ओलिंपियन पहलवान Deepak Punia की शादी: झज्जर में पिता के दोस्त की बेटी संग सात फेरे लेंगे; लग्न में सिर्फ चांदी का सिक्का लिया – Jhajjar News
News-Desk
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Bahadurgarh, Celebrity Wedding, Deepak Punia, Haryana News, Indian Wrestling, Olympian News, Sports Personality, UPSC Aspirant BrideDeepak Punia wedding news आज खेल और समाज दोनों जगत में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। झज्जर जिले के छारा गांव से निकलकर ओलिंपिक के अखाड़े तक अपनी पहचान बनाने वाले ओलिंपियन पहलवान दीपक पूनिया आज अपने जीवन की नई पारी शुरू करने जा रहे हैं। बहादुरगढ़ के प्रतिष्ठित हिल्टन रिजॉर्ट में दीपक अपनी मंगेतर शिवानी के साथ सात फेरे लेंगे। यह शादी न सिर्फ एक पारिवारिक आयोजन है, बल्कि उस संघर्ष, मेहनत और सपनों की कहानी का भी उत्सव है, जिसने एक ग्रामीण अखाड़े से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर तय किया।
🔴 लग्न टीका से शादी तक: रस्मों में दिखी सादगी और संस्कार
शादी से एक दिन पहले, 2 फरवरी को झज्जर के धनखड़ फॉर्म हाउस में पारंपरिक लग्न टीके की रस्म हुई। परिवार की महिलाओं और रिश्तेदारों की मौजूदगी में दीपक ने सिर्फ एक रुपए का चांदी का सिक्का स्वीकार किया—जो उनकी सादगी और पारिवारिक मूल्यों की झलक देता है।
इस मौके पर हरियाणवी लोकगीतों की गूंज, ढोल की थाप और पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाएं माहौल को खास बना रही थीं। खेल जगत की चकाचौंध से दूर, यह समारोह गांव और परिवार की जड़ों से जुड़े रहने का संदेश देता नजर आया।
🔴 बारात की तैयारी: गांव से शहर तक का जश्न
दीपक के पिता सुभाष पूनिया के अनुसार, शाम करीब साढ़े चार बजे छारा गांव से बारात रवाना होगी और लगभग पांच बजे बहादुरगढ़ स्थित रिजॉर्ट पहुंचेगी। पूरे रास्ते में डीजे, ढोल और शुभकामनाओं के साथ गांव वाले अपने “केतली पहलवान” को नई जिंदगी की शुरुआत के लिए विदा करेंगे।
स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ शादी नहीं, बल्कि अपने गांव के बेटे की उपलब्धियों और सम्मान का उत्सव है।
🔴 दुल्हन शिवानी: शिक्षा और सेवा का सपना
दीपक की होने वाली दुल्हन शिवानी झज्जर की ही रहने वाली हैं और वर्तमान में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तैयारी कर रही हैं। उनका सपना IAS अधिकारी बनकर समाज और देश की सेवा करना है।
शिवानी ने रोहतक के जाट कॉलेज से इंग्लिश ऑनर्स में एमए किया है और बीएड की डिग्री भी हासिल की है। फिलहाल वह एमएड की तैयारी के साथ-साथ सिविल सर्विसेज की पढ़ाई में जुटी हैं। परिवार का कहना है कि पढ़ाई और करियर को लेकर उन्हें पूरी आज़ादी और समर्थन मिलेगा।
🔴 दोस्ती से रिश्तेदारी तक: अखाड़े में बनी कहानी
दीपक के पिता सुभाष पूनिया बताते हैं कि शिवानी के पिता अनूप सिंह, जो प्रॉपर्टी डीलर हैं, की उनसे मुलाकात अखाड़े में हुई थी। दीपक जब प्रैक्टिस करता था, वहीं दोनों परिवारों की जान-पहचान बढ़ी।
साल 2020 में दोस्ती रिश्तेदारी में बदलने का विचार आया और दोनों परिवारों ने इसे सहर्ष स्वीकार किया। यह कहानी बताती है कि खेल का मैदान सिर्फ मुकाबलों का नहीं, बल्कि रिश्तों का भी मंच बन सकता है।
🔴 ‘केतली पहलवान’ से ओलिंपियन तक का सफर
दीपक पूनिया का जन्म 19 मई 1999 को हरियाणा के झज्जर जिले के छारा गांव में हुआ। बचपन से ही कुश्ती उनके जीवन का हिस्सा रही, क्योंकि उनके पिता खुद स्थानीय स्तर पर पहलवान थे। महज पांच साल की उम्र में दीपक को अखाड़े में उतार दिया गया।
गांव में उन्हें “केतली पहलवान” का नाम मिला, क्योंकि एक बार उन्होंने दूध पीते-पीते पूरी केतली खाली कर दी थी। यह किस्सा आज भी गांव के बुजुर्ग गर्व से सुनाते हैं।
🔴 छत्रसाल स्टेडियम से विश्व मंच तक
दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में प्रशिक्षण लेकर दीपक ने अपने खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। साल 2019 में उन्होंने वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीतकर भारत का नाम रोशन किया।
इसके बाद टोक्यो ओलिंपिक 2021 में उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया, हालांकि ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में मामूली अंतर से पांचवें स्थान पर रहे। यह हार उनके लिए भावनात्मक रूप से कठिन थी, क्योंकि कुछ समय पहले ही उन्होंने अपनी मां को खो दिया था।
🔴 गोल्ड की वापसी: कॉमनवेल्थ गेम्स में चमक
टोक्यो की निराशा के बाद दीपक ने खुद को और मजबूत किया। साल 2022 में बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर उन्होंने न सिर्फ अपने आलोचकों को जवाब दिया, बल्कि देश को गर्व का मौका भी दिया।
इसके अलावा, एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल और कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स में पदक उनके करियर की उपलब्धियों की सूची में शामिल हैं।
🔴 सेना की वर्दी और अखाड़े की मिट्टी: दोहरी पहचान
दीपक पूनिया भारतीय सेना में जूनियर कमीशंड अधिकारी (JCO) के पद पर तैनात हैं। सूबेदार के रूप में सेवा देने के साथ-साथ वे 86 किलोग्राम भार वर्ग में फ्रीस्टाइल कुश्ती में भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
उनकी यह दोहरी पहचान—सैनिक और खिलाड़ी—उन्हें युवाओं के लिए प्रेरणा बनाती है।
🔴 शादी के लिए छोड़ा प्रो रेसलिंग लीग
दीपक को प्रो रेसलिंग लीग (PWL) में महाराष्ट्र की टीम में ग्रेड-ए पहलवान के रूप में शामिल किया गया था, जहां उनका बेस प्राइस 12 लाख रुपए रखा गया था। लेकिन शादी की तैयारियों के चलते उन्होंने इस सीजन में खेलने से इनकार कर दिया।
परिवार का कहना है कि दीपक के लिए यह समय करियर से ज्यादा जीवन की नई शुरुआत का है।
🔴 गांव का गर्व, देश की शान
छारा गांव के लोग दीपक को सिर्फ ओलिंपियन नहीं, बल्कि अपना बेटा मानते हैं। शादी के मौके पर पूरे गांव में सजावट की गई है, और हर कोई मेहमानों का स्वागत करने के लिए उत्साहित है।
बुजुर्गों का कहना है कि दीपक की सफलता ने गांव के बच्चों में खेल के प्रति नया जुनून जगाया है।

