उत्तर प्रदेश

Aligarh Langur Guard Removed: धर्म समाज कॉलेज से ‘गोलू’ की छुट्टी, वन विभाग ने छुड़ाया—बंदरों से बचाव की अनोखी व्यवस्था खत्म

Aligarh के धर्म समाज कॉलेज परिसर में लंबे समय से बंदरों के आतंक से राहत दिलाने वाला ‘गोलू’ नाम का लंगूर अब वहां नजर नहीं आएगा। वन विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए कॉलेज परिसर से लंगूर को मुक्त करा दिया और उसकी बतौर “लंगूर गार्ड” सेवा समाप्त कर दी। इस फैसले के बाद छात्र-छात्राओं के बीच जहां हैरानी दिखाई दी, वहीं परिसर में फिर से बंदरों की समस्या बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

वन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी वन्यजीव को इस प्रकार रस्सी से बांधकर उपयोग में रखना नियमों के विरुद्ध है।


छह महीने पहले बंदरों से बचाव के लिए किया गया था तैनात

कॉलेज परिसर में पिछले काफी समय से बंदरों की बढ़ती संख्या छात्रों, खासकर छात्राओं के लिए परेशानी का कारण बनी हुई थी। इसी समस्या से निपटने के लिए कॉलेज प्रशासन ने करीब छह महीने पहले खेरेश्वर निवासी लव के पास मौजूद ‘गोलू’ नामक लंगूर को परिसर में तैनात किया था।

गोलू की मौजूदगी से बंदरों की गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी आई थी और परिसर में सामान्य गतिविधियां अपेक्षाकृत सुरक्षित हो गई थीं। इस व्यवस्था के तहत लंगूर की देखरेख के बदले हर महीने 12 हजार रुपये का भुगतान किया जा रहा था।


सुबह से शाम तक करता था नियमित ड्यूटी

कॉलेज प्रशासन के अनुसार गोलू रोज सुबह लगभग आठ बजे परिसर में सक्रिय रहता था और शाम पांच बजे तक बंदरों को दूर रखने का काम करता था। इसके बाद वह कॉलेज परिसर में बने पेड़ पर अपने ठिकाने पर आराम करता था।

छात्रों और शिक्षकों के बीच गोलू की मौजूदगी एक परिचित दृश्य बन चुकी थी। कई छात्र-छात्राएं उसके साथ तस्वीरें भी लेते थे और उसे परिसर का “अनौपचारिक सुरक्षा प्रहरी” माना जाने लगा था।


वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर कराई कार्रवाई

14 अप्रैल को वन विभाग की टीम कॉलेज परिसर पहुंची और लंगूर को रस्सी से बांधकर रखने पर आपत्ति जताई। अधिकारियों का कहना था कि वन्यजीव संरक्षण नियमों के तहत किसी जंगली जीव को इस तरह बांधकर उपयोग में लेना अवैध है।

जीव-जंतु संरक्षक पुत्तूलाल के नेतृत्व में टीम ने मौके पर ही कार्रवाई करते हुए गोलू को मुक्त कराया और उसे परिसर से बाहर ले जाया गया।


छात्राओं ने जताई चिंता—अब बंदरों से कैसे मिलेगी राहत?

जब गोलू को परिसर से ले जाया जा रहा था, उस दौरान मौजूद छात्राओं ने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया। कई छात्राओं ने वन विभाग के अधिकारियों से सवाल भी किया कि अब बंदरों की समस्या से उन्हें कैसे राहत मिलेगी।

इस पर अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि नगर निगम के सहयोग से बंदरों को पकड़ने और स्थानांतरित करने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि परिसर में सुरक्षा बनी रहे।


वन्यजीवों के उपयोग पर नियमों का सख्ती से पालन जरूरी

वन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि लंगूर जैसे वन्यजीवों को इस तरह किसी परिसर में बांधकर रखना वन्यजीव संरक्षण कानूनों के विरुद्ध है। ऐसे मामलों में संबंधित संस्थानों को वैकल्पिक उपाय अपनाने की सलाह दी जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बंदरों की समस्या से निपटने के लिए वैज्ञानिक और मानवीय तरीकों का उपयोग करना ही स्थायी समाधान हो सकता है।


परिसर में फिर बढ़ सकती है बंदरों की गतिविधि

गोलू की विदाई के बाद कॉलेज परिसर में बंदरों की संभावित वापसी को लेकर चिंता जताई जा रही है। छात्र-छात्राओं का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में लंगूर की मौजूदगी से काफी राहत मिली थी।

अब प्रशासन और नगर निगम के सामने चुनौती है कि परिसर में बंदरों की समस्या का स्थायी समाधान जल्द सुनिश्चित किया जाए।


छात्रों के बीच लोकप्रिय था ‘गोलू’ 🐒

कॉलेज परिसर में गोलू सिर्फ एक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा नहीं था, बल्कि वह छात्रों के बीच एक खास पहचान भी बना चुका था। उसकी मौजूदगी से परिसर का माहौल अलग तरह का महसूस होता था और कई छात्र उसे अपने कॉलेज जीवन की यादों से जोड़कर देखते थे।

वन विभाग की कार्रवाई के बाद अब गोलू की अनुपस्थिति परिसर में चर्चा का विषय बनी हुई है।


धर्म समाज कॉलेज परिसर से लंगूर ‘गोलू’ को हटाए जाने के बाद बंदरों की समस्या फिर से चर्चा में आ गई है। वन विभाग की कार्रवाई ने जहां वन्यजीव संरक्षण नियमों की अहमियत को रेखांकित किया है, वहीं कॉलेज प्रशासन और नगर निगम के सामने अब परिसर में सुरक्षित और स्थायी समाधान तलाशने की नई चुनौती भी खड़ी हो गई है।

 

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