Agra में इंसाफ की तलाश में निकली गैंगरेप पीड़िता के साथ हैवानियत — उसके ही वकील ने किया रेप, गिरफ्तार होकर जेल पहुंचा अधिवक्ता जितेंद्र धाकरे
Agra से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने इंसाफ की पूरी प्रक्रिया को शर्मसार कर दिया है। यहां एक गैंगरेप पीड़िता, जो पहले से ही न्याय के लिए संघर्ष कर रही थी, उसके साथ उसके ही वकील जितेंद्र धाकरे ने रेप कर दिया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी अधिवक्ता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
यह मामला थाना एकता क्षेत्र का है। बताया गया कि अधिवक्ता ने केस की सुनवाई के बहाने पीड़िता को बुलाया और उसे होटल के कमरे में बुलाकर इस घिनौने अपराध को अंजाम दिया। यह खबर पूरे आगरा शहर में चर्चा का विषय बन गई है और लोग अब कानून की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाने लगे हैं।
भरोसे की चादर में छिपा अपराध — ताज रॉयल होटल बना शर्मनाक वारदात का गवाह
पीड़िता ने पुलिस को बताया कि अधिवक्ता जितेंद्र धाकरे उर्फ संतोष सिंह ने उसे केस के सिलसिले में मिलने के लिए ताज रॉयल होटल बुलाया। वकील ने कहा कि केस के “समझौते” को लेकर कुछ जरूरी बात करनी है। पीड़िता ने भरोसा जताते हुए होटल पहुंचने का फैसला किया।
जैसे ही वह कमरा नंबर 106 में पहुंची, वकील ने दरवाजा अंदर से बंद किया और उसके साथ जबरदस्ती करने लगा। हैवानियत का शिकार हुई महिला ने किसी तरह हिम्मत जुटाई और थाने जाकर पूरी घटना की जानकारी दी।
इस खुलासे के बाद ताजगंज क्षेत्र में हड़कंप मच गया। होटल स्टाफ से भी पुलिस ने पूछताछ की है और सीसीटीवी फुटेज को कब्जे में लिया गया है।
औरैया की रहने वाली पीड़िता की दर्दनाक कहानी
जानकारी के मुताबिक, पीड़िता औरैया जिले की रहने वाली है। साल 2022 में एत्मादपुर क्षेत्र में उसके साथ गैंगरेप हुआ था। इस केस की पैरवी अधिवक्ता जितेंद्र धाकरे कर रहे थे। पीड़िता को उम्मीद थी कि उसका वकील उसे न्याय दिलाएगा, मगर उसी ने उसके भरोसे को तोड़ दिया।
गुरुवार को जब पीड़िता कोर्ट गई थी, तो वकील ने कहा कि “मामले में समझौते की बात हो सकती है, होटल में बैठकर इस पर चर्चा करते हैं।” पीड़िता को लगा कि यह उसकी मदद के लिए हो रहा है, लेकिन यह सिर्फ एक झूठा बहाना था।
रात में जब वकील वापस होटल लौटा, तो उसने कहा कि “केस के दस्तावेजों पर बात करनी है।” जैसे ही महिला ने दरवाजा खोला, वकील ने मौका पाकर रेप किया।
रेप के बाद आरोपी की चालाकी और पुलिस की तत्परता
घटना के बाद अधिवक्ता जितेंद्र धाकरे फरार हो गया। जब पुलिस को इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने तुरंत छापेमारी की। एसीपी पीयूष कांत राय ने बताया कि “पीड़िता की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोपी अधिवक्ता को पकड़ने के लिए टीम गठित की गई।”
शुक्रवार शाम को जब पुलिस आरोपी को पकड़ने पहुंची, तो उसने छत से छलांग लगा दी। इससे उसके दोनों पैर टूट गए। पुलिस ने तुरंत उसे एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया और बाद में रिमांड पर लेकर जेल भेज दिया।
महिला सुरक्षा पर फिर उठे सवाल — न्याय की प्रक्रिया में भी असुरक्षित महिलाएं?
यह घटना सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि उस भरोसे पर चोट है जो एक पीड़िता अपने वकील पर करती है। जब न्याय की लड़ाई में मदद करने वाला ही अपराधी बन जाए, तो समाज की नींव हिल जाती है।
कई महिला संगठनों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। आगरा महिला आयोग ने कहा है कि “यह सिर्फ एक रेप केस नहीं है, बल्कि यह सिस्टम के पतन की निशानी है। जो व्यक्ति कानून का जानकार है, वही उसका दुरुपयोग कर रहा है।”
पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच
पुलिस ने होटल का पूरा रजिस्टर जब्त कर लिया है और सीसीटीवी फुटेज से सबूत जुटाए जा रहे हैं।
एसीपी पीयूष कांत राय ने कहा कि “अधिवक्ता जितेंद्र धाकरे के खिलाफ रेप की धारा में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने इससे पहले भी किसी अन्य महिला के साथ ऐसा अपराध किया था। कई पुराने केस रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
आगरा बार एसोसिएशन में हड़कंप
इस घटना के बाद आगरा बार एसोसिएशन में भी हड़कंप मचा हुआ है। वकीलों के बीच चर्चा है कि ऐसे आरोपी को हमेशा के लिए वकालत से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
कुछ अधिवक्ताओं ने कहा कि “कानून के पेशे की गरिमा को ऐसे लोग कलंकित कर रहे हैं। न्याय का मंदिर किसी की हवस का अड्डा नहीं बन सकता।”
महिलाओं में भय और गुस्सा दोनों
घटना के बाद आगरा और आसपास के इलाकों की महिलाएं गुस्से में हैं। सोशल मीडिया पर लोग आरोपी के खिलाफ सख्त सजा की मांग कर रहे हैं।
महिला संगठनों ने कहा है कि “जब तक ऐसे अपराधियों को कड़ी सजा नहीं दी जाएगी, तब तक महिलाएं अदालतों या कानूनी प्रक्रिया पर विश्वास नहीं कर पाएंगी।”
समाज में भरोसे की दरार — जब रक्षक ही बन जाए भक्षक
यह मामला सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि उस दर्द की तस्वीर है जो किसी भी महिला को तब झेलनी पड़ती है जब वह अपने अधिकारों के लिए न्याय के दरवाजे पर जाती है।
एक ओर सरकारें महिला सुरक्षा पर कानून बना रही हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसे मामले सिस्टम की नाकामी उजागर कर रहे हैं।
कानून और व्यवस्था पर सवाल
कानून के जानकारों का कहना है कि अधिवक्ता जैसे पेशेवर से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती। यह केस इस बात का प्रमाण है कि महिला सुरक्षा केवल सड़कों पर नहीं, न्यायिक प्रक्रिया के भीतर भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अब लोगों की निगाहें कोर्ट की कार्रवाई पर हैं, जहां आरोपी अधिवक्ता के खिलाफ कड़ी सजा की मांग हो रही है।
जनता की राय — सख्त कानून और निगरानी की जरूरत
कई नागरिकों ने कहा है कि वकीलों और पुलिस के बीच एक निगरानी तंत्र होना चाहिए जिससे ऐसे अपराधों पर तुरंत रोक लगाई जा सके।
कुछ लोगों ने सुझाव दिया है कि महिला पीड़िताओं से जुड़े केसों में केवल महिला वकीलों की नियुक्ति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

