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Pakistan Torture Story: बाढ़ में बहकर सीमा पार पहुंचे लुधियाना के हरविंदर पाल, पाकिस्तानी जेलों में हैवानियत, सुप्रीम कोर्ट के दखल से घर वापसी

Pakistan torture story की यह रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तान किसी थ्रिलर फिल्म की तरह लगती है, लेकिन यह हकीकत है—एक आम भारतीय नागरिक की, जो बाढ़ के पानी में बहते हुए गलती से सीमा पार कर गया और ढाई साल तक पड़ोसी देश की जेलों और सुरक्षा एजेंसियों के हाथों अमानवीय यातनाओं से गुजरता रहा। लुधियाना जिले के गांव परजियां बिहारीपुर निवासी हरविंदर पाल सिंह की यह कहानी केवल व्यक्तिगत पीड़ा नहीं, बल्कि सीमा से जुड़े मानवीय संकट, कानून की जटिलताओं और दो देशों के बीच फंसे आम लोगों की त्रासदी को उजागर करती है।


🔴 बाढ़ बनी सीमा पार करने की वजह: कैसे बह गए हरविंदर और रतनपाल

जुलाई 2023 की भीषण बाढ़ ने पंजाब के कई इलाकों में तबाही मचा दी थी। लुधियाना जिले के सिधवां बेट क्षेत्र के गांव परजियां बिहारीपुर निवासी हरविंदर पाल सिंह और उनके दोस्त रतनपाल सिंह, जालंधर के खैहरा मुशतरका गांव से, फिरोजपुर के राजोके गट्टी और चांदीवाल इलाके में अपनी ममेरी बहन के घर मदद के लिए पहुंचे थे।

दोनों ने गांव वालों के साथ मिलकर बाढ़ में फंसे लोगों, घर के सामान और पशुओं को सुरक्षित निकालने में मदद की। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। जब वे आखिरी में भैंसों को निकालने की कोशिश कर रहे थे, तभी अचानक पानी का बहाव तेज हो गया। तेज धारा दोनों को बहाकर ऐसे इलाके में ले गई, जहां न तो उन्हें अपनी दिशा का अंदाजा रहा और न ही यह पता कि वे अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर चुके हैं।


🔴 सीमा पार पहुंचते ही बदला हर पल: पकड़े गए और लगे जासूसी के आरोप

कुछ ही समय बाद दोनों को पाकिस्तानी रेंजर्स ने पकड़ लिया। हरविंदर पाल के मुताबिक, शुरुआत में उन्होंने समझाने की कोशिश की कि वे भारतीय नागरिक हैं और गलती से बाढ़ में बहकर सीमा पार कर गए हैं। लेकिन उनकी बात पर किसी ने भरोसा नहीं किया।

Pakistan torture story का सबसे भयावह अध्याय यहीं से शुरू होता है। हरविंदर पाल का दावा है कि उन्हें जासूस करार देकर पूछताछ के नाम पर बेरहमी से पीटा गया। रात भर नंगे पैर चलवाया गया, थककर रुकने पर तलवों पर डंडे बरसाए गए। नींद की झपकी आती तो फिर से मारपीट शुरू हो जाती।


🔴 हैवानियत की हदें: रेंजर्स और पुलिस दोनों का टॉर्चर

हरविंदर पाल बताते हैं कि पाकिस्तानी रेंजर्स के टॉर्चर से जब वे टूट चुके थे, तब उन्हें स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया गया। थाने में भी हालात नहीं बदले। वहां भी पिटाई हुई, गंदगी साफ कराई गई और अपमानजनक व्यवहार झेलना पड़ा।

रात के अंधेरे में उन्हें नंगा कर चौकड़ी मारकर जमीन पर बैठने के लिए मजबूर किया जाता। छोटी सी हरकत या जवाब देने की कोशिश पर मारपीट शुरू हो जाती। हरविंदर के शब्दों में, “ढाई साल की वह हर रात आज भी सपनों में लौट आती है, शरीर कांप जाता है।”


🔴 लाहौर सेंट्रल जेल: भारतीय कैदियों की दर्दनाक दुनिया

बाद में हरविंदर पाल को सेंट्रल जेल लाहौर भेज दिया गया। वहां की बैरक में करीब 20 से ज्यादा भारतीय कैदी बंद थे। अधिकतर पर जासूसी का आरोप था और कई सालों से वे पाकिस्तान की जेलों में सड़ रहे थे।

