South Africa Mass Shooting: जोहान्सबर्ग के पास बेकर्सडाल में खून की होली, 10 की मौत, 10 घायल, अवैध शराब ठिकाने फिर बने मौत का कारण
News-Desk
6 min read
Bakersdal township violence, Gauteng crime news, illegal tavern shooting, Johannesburg shooting, mass firing South Africa, south africa, South Africa gun violence, South Africa mass shootingSouth Africa Mass Shooting की एक और भयावह घटना ने पूरे देश को हिला दिया है। जोहान्सबर्ग के पास स्थित बेकर्सडाल टाउनशिप में रविवार को अज्ञात बंदूकधारियों ने सरेआम गोलियां बरसा दीं। इस निर्मम हमले में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 10 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
यह घटना ऐसे समय पर हुई है, जब इसी महीने दक्षिण अफ्रीका पहले ही एक और सामूहिक गोलीबारी का गवाह बन चुका है। लगातार बढ़ती हिंसा ने आम लोगों के साथ-साथ प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता को कई गुना बढ़ा दिया है।
जोहान्सबर्ग से 40 किलोमीटर दूर दहशत का मंजर
पुलिस के अनुसार, यह South Africa Mass Shooting जोहान्सबर्ग से करीब 40 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम स्थित बेकर्सडाल इलाके में हुई।
हमलावरों ने अचानक सड़कों पर मौजूद लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। चश्मदीदों के मुताबिक, फायरिंग इतनी तेज और अंधाधुंध थी कि लोगों को संभलने या भागने का मौका तक नहीं मिला।
घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए।
अवैध शराब ठिकाने के पास हुआ हमला, बिना लाइसेंस चल रहा था टैवर्न
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गोलीबारी एक अवैध टैवर्न (बिना लाइसेंस शराब ठिकाने) के पास हुई, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
गौतेंग प्रांत की पुलिस प्रवक्ता ब्रिगेडियर ब्रेंडा मुरिडिली ने बताया कि हमलावरों ने किसी खास व्यक्ति को नहीं, बल्कि आसपास मौजूद लोगों को निशाना बनाया।
उन्होंने कहा कि मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है और यह अभी स्पष्ट नहीं है कि पीड़ित किस सामाजिक या पेशेवर पृष्ठभूमि से जुड़े थे।
घायलों की हालत नाजुक, अस्पतालों में अलर्ट
इस South Africa Mass Shooting में घायल हुए लोगों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
डॉक्टरों के अनुसार, कई घायलों की हालत बेहद गंभीर बनी हुई है और आने वाले 24 घंटे बेहद अहम बताए जा रहे हैं।
स्थानीय स्वास्थ्य प्रशासन ने अस्पतालों में अतिरिक्त स्टाफ और सुरक्षा व्यवस्था तैनात कर दी है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
क्या सोने की खदानों से जुड़ा है खून-खराबा?
घटनास्थल कई बड़ी सोने की खदानों के पास स्थित है, जिससे इस हमले को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है।
हालांकि पुलिस और जांच एजेंसियों ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि इस South Africa Mass Shooting का संबंध
अवैध खनन
आपराधिक गिरोहों
या किसी गैंगवार
से है या नहीं।
फिलहाल हमलावरों की पहचान और हमले की मंशा दोनों ही रहस्य बनी हुई हैं।
इसी महीने दूसरी सामूहिक फायरिंग, पहले 12 की गई थी जान
यह घटना दक्षिण अफ्रीका में इस महीने की दूसरी बड़ी सामूहिक गोलीबारी है।
इससे पहले 7 दिसंबर को राजधानी प्रिटोरिया के पास सॉल्सविल टाउनशिप में एक हॉस्टल में अंधाधुंध फायरिंग हुई थी।
उस हमले में
11 लोगों की मौत हुई थी
मृतकों में 3 साल का एक बच्चा भी शामिल था
14 लोग घायल हुए थे
पुलिस ने तब बताया था कि तड़के शराब पी रहे लोगों पर तीन अज्ञात हमलावरों ने गोलियां चलाई थीं।
अवैध शराब ठिकाने और हिंसा का खतरनाक रिश्ता
इन दोनों घटनाओं में एक चिंताजनक समानता सामने आई है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक,
दोनों जगह गोलीबारी अवैध और बिना लाइसेंस वाले शराब ठिकानों के आसपास हुई
ऐसे स्थान लंबे समय से अपराध, झगड़े और गैंग गतिविधियों के केंद्र बने हुए हैं
दक्षिण अफ्रीका में अवैध शराब ठिकानों को लेकर पहले भी कई बार चेतावनी दी जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद ये जगहें हिंसा का अड्डा बनी हुई हैं।
हजारों अवैध शराब ठिकाने बंद, फिर भी थमी नहीं हिंसा
पुलिस आंकड़ों के अनुसार,
अप्रैल से सितंबर के बीच 12,000 से ज्यादा अवैध टैवर्न बंद किए गए
18,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया
इसके बावजूद South Africa Mass Shooting जैसी घटनाएं यह दिखाती हैं कि जमीनी स्तर पर हालात अब भी बेहद गंभीर हैं।
हर दिन औसतन 63 हत्याएं, आंकड़े डराने वाले
संयुक्त राष्ट्र और दक्षिण अफ्रीकी पुलिस के आंकड़े हालात की भयावह तस्वीर पेश करते हैं।
साल 2023-24 में हत्या की दर 1 लाख लोगों पर 45 रही
अप्रैल से सितंबर के बीच हर दिन औसतन 63 लोगों की हत्या हुई
इन आंकड़ों ने दक्षिण अफ्रीका को दुनिया के सबसे हिंसक देशों की सूची में बनाए रखा है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल, जनता में गुस्सा
लगातार हो रही South Africa Mass Shooting की घटनाओं से आम नागरिकों में डर और आक्रोश दोनों बढ़ रहे हैं।
लोग सवाल पूछ रहे हैं कि
अवैध हथियार आखिर कहां से आ रहे हैं
हमलावर खुलेआम फायरिंग कर कैसे फरार हो जाते हैं
पुलिस और प्रशासन कब तक सिर्फ जांच का भरोसा देते रहेंगे
कई सामाजिक संगठनों ने सरकार से अवैध शराब ठिकानों पर सख्त कार्रवाई और स्थायी समाधान की मांग की है।

