वैश्विक

Ayodhya में धर्मध्वजा फहरते ही भावुक हुए PM Modi: बोले— मानसिक गुलामी तोड़ने का समय आ गया, जिसने राम को भी ‘काल्पनिक’ कहने की हिम्मत की थी

Ayodhya की भूमि मंगलवार को फिर एक इतिहास की साक्षी बनी, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्धारित शुभ मुहूर्त में राम मंदिर के मुख्य शिखर पर धर्मध्वजा फहराया। वह क्षण केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं था, बल्कि Ayodhya flag ceremony के रूप में पूरे राष्ट्र को एक सांस्कृतिक जागरण का प्रतीकात्मक संदेश दे गया।
जैसे ही केसरिया धर्मध्वजा वायु में लहराई, पूरा परिसर—सरयू तट से लेकर नवनिर्मित प्रांगण तक—‘जय श्री राम’ के घोष से गूंज उठा। वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ऐसा भरा कि हर श्रद्धालु की आंखें नम और हृदय उत्साह से भर गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि रामलला प्राण प्रतिष्ठा के दिन उन्होंने “राम से राष्ट्र” की चर्चा की थी। आज उन्होंने तीव्र भाव से कहा कि “हमें आने वाले एक हजार वर्षों की भारत की नींव मजबूत करनी है। जो लोग केवल वर्तमान देखते हैं, वे आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय करते हैं। देश तब भी था जब हम नहीं थे, और तब भी रहेगा जब हम नहीं होंगे।”


‘मानसिक गुलामी ने राम को भी काल्पनिक बताया’ — पीएम मोदी का तीखा और भावुक संदेश

प्रधानमंत्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृति, परंपरा, पहचान और आत्मसम्मान पर सबसे बड़ा आघात ब्रिटिश काल की मानसिक गुलामी ने किया।
उन्होंने कहा—
“गुलामी की मानसिकता इतनी गहरी बैठाई गई कि भारतवर्ष के कण–कण में विराजमान भगवान राम को भी ‘काल्पनिक’ कहने का दुस्साहस किया गया।”

उन्होंने स्मरण दिलाया कि 1835 में लॉर्ड मैकाले ने इस मानसिक गुलामी की इमारत खड़ी की, और 2035 में उसके 200 वर्ष पूरे हो जाएंगे।
पीएम मोदी ने संकल्प स्वर में कहा—
“आने वाले दस वर्षों में हमें इस मानसिक गुलामी को जड़ से उखाड़ फेंकना है। भारत को कोई और नहीं, भारत की अपनी विरासत परिभाषित करेगी।”

उन्होंने नौसेना के नवनिर्मित ध्वज का उदाहरण देते हुए कहा कि देश ने अब “ग़ुलामी के प्रतीक” हटाकर स्वाभिमान की ओर कदम बढ़ाया है।
उन्होंने कहा—
“ये केवल डिजाइन बदलने का क्षण नहीं था, यह मानसिकता बदलने की प्रक्रिया थी।”


अयोध्या: वह भूमि जहां आदर्श आचरण बनते हैं, और राम ‘युवराज’ से ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ बनते हैं

प्रधानमंत्री मोदी का वक्तव्य कई बार दार्शनिक गहराई में उतरता नजर आया।
उन्होंने कहा—
“अयोध्या वह भूमि है जहां आदर्श सिर्फ विचार नहीं रहते, वे आचरण बन जाते हैं। यही धरती बताती है कि एक व्यक्ति समाज की सामूहिक शक्ति से ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ कैसे बनता है।”

उन्होंने रामायण के पात्रों का उल्लेख कर बताया कि राम मंदिर का विशाल प्रांगण भारत की सामूहिक चेतना का स्रोत बन चुका है—

  • माता शबरी की प्रेरणा

  • निषादराज की मित्रता

  • माता अहिल्या की करुणा

  • महर्षि वाल्मीकि का ज्ञान

  • संत तुलसीदास की भक्ति

  • जटायु का त्याग

  • गिलहरी की सेवा

उन्होंने कहा—
“विकसित भारत का मार्ग समाज की इसी सामूहिक शक्ति का परिणाम है।”


ध्वज सत्यमेव जयते की पुकार— सत्य की जीत, असत्य नहीं

प्रधानमंत्री ने धर्मध्वजा के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से बात की।
उन्होंने कहा—
“ध्वज हमें ‘सत्यमेव जयते’ का स्मरण कराता है कि जीत हमेशा सत्य की होती है, असत्य की नहीं। यह प्रेरणा देता है कि वचन निभाया जाए, त्याग किया जाए और धर्म का पालन किया जाए।”

उन्होंने यह भी कहा कि कई लोग जो मंदिर नहीं पहुंच पाते, वे दूर से केवल धर्मध्वजा का दर्शन करते हैं, और उन्हें भी उतना ही पुण्य प्राप्त होता है।
यह ध्वज न केवल मंदिर का प्रतीक है, बल्कि रामलला की जन्मभूमि का दूर से ही दर्शक द्वार है।


