Hardoi: ‘बिना सोने के जेवर बारात लौट गई तो?’ भाजपा विधायक श्याम प्रकाश की पोस्ट से मचा सियासी हलचल
News-Desk
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BJP MLA, Gold Jewellery Debate, hardoi, political news, Uttar Pradesh Politics, Viral Statement, नरेंद्र मोदी, भाजपा विधायक, वायरल पोस्ट, श्याम प्रकाश, सोना खरीद विवाद, हरदोई न्यूजShyam Prakash एक बार फिर अपनी बेबाक टिप्पणी को लेकर सुर्खियों में आ गए हैं। Hardoi जिले की गोपामऊ सीट से भाजपा विधायक श्याम प्रकाश ने इस बार प्रधानमंत्री Narendra Modi की सोना खरीदने को लेकर की गई अपील पर सोशल मीडिया पोस्ट करते हुए ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस छेड़ दी।
विधायक ने अपने बेटे की दिसंबर में होने वाली शादी का जिक्र करते हुए चिंता जताई कि कहीं बिना सोने के जेवर बारात वापस न कर दी जाए। उनकी यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई।
‘बिना मंगलसूत्र क्या हिंदू विवाह होगा?’ विधायक ने उठाया सवाल
Shyam Prakash ने अपनी पोस्ट में सवाल उठाया कि अगर लोग सोना और गहने खरीदना बंद कर दें, तो क्या पारंपरिक हिंदू विवाह उसी तरह संभव हो पाएंगे।
उन्होंने लिखा कि बिना मंगलसूत्र और सोने के जेवर के क्या कोई हिंदू विवाह संपन्न हो सकता है। इसके साथ ही उन्होंने अपने बेटे की शादी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें चिंता है कि कहीं बिना सोने के गहनों के बारात वापस न लौटा दी जाए, जैसा कई बार देखने को मिलता है।
उनकी इस टिप्पणी को कई लोगों ने व्यंग्य और सामाजिक वास्तविकता से जोड़कर देखा, जबकि कुछ लोगों ने इसे प्रधानमंत्री की अपील पर अप्रत्यक्ष तंज बताया।
‘एक साल के लिए शादी ही रोक दें?’ बयान पर बढ़ी बहस
विधायक ने अपनी पोस्ट में यह सुझाव भी दिया कि यदि सोना खरीदने को लेकर इतनी सख्ती की बात हो रही है, तो एक साल तक विवाह समारोह ही रोक देने पर भी विचार किया जा सकता है।
हालांकि उन्होंने इसे सवालिया अंदाज में लिखा था, लेकिन सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कुछ लोगों ने इसे हास्य और व्यंग्य के रूप में लिया, जबकि कुछ यूजर्स ने इसे अनुचित टिप्पणी बताया।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि श्याम प्रकाश अपने अलग अंदाज और बेबाक बयानों के लिए पहले भी चर्चा में रहे हैं। यही वजह है कि उनकी टिप्पणियां अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती हैं।
कुछ देर बाद डिलीट कर दी पोस्ट
मामला बढ़ने के बाद विधायक ने अपनी पोस्ट सोशल मीडिया से हटा दी। हालांकि तब तक पोस्ट के स्क्रीनशॉट तेजी से वायरल हो चुके थे।
सूत्रों के अनुसार पोस्ट में “भक्त” शब्द का भी इस्तेमाल किया गया था, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस और तेज हो गई। माना जा रहा है कि उन्होंने यह शब्द प्रधानमंत्री की अपील का समर्थन करने वाले लोगों के संदर्भ में इस्तेमाल किया था।
पोस्ट डिलीट होने के बाद भी राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा जारी रही।
श्याम प्रकाश ने दी सफाई, बोले- शादी में छूट मिलनी चाहिए
विवाद बढ़ने के बाद विधायक श्याम प्रकाश ने अपनी टिप्पणी पर सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि उनकी मंशा किसी का विरोध करना नहीं थी, बल्कि वे यह कहना चाहते थे कि शादी-विवाह जैसे पारंपरिक आयोजनों के लिए सोना खरीदने की अनुमति बनी रहनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि सोना खरीदने पर किसी तरह की रोक लगती है, तो शादी समारोहों को इससे अलग रखा जाना चाहिए। बाकी अन्य खरीद पर पाबंदी लगाई जा सकती है।
विधायक के मुताबिक उनकी टिप्पणी को गलत तरीके से समझा गया और सोशल मीडिया पर उसे अलग रूप दे दिया गया।
इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने की बात भी कही
अपनी पोस्ट में विधायक ने यह भी लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के बाद वह खुद भी इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर विचार कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ऊर्जा संरक्षण और ईंधन बचत को लेकर सरकार के प्रयास महत्वपूर्ण हैं और लोग धीरे-धीरे वैकल्पिक संसाधनों की ओर बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों और ऊर्जा संरक्षण को लेकर सरकार लगातार जागरूकता अभियान चला रही है, जिसका असर अब राजनीतिक नेताओं के बयानों में भी दिखाई देने लगा है।
सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
श्याम प्रकाश की पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं भी बंटी हुई नजर आईं। कुछ लोगों ने इसे आम भारतीय परिवारों की वास्तविक चिंता बताया, जहां विवाह में सोने के गहनों को परंपरा और सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है।
वहीं कुछ लोगों ने कहा कि नेताओं को सोशल मीडिया पर बयान देते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि ऐसी टिप्पणियां राजनीतिक विवाद का रूप ले सकती हैं।
पहले भी चर्चा में रह चुके हैं श्याम प्रकाश
Shyam Prakash पहले भी कई बार अपनी ही सरकार और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर सार्वजनिक टिप्पणियां कर चुके हैं। उनकी स्पष्टवादिता को उनके समर्थक उनकी लोकप्रियता की वजह मानते हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उनकी शैली पारंपरिक राजनीतिक बयानबाजी से अलग मानी जाती है, जिसके कारण उनके बयान अक्सर चर्चा में आ जाते हैं।