हरविंदर बताते हैं कि कई कैदी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे, फिर भी उनसे जबरन काम करवाया जाता। दवाइयों की कमी, साफ पानी और इलाज का अभाव आम बात थी। Pakistan torture story के इस हिस्से ने मानवीय अधिकारों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।


🔴 सजा पूरी, फिर भी रिहाई नहीं: अधिकारियों का पलटना

हरविंदर पाल को 13 महीने की सजा सुनाई गई थी। जब यह अवधि पूरी हो गई, तो उन्होंने भारत लौटने की मांग की। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने चौंकाने वाला जवाब दिया—“तुम्हारे देश के लोग यह मानने को तैयार नहीं हैं कि तुम भारत के हो, वे तुम्हें वापस नहीं लेना चाहते।”

यह सुनकर हरविंदर टूट गए। न कोई वकील, न कोई मददगार। अकेले ही उन्हें कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी। मामला आखिरकार पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।


🔴 जज के सामने 10 मिनट: परिवार से संपर्क की आखिरी उम्मीद

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जज ने हरविंदर से कहा कि भारत उन्हें वापस नहीं लेना चाहता। हरविंदर ने हिम्मत जुटाकर जज से बहस की और परिवार से बात करने का मौका मांगा। जज ने 10 मिनट का समय दिया।

इस दौरान उन्होंने अपने चाचा हरपाल सिंह और ससुर जीत सिंह से फोन पर बात की। भारत में यह खबर फैलते ही परिवार ने जिला प्रशासन से संपर्क किया। डीसी लुधियाना को मांगपत्र सौंपा गया। तीन महीने तक पत्राचार चला और आखिरकार भारत सरकार ने पाकिस्तान सरकार को औपचारिक पत्र भेजा।


🔴 भारत सरकार का हस्तक्षेप: सुप्रीम कोर्ट का आदेश

जब भारत सरकार की ओर से औपचारिक पत्र गया, तब पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने हरविंदर पाल को रिहा करने के आदेश दिए। यह पल हरविंदर के लिए किसी नए जन्म से कम नहीं था।

31 जनवरी को वे अन्य भारतीय नागरिकों के साथ बाघा बॉर्डर के रास्ते भारत लौटे। अमृतसर में मेडिकल जांच के बाद 1 फरवरी को उन्हें घर भेजा गया।


🔴 गांव में भावुक स्वागत: बेटे की गोद में लौटे पिता

जब हरविंदर अपने गांव परजियां बिहारीपुर पहुंचे, तो पूरा गांव उमड़ पड़ा। पत्नी सिकंदर कौर, ससुर जीत सिंह और सरपंच जसवीर सिंह उन्हें लेने पहुंचे थे।

सबसे मार्मिक पल तब आया, जब उनका छोटा बेटा उन्हें देखते ही दौड़कर गोद में चढ़ गया और मासूमियत से पूछा—“पापा, आप कहां चले गए थे?” यह सुनते ही हरविंदर समेत हर आंख नम हो गई।

पत्नी सिकंदर कौर ने कहा, “मुझे वाहेगुरु पर पूरा भरोसा था। मैं रोज गुरुद्वारा साहिब जाकर अरदास करती थी कि आप वापस आ जाएं। मुझे यकीन था, आप एक दिन जरूर लौटेंगे।”


🔴 सीमा और इंसानियत: एक बड़ा सवाल

Pakistan torture story सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन सैकड़ों लोगों की है, जो गलती से सीमा पार कर जाते हैं और सालों तक कानूनी पचड़ों में फंसे रहते हैं। यह कहानी बताती है कि जब राजनीति और सुरक्षा के बीच इंसानियत दब जाती है, तो आम नागरिक सबसे ज्यादा पीड़ित होता है।

मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि ऐसे मामलों में दोनों देशों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए, ताकि गलती से सीमा पार करने वाले निर्दोष लोग यातनाओं का शिकार न बनें।


हरविंदर पाल सिंह की घर वापसी सिर्फ एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि उस उम्मीद की जीत है जो ढाई साल की यातनाओं के बावजूद नहीं टूटी। यह कहानी याद दिलाती है कि सीमाओं के आर-पार इंसानियत की डोर आज भी जिंदा है, बस जरूरत है उसे समय पर थामने की—ताकि कोई और हरविंदर अपनी पहचान साबित करने के लिए जेलों की अंधेरी कोठरियों में न सड़े।

 

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