अयोध्या का धर्मध्वज और कोविदार वृक्ष— पहचान की जड़ों से जुड़ने की पुकार

प्रधानमंत्री ने बताया कि यह ध्वज, जिस पर कोविदार वृक्ष अंकित है, भारत की स्मृति और पहचान का प्रतीक है।
उन्होंने कहा—
“जब हम अपनी जड़ों को भूलते हैं, हम अपनी पहचान खो देते हैं। यह ध्वज हमें उसी पहचान की याद दिलाता है।”

उन्होंने ब्रिटिश काल की शिक्षा नीति पर फिर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा—
“मैकाले की अपवित्र नीति ने भारत की पीढ़ियों को अपनी वास्तविक विरासत से दूर रखा। आने वाले दस वर्षों में हमें इस मानसिक गुलामी से पूर्ण मुक्ति पाना है। यही संकल्प आज अयोध्या में दिख रहा है।”


वैदिक मंत्रों से गूंजता प्रांगण, वातावरण में आहुतियों की सुगंध— ध्वजारोहण का दिव्य क्षण

ध्वजारोहण से पूर्व मंदिर परिसर में विशाल वेदिक अनुष्ठान हुआ।
यज्ञकुंडों से उठती आहुतियों की सुगंध, नगाड़ों की ध्वनि, मंत्रोच्चार की ध्वनित लय—इन सबने मिलकर ऐसा वातावरण रचा कि उपस्थित हर व्यक्ति का मन अभिभूत हो उठा।

चार से पाँच मिनट की संक्षिप्त लेकिन अत्यंत पवित्र रस्म में प्रधानमंत्री ने बटन दबाकर ध्वज फहराया।
जैसे ही ध्वज आकाश की ओर उठा, सात हजार से अधिक अतिथियों ने एक सुर में जयकारे लगाए


ये रहे विशेष अतिथि— संत, महंत से लेकर व्यापार जगत तक की मौजूदगी

समारोह में उपस्थित थे—

  • मोहन भागवत (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख)

  • आनंदीबेन पटेल (राज्यपाल)

  • योगी आदित्यनाथ (मुख्यमंत्री)

  • विभिन्न धर्मगुरु

  • व्यापार जगत के प्रमुख

  • दलित, वंचित, किन्नर और अघोरी समुदाय के प्रतिनिधि

  • देश–दुनिया से आए संत-महंत

  • हज़ारों श्रद्धालु

अयोध्या इस पूरे आयोजन के दौरान त्यौहार की तरह सजी रही

  • दीप

  • पुष्प

  • रंगोलियां

  • भव्य सजावट

  • सुरक्षा व्यवस्था के विशेष प्रबंध

सरयू तट तक हर कदम पर उत्सव की छटा दिख रही थी।


मानसिक गुलामी से मुक्ति का आह्वान— आने वाला दशक होगा निर्णायक

पीएम मोदी ने कहा कि अगले दस वर्ष भारत के लिए निर्णायक होंगे।
उन्होंने कहा—
“हमें उन प्रतीकों से भी मुक्त होना है, जिनसे हमारी विरासत का कोई संबंध नहीं। भारत अपनी पहचान स्वयं तय करेगा, किसी और की विरासत से नहीं।”

उन्होंने संदेश दिया कि Ram Temple के इस ध्वजारोहण ने भारत को आत्मविश्वास, सांस्कृतिक स्वाभिमान और आत्म-परिभाषा का नया संदेश दिया है।


अयोध्या में धर्मध्वज फहराने का यह ऐतिहासिक क्षण केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह भारत की पहचान, आत्मसम्मान, विरासत और भविष्य के संकल्प का प्रतीक बन गया। प्रधानमंत्री के संदेशों ने स्पष्ट कर दिया कि आने वाला दशक भारत को मानसिक गुलामी से मुक्त कर, अपनी जड़ों की ओर लौटने और आत्मनिर्भर सांस्कृतिक शक्ति के रूप में स्थापित करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाने वाला है। अयोध्या की यह भव्य **Ayodhya flag ceremony** आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय चेतना का एक अविस्मरणीय अध्याय बनकर दर्ज रहेगी।

News-Desk

News Desk एक समर्पित टीम है, जिसका उद्देश्य उन खबरों को सामने लाना है जो मुख्यधारा के मीडिया में अक्सर नजरअंदाज हो जाती हैं। हम निष्पक्षता, सटीकता, और पारदर्शिता के साथ समाचारों को प्रस्तुत करते हैं, ताकि पाठकों को हर महत्वपूर्ण विषय पर सटीक जानकारी मिल सके। आपके विश्वास के साथ, हम खबरों को बिना किसी पूर्वाग्रह के आप तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। किसी भी सवाल या जानकारी के लिए, हमें संपर्क करें: info@poojanews.com

News-Desk has 21452 posts and counting. See all posts by News-Desk

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

three + 16 =