Benjamin Netanyahu का बड़ा दावा: ‘मुजतबा खामेनेई जिंदा लेकिन कमजोर’, ईरान की सत्ता और परमाणु कार्यक्रम पर फिर बढ़ा तनाव
Benjamin Netanyahu ने ईरान की सत्ता और परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई बड़े दावे किए हैं। अमेरिकी चैनल CBS के चर्चित शो “60 Minutes” को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि Mojtaba Khamenei जिंदा हैं, लेकिन उनकी सत्ता पर पकड़ उनके पिता Ali Khamenei जैसी मजबूत नहीं है।
नेतन्याहू के मुताबिक मुजतबा किसी गुप्त बंकर या सुरक्षित ठिकाने पर छिपे हुए हैं और वहीं से ईरान की सत्ता को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इस समय ईरान 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अपने सबसे कमजोर दौर से गुजर रहा है।
‘ईरान के भीतर बढ़ रही दरारें’, नेतन्याहू ने शासन पर उठाए सवाल
इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान के भीतर मतभेद बढ़ते जा रहे हैं। उनके मुताबिक शासन के अलग-अलग गुटों के बीच संघर्ष को लेकर राय अलग है।
उन्होंने दावा किया कि कुछ गुट अमेरिका और इजराइल के खिलाफ टकराव जारी रखना चाहते हैं, जबकि दूसरे नेताओं को डर है कि लगातार तनाव से ईरान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह कमजोर हो सकती है और जनता सड़कों पर उतर सकती है।
नेतन्याहू ने कहा कि ईरानी शासन को सबसे ज्यादा डर अपनी ही जनता से है। उनके अनुसार हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान में विरोध प्रदर्शन बढ़े हैं और कई जगह लोगों ने सरकार के खिलाफ आवाज उठाई है।
हमले में घायल होने का दावा, गुप्त ठिकाने पर इलाज जारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक Mojtaba Khamenei फरवरी में हुए अमेरिका-इजराइल हमले में घायल हो गए थे। दावा किया गया कि उस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और उनके परिवार को भी निशाना बनाया गया।
कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में कहा गया कि हमले के बाद मुजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हुए और उन्हें गुप्त स्थान पर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है।
बताया गया कि उनके पैर और हाथ की कई सर्जरी हुई हैं और चेहरे पर भी गंभीर चोटें आई हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है।
नेतन्याहू बोले- ‘ईरान अब भी परमाणु खतरा बना हुआ’
Benjamin Netanyahu ने इंटरव्यू में कहा कि ईरान के खिलाफ हाल की सैन्य कार्रवाई के बावजूद खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
उनके मुताबिक ईरान के पास अब भी एनरिच्ड यूरेनियम मौजूद है और कई परमाणु केंद्र सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
नेतन्याहू ने दावा किया कि अगर अमेरिका और इजराइल ने हालिया कार्रवाई नहीं की होती, तो ईरान एक-दो महीने के भीतर परमाणु बम बनाने की स्थिति में पहुंच सकता था।
अमेरिका और इजराइल दोबारा कार्रवाई के लिए तैयार?
इंटरव्यू के दौरान नेतन्याहू ने कहा कि Donald Trump और इजराइल इस बात पर सहमत हैं कि जरूरत पड़ने पर ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई की जा सकती है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर आर्थिक दबाव और कूटनीतिक समझौते से लक्ष्य हासिल हो जाता है, तो सैन्य विकल्प अंतिम रास्ता होगा।
विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचाने का दावा
नेतन्याहू ने कहा कि हालिया हमलों में ईरान के पेट्रोकेमिकल प्लांट, स्टील फैक्ट्रियों और मिसाइल निर्माण से जुड़े कई ठिकानों को निशाना बनाया गया।
उन्होंने दावा किया कि इससे ईरान की अर्थव्यवस्था और सैन्य क्षमता दोनों को बड़ा नुकसान पहुंचा है। उनके मुताबिक यह कार्रवाई केवल सैन्य लक्ष्य तक सीमित नहीं थी बल्कि ईरान की रणनीतिक क्षमता को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई थी।
हिजबुल्लाह, हमास और हूती पर भी असर पड़ने का दावा
नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के कमजोर होने का असर Hezbollah, Hamas और हूती जैसे संगठनों पर भी पड़ेगा।
उनके मुताबिक ये संगठन लंबे समय से ईरान के समर्थन पर निर्भर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि युद्ध से पहले हिजबुल्लाह के पास लगभग डेढ़ लाख मिसाइलें और रॉकेट थे, जिनमें से 90 प्रतिशत से अधिक नष्ट कर दिए गए हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
सोशल मीडिया पर इजराइल विरोधी माहौल को लेकर भी बोले नेतन्याहू
इंटरव्यू में सोशल मीडिया पर इजराइल की छवि को लेकर पूछे गए सवाल पर नेतन्याहू ने कहा कि कई विदेशी ताकतें बॉट फार्म और फर्जी अकाउंट के जरिए इजराइल विरोधी माहौल बनाने की कोशिश कर रही हैं।
उन्होंने दावा किया कि इसका प्रभाव खासतौर पर अमेरिका के युवा वर्ग पर पड़ा है। हालांकि उन्होंने किसी विशेष देश का नाम नहीं लिया।
अमेरिकी सैन्य सहायता धीरे-धीरे खत्म करने की योजना
नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इजराइल आने वाले वर्षों में अमेरिका से मिलने वाली सैन्य आर्थिक सहायता को धीरे-धीरे कम करना चाहता है।
उन्होंने कहा कि इजराइल अब केवल सहायता लेने वाला देश नहीं बल्कि अमेरिका का रणनीतिक साझेदार बनना चाहता है। उनके मुताबिक आने वाले 10 वर्षों में अमेरिकी सैन्य सहायता को शून्य तक लाने की योजना पर विचार किया जा सकता है।
इसके बदले इजराइल अमेरिका के साथ तकनीक, खुफिया जानकारी और मिसाइल डिफेंस जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाना चाहता है।
पश्चिम एशिया में बढ़ सकता है तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू के बयान ऐसे समय आए हैं जब पश्चिम एशिया पहले से ही गंभीर तनाव के दौर से गुजर रहा है।
ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ती बयानबाजी का असर वैश्विक राजनीति, तेल बाजार और सुरक्षा समीकरणों पर भी पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार तनाव कम करने और कूटनीतिक समाधान की अपील कर रहा है।

