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2025 का साहित्य Nobel हंगरी के László Krasznahorkai को, ‘सतांटैंगो’ लेखक को मिला प्रतिष्ठित सम्मान

स्टॉकहोम: हंगरी के प्रतिष्ठित लेखक László Krasznahorkai को 2025 का साहित्य Nobel पुरस्कार दिया गया है। स्वीडिश एकेडमी ने गुरुवार को इसका ऐलान करते हुए कहा कि उनकी रचनाएं बेहद प्रभावशाली और दूरदर्शी हैं। वे आतंक और डर के बीच भी कला की शक्ति को प्रदर्शित करती हैं।

क्रास्नाहोरकाई को 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना (लगभग 10.3 करोड़ रुपए), सोने का मेडल और प्रमाणपत्र मिलेगा। पुरस्कार 10 दिसंबर को स्टॉकहोम में आयोजित समारोह में प्रदान किया जाएगा।


अंतरराष्ट्रीय सम्मान और पुरस्कार

लास्जलो को पहले भी कई पुरस्कार मिल चुके हैं। 2015 में उन्हें मैन बुकर इंटरनेशनल प्राइज और 2019 में नेशनल बुक अवॉर्ड फॉर ट्रांसलेटेड लिटरेचर से सम्मानित किया गया था। उनकी किताब ‘सतांटैंगो’ पर 7 घंटे लंबी फिल्म बनाई गई थी, जो आर्टहाउस सिनेमा की शान मानी जाती है।


सतांटैंगो – दर्शनात्मक और गहरी सोच की कहानी

‘सतांटैंगो’ क्रास्नाहोरकाई का पहला और सबसे मशहूर उपन्यास है। इसकी कहानी एक छोटे से गांव और वहां रहने वाले लोगों की मुश्किल जिंदगी के इर्द-गिर्द घूमती है। उपन्यास में अराजकता, धोखा और मानव स्वभाव की कमजोरियों को बेहतरीन ढंग से दिखाया गया है।

कहानी में कुछ गरीब लोग पुराने खंडहर फार्महाउस में रहते हैं और सोचते हैं कि अब उन्हें ज्यादा पैसा मिलेगा, लेकिन चीजें उलट जाती हैं। इस उपन्यास पर 1994 में सात घंटे लंबी फिल्म बनी थी, जिसे अब तक की सर्वश्रेष्ठ आर्टहाउस फिल्मों में से एक माना जाता है।

इसके अलावा, उनकी किताब ‘द मेलांकली ऑफ रेसिस्टेंस’ पर भी फिल्म बनाई जा चुकी है।


जन्म और व्यक्तिगत जीवन

लास्जलो क्रास्नाहोरकाई का जन्म 5 जनवरी 1954 को हंगरी के ग्युला शहर में हुआ। वे एक मध्यमवर्गीय परिवार से आते हैं। उनके पिता, जॉर्जी क्रास्नाहोरकाई, वकील थे।

लास्जलो यहूदी धर्म के हैं, लेकिन उन्हें यह बात 11 साल की उम्र में पता चली। उन्होंने अपने जीवन में कई बार शादी की; पहली शादी 1990 में अनिको पेलीहे से और दूसरी 1997 में डोरा कोपचान्यी से हुई। उनके तीन बच्चे हैं। फिलहाल वे हंगरी के सेंटलास्लो पहाड़ियों में एकांत जीवन जी रहे हैं।

वे पहले बर्लिन में रहे, जहां फ्री यूनिवर्सिटी ऑफ बर्लिन में एस. फिशर गेस्ट प्रोफेसर भी बने। इसके अलावा जर्मनी, चीन, मंगोलिया, जापान, अमेरिका, स्पेन और ग्रीस में लंबा समय बिताया।


नोबेल पुरस्कार – इतिहास और महत्व

नोबेल पुरस्कार की स्थापना 1895 में अल्फ्रेड बर्नहार्ड नोबेल की वसीयत के आधार पर हुई थी। साहित्य, विज्ञान और शांति के क्षेत्र में यह सम्मान 1901 से दिया जा रहा है। अब तक 121 लोगों को साहित्य के क्षेत्र में नोबेल सम्मान मिल चुका है।

रविंद्रनाथ टैगोर एशिया के पहले लेखक थे, जिन्हें 1913 में गीतांजलि के लिए साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला।

2024 में यह पुरस्कार दक्षिण कोरियाई लेखिका हान कांग को मिला, जिन्हें उनके अंतरराष्ट्रीय उपन्यास ‘द वेजिटेरियन’ के लिए जाना जाता है।


क्रास्नाहोरकाई की लेखनी – दार्शनिक और उदासीन

क्रास्नाहोरकाई की लेखनी अक्सर गहरी, उदास और दर्शनात्मक होती है। उनकी कहानियों में मानवता, अराजकता और आधुनिक समाज की चुनौतियों का उल्लेख मिलता है। उनका लेखन आतंक और भय के बीच भी कला की ताकत को उजागर करता है।


पुरस्कार वितरण और समारोह

लास्जलो क्रास्नाहोरकाई को 10 दिसंबर को स्टॉकहोम में आयोजित समारोह में सोने का मेडल और डिप्लोमा प्रदान किया जाएगा। स्वीडिश एकेडमी ने उनके योगदान को अंतरराष्ट्रीय साहित्य में अत्यधिक प्रभावशाली और दूरदर्शी बताया है।


László Krasznahorkai को 2025 का साहित्य नोबेल पुरस्कार मिलना हंगरी और विश्व साहित्य के लिए गर्व की बात है। उनकी लेखनी ने मानव जीवन की जटिलताओं और आधुनिक समाज के संकटों को बारीकी से पेश किया है। ‘सतांटैंगो’ जैसी मास्टरपीस फिल्मों और उपन्यासों के माध्यम से उन्होंने कला की शक्ति और गहन दर्शन को विश्व मंच पर प्रदर्शित किया है। यह सम्मान उनके और समकालीन साहित्य जगत के लिए प्रेरणादायक साबित होगा।

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