन जाम और सड़क हादसों की स्थिति बनती है। खासकर कोहरे और खराब मौसम के दौरान वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
अधिकारियों का मानना है कि सड़क चौड़ी होने से यातायात सुगम होगा और दुर्घटनाओं में कमी आने की संभावना है।
जल्द शुरू होगा निर्माण कार्य
लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता Atul Kumar ने बताया कि सड़क चौड़ीकरण का कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जिन मकानों और चबूतरों का निर्माण सड़क की जमीन पर हुआ है, उन्हें हटाने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। निर्धारित समय पूरा होने के बाद विभाग और प्रशासन संयुक्त कार्रवाई करेंगे।
अधिकारियों का कहना है कि सड़क परियोजना क्षेत्र के विकास और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।
विकास बनाम विस्थापन की बहस फिर तेज
इस पूरे मामले ने एक बार फिर विकास परियोजनाओं और आम लोगों के विस्थापन के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज कर दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क चौड़ीकरण और बुनियादी ढांचे का विकास जरूरी है, लेकिन इसके साथ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रशासन को कार्रवाई से पहले प्रभावित लोगों से संवाद बढ़ाना चाहिए ताकि विवाद और तनाव की स्थिति कम हो सके।

