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Jeffrey Epstein Middle East Links: काबा की किस्वा से ‘प्राइवेट मस्जिद’ तक—मिडिल ईस्ट कनेक्शन ने बढ़ाए सवाल

Jeffrey Epstein के मिडिल ईस्ट से जुड़े संबंधों और उनके निजी द्वीप पर बनी एक विवादित संरचना को लेकर सामने आए दस्तावेजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चाओं को जन्म दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने वर्षों तक पश्चिम एशिया के प्रभावशाली लोगों से संपर्क बनाए रखने के साथ-साथ इस्लामी धार्मिक और स्थापत्य शैली से जुड़ी दुर्लभ वस्तुएं भी एकत्र कीं।

इन वस्तुओं का उपयोग उन्होंने कैरेबियन क्षेत्र के अपने निजी द्वीप Little Saint James पर बनी एक रहस्यमयी इमारत को सजाने में किया, जिसे वे कथित तौर पर “मस्जिद” कहते थे।


काबा की किस्वा और ऐतिहासिक टाइल्स जुटाने के प्रयासों पर चर्चा

दस्तावेजों के अनुसार, एपस्टीन ने मक्का स्थित Kaaba से जुड़ी किस्वा प्राप्त करने की कोशिश की थी। किस्वा वह विशेष कपड़ा होता है जिस पर सोने और चांदी के धागों से कुरान की आयतें कढ़ी जाती हैं और इसे काबा पर चढ़ाया जाता है।

इसके अलावा उजबेकिस्तान की एक मस्जिद से हाथ से तैयार टाइल्स और सीरिया की पारंपरिक वास्तुकला से प्रेरित सुनहरे गुंबद जैसी डिजाइन भी इस संरचना में शामिल किए जाने की बात सामने आई। हालांकि इन वस्तुओं की प्राप्ति की प्रक्रिया और स्रोतों को लेकर स्पष्ट आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।


नॉर्वे के राजनयिक के माध्यम से प्रभावशाली संपर्कों तक पहुंच

रिपोर्टों में यह भी उल्लेख मिलता है कि एपस्टीन ने नॉर्वे के राजनयिक Terje Rød-Larsen के माध्यम से पश्चिम एशिया के प्रभावशाली व्यक्तियों से संपर्क बनाने का प्रयास किया। कथित तौर पर इन संपर्कों में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman, सलाहकार राफत अल सब्बाग और शाही सहयोगी अजीजा अल अहमदी जैसे नाम शामिल बताए गए।

इन्हीं नेटवर्क के जरिए धार्मिक महत्व की कुछ वस्तुएं प्राप्त होने के दावे भी सामने आए, हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।


प्राइवेट आइलैंड पर बनी संरचना को ‘मस्जिद’ कहता था एपस्टीन

एपस्टीन के निजी द्वीप पर बनी एक रहस्यमयी इमारत लंबे समय तक चर्चा का विषय रही। इसे कभी चैपल, कभी मंदिर और कभी संगीत कक्ष बताया गया, लेकिन बाद में सामने आए ईमेल और सहयोगियों के बयानों से संकेत मिला कि वह इसे “मस्जिद” कहता था।

इस परियोजना से जुड़े रोमानियाई कलाकार आयन निकोला ने भी बताया कि एपस्टीन इस संरचना को इसी नाम से संबोधित करता था। हालांकि यह स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला कि इस भवन का उपयोग कभी धार्मिक गतिविधियों के लिए किया गया हो।


इस्लामी वास्तुकला में विशेष रुचि के संकेत

रिकॉर्ड के अनुसार एपस्टीन को इस्लामी स्थापत्य शैली में लंबे समय से रुचि थी। वर्ष 2003 में उन्होंने एक बड़े फारसी कालीन का उल्लेख किया, जो कथित तौर पर किसी मस्जिद से जुड़ा बताया गया था।

2008 के दौरान जेल में रहने के समय भी उन्होंने अपने द्वीप पर हमाम और इस्लामी शैली के बगीचे बनाने की योजना पर चर्चा की थी। 2013 में उन्होंने सीरिया के अलेप्पो स्थित 15वीं सदी के Yalbougha Hammam की डिजाइन से प्रेरित संरचना तैयार करने का सुझाव दिया था।


क्राउन प्रिंस के आर्थिक सलाहकार बनने की कोशिश की चर्चा

करीब 2010 के बाद एपस्टीन ने सऊदी अरब के साथ आर्थिक सहयोग से जुड़े विचारों में रुचि दिखाई। उस समय देश की तेल कंपनी Saudi Aramco को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की तैयारी चल रही थी।

बताया जाता है कि उन्होंने स्वयं को वित्तीय सलाहकार के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की और कुछ वैकल्पिक आर्थिक प्रस्ताव भी सामने रखे, जिनमें कथित तौर पर ‘शरिया’ आधारित मुद्रा का विचार शामिल बताया गया।

हालांकि इन प्रस्तावों पर किसी आधिकारिक स्तर पर सहमति बनने के संकेत नहीं मिले।


किस्वा से जुड़े कपड़ों की कथित प्राप्ति पर उठे प्रश्न

एपस्टीन के स्टाफ से जुड़े संचार रिकॉर्ड में यह उल्लेख भी सामने आया कि उनके द्वीप के लिए काबा से जुड़े तीन अलग-अलग प्रकार के कपड़े भेजे जाने की बात कही गई थी। इनमें एक काबा के अंदर उपयोग किया गया कपड़ा, दूसरा बाहरी आवरण और तीसरा उसी निर्माण इकाई से तैयार बताया गया था।

हालांकि इन दावों की पुष्टि किसी आधिकारिक स्रोत से नहीं हो सकी है और इस विषय पर संबंधित पक्षों की ओर से सार्वजनिक प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई।


2017 के बाद संपर्कों में आई दूरी

2017 में सऊदी अरब की राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव के बाद एपस्टीन के प्रयास अपेक्षित परिणाम तक नहीं पहुंच सके। इसी दौरान उनके निजी द्वीप को आए तूफान से भी नुकसान हुआ, जिससे वहां रखी कुछ संरचनाएं प्रभावित हुईं।

बाद के वर्षों में उनके पुराने कानूनी मामलों के दोबारा खुलने से परिस्थितियां और जटिल हो गईं।


2019 में गिरफ्तारी और विवादों के बीच मौत

जुलाई 2019 में एपस्टीन को दोबारा गिरफ्तार किया गया। इसके कुछ ही समय बाद उन्होंने अपने निजी द्वीप की संपत्ति एक ट्रस्ट को हस्तांतरित कर दी। अगस्त 2019 में न्यूयॉर्क के मैनहट्टन स्थित हिरासत केंद्र में उनकी मौत हो गई, जिसे आधिकारिक रूप से आत्महत्या बताया गया।

इस पूरे घटनाक्रम ने उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और गतिविधियों को लेकर कई सवाल अनुत्तरित छोड़ दिए।


जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मिडिल ईस्ट संपर्कों और उनके निजी द्वीप पर बनी विवादित संरचना को लेकर सामने आए दस्तावेजों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस को जन्म दिया है, हालांकि कई दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी भी स्पष्ट नहीं है और इन संबंधों की वास्तविक प्रकृति को लेकर जांच और चर्चा जारी है।

 

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