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बाल विवाह मुक्त Muzaffarnagar की हुंकार: स्कूल से उठी बालिकाओं की आवाज़, अबकी बार नहीं होगा बाल विवाह

जनपद Muzaffarnagar  में बाल विवाह के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को उस समय नई मजबूती मिली, जब शहीद चंद्र शेखर उच्च प्राथमिक विद्यालय, अलीपुर अटेरना में आयोजित जन-जागरूकता कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं ने एक स्वर में कहा— “अबकी बार बाल विवाह नहीं”। यह कार्यक्रम ब्लॉक बुढाना के ग्राम पंचायत अलीपुर अटेरना में आयोजित किया गया, जहां शिक्षा, सुरक्षा और अधिकारों को लेकर स्पष्ट संदेश दिया गया।


🔴 प्रशासनिक मार्गदर्शन में चला जागरूकता अभियान

जिलाधिकारी उमेश मिश्रा एवं मुख्य विकास अधिकारी कण्डारकर कमल किशोर देशभूषण के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य बाल विवाह मुक्त मुजफ्फरनगर के लक्ष्य को जमीनी स्तर पर सशक्त करना रहा। कार्यक्रम में बच्चों, विशेषकर बालिकाओं को उनके कानूनी अधिकारों, सुरक्षा तंत्र और शिक्षा के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।


🔴 कानून की जानकारी, हेल्पलाइन की समझ

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ राजीव कुमार ने बाल विवाह की रोकथाम को लेकर स्पष्ट और प्रभावी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह एक दंडनीय अपराध है, जिसमें 02 वर्ष तक की सजा, 01 लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है।
इसके साथ ही, आपात स्थिति में पुलिस हेल्पलाइन 112, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, या स्थानीय पुलिस को तत्काल सूचना देने के लिए बच्चों और अभिभावकों को जागरूक किया गया।


🔴 विवाह की वैधानिक आयु पर स्पष्ट संदेश

Child Marriage Awareness Muzaffarnagar अभियान के तहत यह भी स्पष्ट किया गया कि भारत में विवाह के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित है। वक्ताओं ने कहा कि कानून का पालन न केवल बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करता है, बल्कि समाज को भी मजबूत बनाता है।


🔴 शिक्षा, सुरक्षा और स्वावलंबन पर जोर

जिला बाल संरक्षण अधिकारी संजय कुमार ने कहा कि बालक-बालिकाओं की शिक्षा, सुरक्षा, सम्मान, संरक्षण और स्वावलंबन—ये सभी एक-दूसरे से जुड़े स्तंभ हैं। बाल विवाह इन सभी पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। उन्होंने बच्चों से आत्मविश्वास के साथ अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने का आह्वान किया।


🔴 विद्यालय परिवार का सक्रिय सहयोग

इस जन-जागरूकता कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती लता श्री, सहायक अध्यापिका श्रीमती सरोज त्रिपाठी, शिक्षक श्री आदेश कुमार एवं श्री बिरेन्द्र कुमार सहित समस्त स्टाफ का उल्लेखनीय योगदान रहा। विद्यालय परिसर में बच्चों ने पोस्टर, नारों और संवाद के माध्यम से बाल विवाह के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।


🔴 बालिकाओं की पुकार बनी समाज के लिए संदेश

कार्यक्रम के दौरान बालिकाओं द्वारा उठाई गई आवाज़—“अबकी बार बाल विवाह नहीं”—ने उपस्थित अभिभावकों और ग्रामीणों को भी गहराई से प्रभावित किया। यह संदेश स्पष्ट था कि जागरूकता केवल जानकारी तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक मजबूत कदम है।


🔴 समाज को जोड़ने वाला अभियान

Child Marriage Awareness Muzaffarnagar के तहत ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक सोच बदलने का कार्य कर रहे हैं। प्रशासन, शिक्षा विभाग और बाल संरक्षण तंत्र की संयुक्त पहल से यह संदेश तेजी से फैल रहा है कि बाल विवाह न केवल गैरकानूनी है, बल्कि बच्चों के सपनों और अधिकारों का हनन भी है।


अलीपुर अटेरना के विद्यालय में आयोजित यह जन-जागरूकता कार्यक्रम एक संकेत है कि जब प्रशासन, शिक्षक और बच्चे साथ आते हैं, तो समाज में सकारात्मक बदलाव संभव होता है। बालिकाओं की यह पुकार आने वाले समय में बाल विवाह के खिलाफ एक मजबूत सामाजिक आंदोलन का आधार बन सकती है।

 

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