उत्तर प्रदेश

शिक्षा पर सियासी संग्राम: Akhilesh Yadav का भाजपा पर बड़ा आरोप, 5 साल में 18,727 सरकारी स्कूल बंद

UP government school closure को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने भाजपा सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मौजूदा शासन में न केवल शिक्षा का स्तर गिरा है, बल्कि सरकारी स्कूलों को योजनाबद्ध तरीके से बंद किया गया है।

अखिलेश यादव ने दावा किया कि पहले “स्कूल विलय” के नाम पर 27 हजार सरकारी विद्यालयों को समाप्त करने की कोशिश हुई और अब राज्यसभा में यह तथ्य सामने आ चुका है कि बीते पांच वर्षों में 18,727 सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं।


🔴 स्कूल नहीं, व्यवस्था बंद हो रही है

जारी बयान में अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार किताबें उपलब्ध कराने में असफल है, लेकिन स्कूल बंद कराने में पूरी तरह सक्रिय है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा से ही समाज में सवाल पूछने की क्षमता और वैज्ञानिक दृष्टि विकसित होती है, और यही बात सत्ताधारी दल को असहज करती है।

उनका कहना था कि यदि जनता शिक्षित और जागरूक हो गई, तो संकीर्ण सोच अपने आप कमजोर पड़ जाएगी। इसी कारण ज्ञान, विज्ञान और तर्क आधारित शिक्षा को हाशिये पर धकेला जा रहा है।


🔴 निजी स्कूलों को मिलेगा फायदा, जनता पर बढ़ेगा बोझ

सरकारी स्कूलों के बंद होने का सीधा असर आम परिवारों पर पड़ेगा। अखिलेश यादव ने कहा कि जैसे-जैसे सरकारी शिक्षा संस्थान खत्म होंगे, वैसे-वैसे निजी स्कूलों की मनमानी बढ़ेगी।

उन्होंने चेताया कि मध्यम और गरीब वर्ग के परिवारों की आय का बड़ा हिस्सा बच्चों की पढ़ाई में खर्च हो जाएगा। फीस, किताबें, ड्रेस और अन्य खर्च मिलाकर शिक्षा एक महंगा बोझ बनती चली जाएगी। जनता यह सब देख और समझ रही है।


🔴 शिक्षा का असंतोष चुनाव में बदलेगा राजनीतिक संदेश

सपा अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा से जुड़ा यह असंतोष केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा। शिक्षकों, शिक्षामित्रों, विद्यालय कर्मचारियों, अभिभावकों और शिक्षा से वंचित बच्चों का गुस्सा आने वाले चुनावों में खुलकर सामने आएगा।

उनके अनुसार, स्कूल बंद होने से केवल एक इमारत नहीं जाती, बल्कि गांव-कस्बों की उम्मीद, अवसर और भविष्य प्रभावित होता है। यही वर्ग चुनाव में भाजपा के खिलाफ निर्णायक भूमिका निभा सकता है।


🔴 नैतिकता और नीति पर तीखा कटाक्ष

अखिलेश यादव ने राजनीति में नैतिकता के प्रश्न को भी मजबूती से उठाया। उन्होंने शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि नेता वही होता है जिसमें नीति हो और नीति उसी में होती है जिसमें नैतिकता हो।

उन्होंने कहा कि अहंकार में डूबे लोग ऐसे विचार सुनते नहीं हैं और इतिहास गवाह है कि ऐसे लोगों का पतन तय होता है। यह टिप्पणी मौजूदा सत्ता व्यवस्था पर एक गहरे राजनीतिक संकेत के रूप में देखी जा रही है।


🔴 बद्रीका आश्रम में निजी प्रवास

राजनीतिक बयान से इतर अखिलेश यादव हाल ही में निजी दौरे पर हिमाचल प्रदेश पहुंचे। वह सिरमौर जिले की राजगढ़ तहसील अंतर्गत करगाणु पंचायत के शलामु स्थित बद्रीका आश्रम गए।

यहां उन्होंने आश्रम के संस्थापक ओम स्वामी से मुलाकात की। उनकी पत्नी डिंपल यादव और बेटी पहले से ही आश्रम में ठहरी हुई हैं। इस दौरान अखिलेश यादव ने मीडिया से दूरी बनाए रखी।


🔴 शिक्षा फिर बनी राजनीतिक केंद्रबिंदु

उत्तर प्रदेश में शिक्षा हमेशा से राजनीतिक विमर्श का अहम मुद्दा रही है। सरकारी स्कूलों की संख्या, शिक्षकों की उपलब्धता, संसाधनों की कमी और बच्चों की पहुंच — ये सभी विषय अब फिर चर्चा में हैं।

अखिलेश यादव के ताजा बयान ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले समय में शिक्षा केवल सामाजिक विषय नहीं, बल्कि सत्ता बनाम विपक्ष की सियासत का बड़ा मैदान बनने जा रही है।


सरकारी स्कूलों के बंद होने का सवाल अब केवल प्रशासनिक नहीं रहा। यह शिक्षा के अधिकार, सामाजिक बराबरी और राजनीतिक जवाबदेही से जुड़ चुका है। अखिलेश यादव के बयान के बाद यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक गूंजने वाला है, जिसका असर नीतियों से लेकर मतदान तक साफ दिखाई दे सकता है।

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