Sambhal कब्रिस्तान पैमाइश LIVE: जामा मस्जिद के पास 8 बीघा जमीन पर प्रशासन का एक्शन, शहर छावनी में तब्दील
News-Desk
5 min read
encroachment, Graveyard Dispute, Jama Masjid, land measurement, Law and Order, sambhal, Sambhal News, uttar pradesh newsSambhal graveyard measurement को लेकर उत्तर प्रदेश का संभल एक बार फिर प्रशासनिक, राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का केंद्र बन गया है। मंगलवार को शहर में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था देखने को मिली, जहां गली-गली, चौराहों और संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल, पीएसी और आरएएफ की तैनाती की गई। विवाद का केंद्र संभल की विवादित जामा मस्जिद से सटी लगभग 8 बीघा सरकारी जमीन है, जिस पर कब्रिस्तान के साथ-साथ मकानों और दुकानों के अवैध निर्माण का आरोप है।
🔴 संभल में अभूतपूर्व सुरक्षा घेरा, शहर बना छावनी
सुबह से ही Sambhal graveyard measurement को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर दिखाई दिया। आठ थानों की फोर्स, तीन कंपनियां PAC और एक कंपनी RAF को तैनात किया गया। 500 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी में पूरे इलाके को सील कर दिया गया, ताकि किसी भी तरह की अफवाह, विरोध या तनाव की स्थिति से निपटा जा सके।
ड्रोन कैमरों के जरिए आसमान से निगरानी की गई, वहीं छतों और गलियों पर भी पुलिस की पैनी नजर बनी रही। प्रशासन का स्पष्ट संदेश था—कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं होगा।
🔴 8 बीघा सरकारी जमीन पर पैमाइश क्यों बनी बड़ा मुद्दा
प्रशासन के अनुसार, जामा मस्जिद से सटी यह जमीन सरकारी रिकॉर्ड में कब्रिस्तान के रूप में दर्ज है। आरोप है कि समय के साथ-साथ इस जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया गया और यहां न केवल कब्रिस्तान का विस्तार हुआ, बल्कि कई पक्के मकान और दुकानें भी बना ली गईं। Sambhal graveyard measurement का उद्देश्य जमीन की वास्तविक स्थिति, सीमाओं और कब्जे की सच्चाई को सामने लाना है।
अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई किसी समुदाय विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि सरकारी भूमि के संरक्षण और रिकॉर्ड के सत्यापन से जुड़ी है।
🔴 राजस्व अधिकारियों की बड़ी टीम, फीते से नाप-जोख
पैमाइश की प्रक्रिया में 29 राजस्व अधिकारियों की टीम शामिल रही। टीम का नेतृत्व तहसीलदार धीरेंद्र सिंह ने किया। जमीन पर बने हर मकान और दुकान की फीते से नाप-जोख की गई। मौके पर वरिष्ठ अधिकारी स्वयं मौजूद रहे और एक-एक संरचना की पैमाइश करवाई।
इस दौरान जामा मस्जिद के पुराने रिकॉर्ड और प्राचीन नक्शों को भी देखा गया, जिनमें इस भूमि को कब्रिस्तान की जमीन के रूप में दर्शाया गया है। Sambhal graveyard measurement के दौरान प्रशासन ने हर कदम को दस्तावेजी रूप देने पर जोर दिया।
🔴 22 मकानों और दुकानों को नोटिस, जांच कमेटी गठित
जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने बताया कि प्राथमिक जांच में 22 मकानों और दुकानों पर अवैध कब्जे के संकेत मिले हैं। इन सभी को नोटिस जारी कर दिया गया है। मामले की गहराई से जांच के लिए एक विशेष जांच कमेटी गठित की गई है, जिसे 7 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
यह कमेटी कब्जेदारों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले दस्तावेजों की जांच करेगी। वैध कागजात न मिलने की स्थिति में आगे की कार्रवाई तय होगी।
🔴 SP और प्रशासन की मौजूदगी, फ्लैग मार्च
पैमाइश के दौरान कृष्ण कुमार बिश्नोई स्वयं मौके पर मौजूद रहे। पुलिस और RAF-PAC की टीमों ने इलाके में फ्लैग मार्च किया, ताकि किसी भी प्रकार के उपद्रव की आशंका को पूरी तरह खत्म किया जा सके।
Sambhal graveyard measurement के दौरान प्रशासन और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला, जिससे पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकी।
🔴 ड्रोन निगरानी और तकनीक का इस्तेमाल
इस कार्रवाई की एक खास बात रही आधुनिक तकनीक का उपयोग। ड्रोन कैमरों से न केवल जमीन की स्थिति रिकॉर्ड की गई, बल्कि आसपास के इलाकों, छतों और संभावित संवेदनशील बिंदुओं पर भी नजर रखी गई। इससे प्रशासन को वास्तविक समय में स्थिति की जानकारी मिलती रही।
🔴 प्रशासन का सख्त संदेश: अवैध कब्जे पर बुलडोजर भी संभव
DM डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जांच में अवैध कब्जा प्रमाणित हुआ, तो कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ बुलडोजर चलाने से भी प्रशासन पीछे नहीं हटेगा। आगे की कार्रवाई तहसीलदार की अदालत में दस्तावेजों की जांच और कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर होगी।
दुकान और मकान मालिकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे निर्धारित समयसीमा में अपने वैध दस्तावेज जांच कमेटी के सामने प्रस्तुत करें।
🔴 संभल में माहौल, लोगों की नजरें फैसले पर
Sambhal graveyard measurement के चलते शहर में तनाव तो नहीं दिखा, लेकिन उत्सुकता और चिंता दोनों का माहौल रहा। स्थानीय लोग प्रशासन की कार्रवाई को बारीकी से देख रहे हैं। कई लोग इसे सरकारी जमीन की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, तो कुछ लोग भविष्य की कार्रवाई को लेकर आशंकित हैं।

