Magh Mela में सनातन की गूंज: इटली से आईं लुक्रेशिया बनीं आस्था का केंद्र, गंगा को मां और प्रयाग को तीर्थराज मानती हैं विदेशी श्रद्धालु
News-Desk
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Foreign Devotee, Hindu culture., Italian Woman India, magh mela, Magh Mela news, Naimisharanya, Prayagraj News, Sanatan Dharma, Spiritual newsItalian devotee Magh Mela की यह तस्वीर न केवल आस्था से जुड़ी है, बल्कि यह दर्शाती है कि सनातन धर्म की जड़ें आज वैश्विक स्तर पर कैसे लोगों के हृदय में स्थान बना रही हैं। माघ मेला क्षेत्र में इटली से आईं लुक्रेशिया इन दिनों श्रद्धालुओं के बीच चर्चा और आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। विदेशी परिधान में लिपटी यह युवती जब हाथ जोड़कर “जय श्री राम” और “गंगा मैया की जय” का उद्घोष करती है, तो हर कोई ठहरकर उसे देखने को मजबूर हो जाता है।
🔴 प्रयागराज में विदेशी श्रद्धालु बनी आस्था की मिसाल
माघ मेला क्षेत्र में मौजूद श्रद्धालुओं के लिए लुक्रेशिया किसी कौतूहल से कम नहीं हैं। वह खुद को गुरु ज्ञान से प्राप्त शांति से जुड़ा हुआ बताती हैं और प्रयागराज को तीर्थराज कहकर संबोधित करती हैं। उनके लिए गंगा नदी केवल एक नदी नहीं, बल्कि मां हैं।
जो भी उनके पास जाकर उनके बारे में पूछता है, वह मुस्कुराते हुए हाथ जोड़ती हैं और “जय श्री राम” कहकर उत्तर देती हैं। संगम की रेत को वह स्वर्ग यानी “हैवेन” बताती हैं और कहती हैं कि यहां आकर आत्मा को अद्भुत शांति मिलती है।
🔴 विदेशी पहनावा, भारतीय संस्कार
Italian devotee Magh Mela की सबसे खास बात यह है कि लुक्रेशिया का पहनावा भले ही पश्चिमी हो, लेकिन उनके भाव पूरी तरह भारतीय संस्कृति में रचे-बसे नजर आते हैं। वह हर किसी से नम्रता से बात करती हैं, प्रणाम करती हैं और श्रद्धालुओं के साथ घुल-मिलकर रहती हैं।
हिंदी भाषा में वह पूरी तरह सहज नहीं हैं, लेकिन टूटी-फूटी हिंदी में भी जब वह कहती हैं कि “यह धरती का स्वर्ग है”, तो सुनने वाले भावुक हो जाते हैं।
🔴 पिता आंजलो के साथ माघ मेला पहुंचीं लुक्रेशिया
लुक्रेशिया अकेली भारत नहीं आई हैं। उनके साथ उनके पिता आंजलो भी माघ मेला क्षेत्र में मौजूद हैं। पिता-पुत्री दोनों सनातन परंपरा से प्रभावित नजर आते हैं और गुरु के सानिध्य में समय बिता रहे हैं।
लुक्रेशिया बताती हैं कि गुरुजी के पास आकर उन्हें भीतर से शांति का अनुभव होता है, जो उन्हें दुनिया के किसी और कोने में नहीं मिला।
🔴 गुरु से मुलाकात और शिष्य बनने की कहानी
Italian devotee Magh Mela से जुड़ी इस आध्यात्मिक यात्रा के पीछे एक रोचक कथा है। इस पूरे प्रसंग की जानकारी नागा बाबा मनमौजी राम पुरी ने साझा की।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में लुक्रेशिया पहली बार उनसे मिली थीं। वह रोज प्रणाम करती थीं और यह जानने की कोशिश करती थीं कि बाबा कहां के हैं और यहां क्या साधना होती है। उस समय उनके साथ एक दुभाषिया और कुछ भारतीय मित्र भी थे।
🔴 नैमिषारण्य की महिमा से जुड़ी विदेशी शिष्या
नागा बाबा मनमौजी राम पुरी के अनुसार, उन्होंने बिटिया लुक्रेशिया को नैमिषारण्य तीर्थ की महिमा बताई। नैमिषारण्य की कथाएं, तपोभूमि की शक्ति और सनातन परंपरा का विस्तार सुनकर लुक्रेशिया गहराई से प्रभावित हुईं और अंततः उनकी शिष्या बन गईं।
इतना ही नहीं, उनके पिता आंजलो और कई अन्य विदेशी भी बाबा मनमौजी राम पुरी के शिष्य हैं, जो सनातन धर्म की वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है।
🔴 प्रयाग मोक्ष भूमि, नैमिषारण्य तपोभूमि
नागा बाबा मनमौजी राम पुरी के अनुसार प्रयागराज तीर्थों का राजा है। यहां कल्पवास, साधना और स्नान से शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। वह स्वयं कुंभ और माघ मास दोनों में यहां आकर धूनी रमाते हैं।
वहीं नैमिषारण्य को तपोभूमि बताते हुए उन्होंने कहा कि वहां 85 कोस की परिक्रमा, हनुमान गढ़ी, व्यास गद्दी, काली पीठ जैसे अनेक पावन स्थल हैं। गोमती नदी के तट पर स्थित इस तीर्थ में चक्रतीर्थ, दधीचि कुंड और पांडव किला भी है।
🔴 दशाश्वमेध घाट और प्रभु श्रीराम की कथा
नैमिषारण्य में स्थित दशाश्वमेध घाट का विशेष महत्व बताते हुए बाबा ने कहा कि यहीं भगवान श्रीराम ने यज्ञ किया था। इन सभी पावन कथाओं और स्थलों की जानकारी सुनकर ही लुक्रेशिया, उनके पिता आंजलो और अन्य विदेशी श्रद्धालु सनातन परंपरा से गहराई से जुड़ गए।
Italian devotee Magh Mela की यह कहानी केवल एक विदेशी श्रद्धालु की नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की उस शक्ति की है, जो सीमाओं से परे जाकर लोगों को जोड़ती है।
🔴 माघ मेला बना वैश्विक आस्था का संगम
माघ मेला क्षेत्र में लुक्रेशिया की मौजूदगी यह साबित करती है कि सनातन धर्म केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। आज विदेशी नागरिक भी भारतीय अध्यात्म, तीर्थ और साधना की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
श्रद्धालुओं का कहना है कि जब कोई विदेशी गंगा को मां कहता है और प्रयाग को तीर्थराज मानता है, तो यह भारत की सांस्कृतिक विरासत के लिए गर्व की बात है।

